Jammu Kashmir Crown Jewel से घटकर केंद्र शासित प्रदेश बना, जल्द चुनाव कराने की जरूरत: कर्ण सिंह

वेटरन कांग्रेसी डॉ कर्ण सिंह ने जम्मू कश्मीर में चुनाव कराने की डिमांड कर रहे हैं। उन्होंने कहा, चुनाव ही एकमात्र रास्ता है जिससे जम्मू कश्मीर की स्थिति सुधारी जा सकती है।

Jammu Kashmir Crown Jewel

Jammu Kashmir Crown Jewel: जम्मू कश्मीर ब्रिटिश शासन के दौर में भारत का सबसे बड़ा राज्य था। आजादी के पहले महाराजा हरि सिंह के अधीन रहे जम्मू कश्मीर को अब केंद्र शासित प्रदेश के रूप में जाना जाता है। महाराजा के बेटे और वेटरन कांग्रेस नेता कर्ण सिंह ने कहा, कभी भारत का क्राउन ज्वेल रहा जम्मू कश्मीर का क्षेत्रफळ कम हो गया है। प्रदेश में विधानसभा चुनाव जल्द से जल्द होने चाहिए।

कर्ण सिंह ने कहा,"हम चाहते हैं कि यह (जम्मू-कश्मीर) जल्द ही एक बार फिर पूर्ण राज्य बने। ब्रिटिश शासन के समय क्षेत्रफल की दृष्टि से जम्मू-कश्मीर भारत का सबसे बड़ा राज्य था। इसे 'क्राउन ज्वेल' कहा जाता था और आज स्थिति ऐसी है कि जम्मू कश्मीर केवल केंद्र शासित प्रदेश के रूप में जाना जाता है। इसे पूर्ण राज्य बनना चाहिए।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और महाराजा हरि सिंह के पुत्र कर्ण सिंह ने कहा, मुझे लगता है कि अभी चुनाव होने चाहिए। अब 3 साल हो चुके हैं। जनप्रतिनिधि तभी सामने आएंगे जब चुनाव होंगे, तभी इस प्रदेश की स्थिति सुधरेगी।

बता दें कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कर्ण सिंह के अलावा भी जम्मू कश्मीर में सत्तारूढ़ रहीं पार्टियां- पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (PDP) औऱ नेशनल कॉन्फ्रेंस भी प्रदेश में चुनाव न कराने पर आक्रामक हैं। इन पार्टियों ने भाजपा पर अपने फायदे के लिए परिसीमन के आऱोप लगाए हैं। हालांकि, पीएम मोदी और अमित शाह प्रदेश में जल्द चुनाव के आश्वासन दे चुके हैं।

दरअसल, पांच अगस्त, 2019 के बाद से जम्मू-कश्मीर का क्षेत्रफल काफी कम हो गया है। प्रदेश को दो हिस्सों में बांटा गया। लद्दाख को बिना विधानसभा के केंद्र शासित प्रदेश, जबकि जम्मू कश्मीर को विधानसभा के साथ केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। ऐसे में गत तीन साल से अधिक समय से विधानसभा चुनाव कराए जाने पर अटकलें लगाई जा रही हैं।

बता दें कि केंद्र सरकार ने संसद में पारित जम्मू कश्मीर पुनर्गठन कानून के माध्यम से प्रदेश की प्रशासनिक स्थिति बदली है। अनुच्छेद 370 के प्रावधान निरस्त होने के बाद जम्मू कश्मीर को मिलने वाले विशेषाधिकार खत्म हो गए। परिसीमन के बाद अब चुनाव आयोग पर सबकी नजरें टिकी हैं, लेकिन 40 महीनों से अधिक समय बीतने के बाद भी विधानसभा चुनाव का ऐलान नहीं किया गया है।

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