उमर अब्दुल्ला बोले-अगर पता होता एक धर्म को महत्व दिया जाएगा तो हमारा फैसला कुछ और होता
नई दिल्ली, 27 अप्रैल: नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को देश में इस समय लाउडस्पीकर, हिजाब और हलाल मीट को लेकर चल रहे विवादों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मर अब्दुल्ला ने लाउडस्पीकर विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे बेवजह शुरू हुई बहस बताया है। उमर ने कहा कि सरकार को सिर्फ मुसलमानों के लाउडस्पीकर से तकलीफ है। अब्दुल्ला ने कहा कि क्या मंदिर और गुरुद्वारों पर माइक नहीं लगाए जाते, लेकिन आपको तकलीफ सिर्फ हमारे माइक से है।
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उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि, सियासत के लिए एक गलत माहौल बनाया जा रहा है। ये सिर्फ हिजाब की बात नहीं है।हमें कहा जा रहा है कि मस्जिदों में लाउडस्पीकर इस्तेमाल नहीं होने चाहिए, क्यों? अगर बांकी जगहों पर लाउडस्पीकर होते हैं तो मस्जिदों में क्यों नहीं। दिन में पांच बार अजान होती है इसमें गुनाह क्या है?हम नहीं कहते हैं कि मंदिरों में माइक नहीं लगने चाहिए, क्या बाहर मंदिरों में माइक नहीं लगते हैं? क्या गुरुद्वारों में माइक नहीं लगते हैं, लेकिन आपको सिर्फ हमारा माइक खटकता है।'
उमर अब्दुल्ला ने कहा, 'आप हमें कहते हो कि हलाल मीट नहीं बिकना चाहिए, क्यों? हमारे मजहब में है कि हमें हलाल मीट खाना है, आप क्यों उस पर रोक लगा रहे हैं। हम आपको मजबूर नहीं कर रहे हैं खाने पर, आप बताइए किस मुसलवान ने किसी गैर मुस्लिम को कहा है कि आपको मजबूरन हलाल खाना है? आप अपने हिसाब से खाइए, हम अपने हिसाब से खाइए। आपको केवल हमारा मजहब खटकता है, हमारे कपड़े पसंद नहीं है, आपको सिर्फ हमारा नमाज पढ़ने का तरीका पसंद नहीं है, बांकियों पर आपको कोई एतराज नहीं है।'
उन्होंने आगे कहा,' ये एक नफरत यहां डाली जा रही है, ये वो हिंदुस्तान नहीं है जिसके साथ जम्मू कश्मीर ने इलहाक किया था, हमने जब इलहाक किया था तो उस हिंदुस्तान के साथ इलहाक किया था, जिसमें हर मजहब को बराबर के नजरिए से देखा जाएगा। हमें ये नहीं कहा गया था कि एक मजहब को ज्यादा अहमियत दी जाएगी और बांकी मजहबों को दबाया जाएगा। अगर हमें ये कहा गया होता तो शायद हमारा फैसला कुछ और होता।
उन्होंने कहा कि, हमने उस समय सोच समझकर फैसला लिया था क्योंकि हमको कहा गया था कि हर मजहब को बराबर के नजरिए से देखा जाएगा। ये हमारी पहचान है... हम भाईचारे की बात करते हैं लेकिन हमारा मुकाबला उन लोगों से है जो इस भाईचारे को तहस-नहस करना चाहते हैं। हम उसकी इजाजत नहीं देंगे।
उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि, अगर वाकई में बिजली की कमी है तो बाकी के घंटों में बिजली की कटौती करें, लेकिन शहरी और इफ्तार के वक्त बिजली नहीं काटिए। माइक, हलाल, हिजाब और रोजों में बिजली भी नहीं दे रहे तो क्या दे रहे हो आप हमें? सिर्फ दुख और दर्द...हमारे मुल्क के संविधान में है कि हम सेक्यूलर हैं और सभी को अपने धर्म को मानने की आजादी है।












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