Jammu Kashmir Chunav: जम्मू की 6 ST सीटों पर कैसा है समीकरण? पहाड़ी-गुज्जर समुदायों का क्या है रुख?
Jammu Kashmir Chunav: जम्मू और कश्मीर विधानसभा चुनाव में इस बाद दो बड़े बदलाव हुए हैं। पहला तो 2022 में परिसीमन के बाद अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए 90 में से 9 सीटें सुरक्षित रखी गई हैं। इनमें से 6 सीटें जम्मू डिविजन में हैं और 3 सीटें कश्मीर में हैं। एक और बड़ा बदलाव ये हुआ है कि चार नए समुदायों को केंद्र शासित प्रदेश में केंद्र की मोदी सरकार ने अनुसूचित जातियों की लिस्ट में शामिल किया है, जिनमें पहाड़ी सबसे बड़ा समुदाय है।
इस केंद्र शासित प्रदेश में गुज्जर-बकरवाल सबसे बड़ा जनजाति समुदाय रहा है, जो कि मुसलमान हैं। हालांकि, यह आम कश्मीरी मुस्लिमों से जातीय रूप में काफी अलग हैं। वहीं पहाड़ी समुदाय में हिंदू, मुसलमान और सिख भी शामिल हैं। लेकिन, इनमें सबसे बड़ी आबादी हिंदू-पहाड़ियों की है। मोदी सरकार ने पहाड़ियों के अलावा पड्डारी, गड्डा ब्राह्मण और कोली समुदाय को भी अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया है।

गुज्जर-बकरवाल संगठनों ने एसटी लिस्ट के विस्तार का विरोध किया है
जम्मू की जो 6 सीटें अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए सुरक्षित रखी गई हैं, वे हैं- राजौरी, बुधल, थन्नामंडी, सुरनकोट, मेंढर और गुलाबगढ़। भाजपा के लिए परेशानी ये है कि कई गुज्जर-बकरवाल संगठन अनुसूचित जनजाति की लिस्ट में विस्तार का खुलकर विरोध कर रहे हैं।
2014 के विधानसभा चुनावों में पीर-पंजाल रेंज की इन सीटों में से 2-2 पर पीडीपी और कांग्रेस और एक पर नेशनल कांफ्रेंस जीती थी। जबकि, थन्नामंडी नई विधानसभा है, जो परिसीमन के बाद गठित हुई है। लोकसभा चुनावों में अनंतनाग-राजौरी सीट पर गुज्जर चेहरे और एनसी नेता मियां अल्ताफ अहमद को जीत मिली थी।
राजौरी
राजौरी सीट से इस बार बीजेपी ने पहाड़ी हिंदू विबोध कुमार गुप्ता को मौका दिया है, वहीं कांग्रेस ने गठबंधन (नेशनल कांफ्रेंस के साथ) से प्रदेश महासचिव इफ्तकार अहमद को उतारा है, जो कि पहाड़ी मुसलमान हैं। पीडीपी ने तस्दिक हुसैन को टिकट दिया है, जो कि गुज्जर समुदाय से हैं। कांग्रेस इस सीट पर धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण के फिराक में है और इसकी वजह से भाजपा प्रत्याशी की चुनौती बढ़ गई हैं।
सुरनकोट
पुंछ जिले की सुरनकोट से बीजेपी ने फिर एक पहाड़ी नेता मुस्ताक अहमद शाह बुखारी को टिकट दिया है, जो इस समुदाय को आरक्षण दिलाने के आंदोलन के अगुवा रहे हैं। दो बार के विधायक और नेशनल कांफ्रेंस नेता 2014 में दूसरे स्थान पर रहे थे। पहाड़ियों को एसटी का दर्जा दिए जाने के मुद्दे पर ही उन्होंने फारूक अब्दुल्ला का साथ लोकसभा चुनावों के दौरान छोड़ा था और बीजेपी में शामिल हो गए थे।
कांग्रेस ने यहां गुज्जर नेता मोहम्मद शाहनवाज को उतारा है। इस सीट से 2014 में एक और गुज्जर नेता चौधरी मोहम्मद अकरम जीते थे, जो कांग्रेस के बागी बनकर मैदान में हैं। पीडीपी ने भी गुज्जर को ही मौका दिया है। बीजेपी को भरोसा है कि गुज्जर बनाम पहाड़ी से उसके उम्मीदवार के चांस बन सकते हैं।
थन्नामंडी
राजौरी जिले की ही थन्नामंडी सीट पर एक गुज्जर और तीन पहाड़ी प्रत्याशियों में मुकाबला है। पीडीपी ने 2014 में यहां से जीतने वाले गुज्जर नेता कमर हुसैन को फिर मौका दिया है। इनके अलावा कांग्रेस के मोहम्मद शबीर खान, बीजेपी के मोहम्मद इकबाल मलिक के अलावा एक और निर्दलीय प्रत्याशी भी पहाड़ी समुदाय से हैं। अकेले गुज्जर उम्मीदवार होने की वजह से पीडीपी की संभावना बेहतर बताई जा रही है।
मेंढर
मेंढर में नेशनल कांफ्रेंस ने 2014 के एमएलए जावेद अहमद राना को टिकट दिया है, जो कि गुज्जर हैं। वहीं बीजेपी ने पहाड़ी नेता मुर्तजा अहमद खान को उतारा है। पीडीपी उम्मीदवार नदीम अहमद खान भी पहाड़ी हैं। इनके अलावा डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट काउंसिल के सदस्य और गुज्जर नेता इंजीनियर इस्ताक चौधरी भी मैदान में हैं।
बुधल
बुधल सीट पर तीनों ही प्रमुख दलों के प्रत्याशी गुज्जर हैं। बीजेपी ने चौधरी जुल्फिकार अली को टिकट दिया है, जो कि पूर्व मंत्री और दो बार के विधायक हैं, वहीं नेशनल कांफ्रेंस ने जावेद इकबाल चौधरी और पीडीपी ने गुफ्तार अहमद चौधरी पर दांव लगाया है। जावेद, जुल्फिकार अली का भतीजा है जो कि बड़े गुज्जर नेता हैं।
गुलाबगढ़
रियासी जिले की गुलाबगढ़ सीट पर चार-चार प्रमुख प्रत्याशी गुज्जर समुदाय के हैं। लेकिन, मुख्य मुकाबला नेशनल कांफ्रेंस के इंजीनियर खुर्शीद अहमद और पूर्व मंत्री एजाज खान के बीच बताया जा रहा है। मैदान में बीजेपी के मोहम्मद अकरम खान और पीडीपी के मोहम्मद फारूक भी हैं। इस सीट पर पहाड़ी आबादी सीमित है, इसलिए गुज्जर प्रत्याशियों में ही हार या जीत का मुकाबला होने की संभावना है।
जम्मू कश्मीर में पहले चरण का चुनाव 18 सितंबर, दूसरे का 25 सितंबर और तीसरे का 1 अक्टूबर को होना है। वोटों की गिनती 8 अक्टूबर को होगी।












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