जम्मू कश्मीर प्रशासन ने डिप्टी कमिश्नर और SSP को दिए निर्देश, प्रवासी कर्मचारी ना छोड़ें घाटी
श्रीनगर, अक्टूबर 13। जम्मू कश्मीर में स्थानिय नागरिकों पर हाल ही में होने वाले हमलों ने हिंदू और सिख समुदाय के लोगों में दहशत पैदा कर दी है, जिसका नतीजा है कि घाटी में एकबार फिर पलायन की बातें होना शुरू हो गई हैं। हालांकि जम्मू कश्मीर प्रशासन लोगों को लगातार ये आश्वासन दे रहा है कि पलायन की नौबत नहीं आएगी। जम्मू कश्मीर सरकार ने प्रवासी कर्मचारियों से कहा है कि घाटी को नहीं छोड़ें। प्रशासन ने ये वॉर्निंग दी है कि अगर ड्यूटी से उनकी अनुपस्थिति होती है तो नियमों के मुताबिक उनपर कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने कर्मचारियों को घाटी नहीं छोड़ने का निर्देश दिया है।

'पलायन की सोच रहे लोगों की सेफ्टी सुनिश्चित हो'
मंडलायुक्त अध्यक्ष ने सभी डिप्टी कमिश्नर और एसएसपी को ये निर्देश दिए हैं कि 2-3 दिनों के भीतर सभी राजनीतिक दलों, प्रतिनिधियों और नेताओं के साथ वन-टू-वन मीटिंग की जाए और उनकी वास्तविक स्थिति पर विचार किया जाएगा। साथ ही घाटी से पलायन की सोच रहे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। ये फैसला 9 अक्टूबर को कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर पांडुरंग के पोल की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में लिया गया। मीटिंग में ये तय हुआ कि किसी भी प्रवासी कर्मचारी को जिला या फिर घाटी छोड़ने की आवश्यकता नहीं है, जो कोई भी अपनी ड्यूटी पर अनुपस्थित पाया गया, उससे सेवा नियमों के अनुसार निपटा जाएगा।
कश्मीरी पंडितों और सिखों की कॉलोनियों में हो रही है पेट्रोलिंग
9 अक्टूबर को हुई इस मीटिंग में सभी डिप्टी कमिश्नर और एसएसपी ने पांडुरंग के पोल को बताया कि घाटी में प्रवासी कर्मचारियों, सिखों, कश्मीरी पंडितों और मजदूरों की सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं। साथ ही इन लोगों की कॉलोनियों में सुरक्षाबल लगातार पेट्रोलिंग कर रहे हैं। उन्हें उनकी सुरक्षा और सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा सुरक्षा और विश्वास बहाली के उपायों, सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी जा रही है। सरकार का कहना है कि संबंधित तहसीलदार, एसएचओ और सुरक्षा बल भी उन इलाकों का दौरा कर रहे हैं जहां प्रवासी पंडित और सिख रह रहे हैं।












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