J&K: जम्मू में पीरखो-महामाया रोपवे का LG मनोज सिन्हा ने किया उद्घाटन, जानिए इस गुफा का धार्मिक महत्त्व
जम्मू, 16 जुलाई: जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद यहां धार्मिक पर्यटन को और बढ़ावा मिलने की उम्मीद जगी है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार को जम्मू रोपवे के पीरखो-महामाया सेक्शन का उद्घाटन किया है। करीब 76 करोड़ रुपये की यह परियोजना खासकर जम्मू शहर में धार्मिक पर्यटन को बहुत ज्यादा बढ़ावा देने का माद्दा रखता है। इस रोपवे से जम्मू के तीन प्रमुख मंदिरों को जोड़ा गया है, साथ ही पर्यटकों के सफर को यादगार बनाने की कोशिश की गई है। इस मौके पर एलजी ने अधिकारियों से पर्यटकों की सुरक्षा और शहर की इकोलॉजी पर खास ध्यान देने का निर्देश दिया है।

जम्मू में पीरखो-महामाया रोपवे का उद्घाटन
शुक्रवार को एलजी मनोज सिन्हा ने जम्मू के पीरखो से महामाया तक के 1.18 किलोमीटर लंबी रोववे की शुरुआत की है। इस मौके पर उन्होंने कहा है कि जब जम्मू रोपवे का संचालन पूरी तरह से शुरू हो जाएगा तो जम्मू-कश्मीर के टूरिज्म सेक्टर को तो बढ़ावा मिलेगा ही, यहां के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। इससे स्थानीय लोगों को सीधे और परोक्ष तौर पर आजीविका का अवसर भी उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा है, 'जम्मू रोपवे इस क्षेत्र में पर्यटन का एक प्रमुख आकर्षण केंद्र बनेगा। इससे जम्मू-कश्मीर के पर्यटन क्षेत्र का उत्साह तो बढ़ागा ही, जम्मू शहर की सुंदरता में भी बढ़ोतरी होगी।' रोपवे के इस सेक्शन को आम लोगों के लिए खोलने के साथ ही जम्मू शहर में धार्मिक टूरिज्म सर्किट के तहत तीन महत्वपूर्ण मंदिर पीरखो, महामाया और बहु मंदिर आपस में जुड़ जाएंगे। सिन्हा ने कहा है कि 'पर्यटकों के लिए यह पूरे जीवन का अनुभव होगा।' इस रोपवे के जरिए लोग तवी नदी को पार करेंगे।

रोपवे प्रोजेक्ट के साथ कई तरह की सुविधाएं मिलेंगी
जम्मू रोपवे प्रोजेक्ट के तहत पर्यटकों को कई और तरह की सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिसमें रेस्टोरेंट, वॉकवेज, लॉन, पब्लिक यूनिलिटीज, पार्किंग और बाकी मनोरंजन की सुविधाएं। बाकी बचे सारे काम जल्द पूरा करने को भी कहा गया है। जम्मू रोपवे प्रोजेक्ट हाइब्रिड सिस्टम के तहत तैयार किया गया है। इस प्रोजेक्ट में दो सेक्शन हैं- पहला: पीरखो (मुबारक मंडडी से नीचे) से महामाया, जिसकी दूरी 1.184 किलोमीटर है। जबकि दूसरा सेक्शन महामाया मंदिर से लेकर बहु तक ही जिसकी दूरी 0.485 किलोमीटर है। इस प्रोजेक्ट की कीमत 75.83 करोड़ रुपये है। इस मौके पर उपराज्यपाल ने अधिकारियों से सुरक्षा के उच्च मानकों के पालन करने के निर्देश दिए हैं, साथ ही इलाके की इकोलॉजी को ध्यान में रखकर यात्रियों के लिए सफर को यादगार बनाने के लिए कहा है।

पीरखो का धार्मिक महत्त्व क्या है ?
बता दें कि तीनों पवित्र मंदिरों का खास धार्मिक महत्त्व है, जिसमें पीरखो गुफा के बारे में कहा जाता है कि उसका इतिहास जामवंत से जुड़ा है। यह गुफा तवी नदी के नजदीक है। ऋषि-मुनियों और पीर-फकीरों के इस गुफा में तपस्या करने करने की वजह से यह पीरखो के नाम से चर्चित हो गया है। क्योंकि, डोगरी समेत कई भारतीय भाषाओं में गुफा को खोह भी कहते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी गुफा में जामवंत और भगवान श्रीकृष्ण के बीच युद्ध हुआ था। मान्यता यह भी है कि जामवंत को त्रेता युग में स्वयं भगवान राम से यह आशीर्वाद मिला था, क्योंकि राम-रावण युद्ध में जामवंत को युद्ध में लड़ने का अवसर ही नहीं मिल पाया था। लोग यह भी मानते हैं कि यह गुफा देश के कई धार्मिक गुफाओं और मंदिरों से जुड़ा हुआ है।












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