Jammu Kashmir Chunav Result: अंतिम नतीजों से पहले श्रीनगर में क्यों मचा था सियासी हाहाकार?

Jammu Kashmir Result in Hindi: केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर विधानसभा के लिए हुए पहले चुनाव के सारे परिणाम आ चुके हैं। अंतिम नतीजों के बाद नेशनल कांफ्रेंस की अगुवाई वाली गठबंधन की सरकार बन रही है। लेकिन, इससे पहले श्रीनगर में राजनीतिक हाहाकार मचा हुआ था। जम्मू कश्मीर में 90 सीटों के लिए तीन चरणों में चुनाव हुए हैं, जिसके नतीजे मंगलवार को आए हैं।

जम्मू कश्मीर में मुख्य रूप से तीन पार्टियां और गठबंधन चुनाव मैदान में थे। बीजेपी, नेशनल कांफ्रेंस-कांग्रेस और पीडीपी। इनके अलावा निर्दलीय सांसद इंजीनियर राशिद की अवामी इत्तेहाद पार्टी, अल्ताफ बुखारी की अपनी पार्टी और सज्जाद लोन की पीपुल्स कांफ्रेंस भी चुनाव लड़ रही थीं।

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इनके अलावा निर्दलिय उम्मीदवारों पर भी नजर बनी हुई थी, जो बड़ी तादाद में चुनावी मैदान में थे। कम से कम 10 निर्दलीय प्रतिबंधित जमात ए इस्लामी के समर्थन से चुनाव मैदान में थी।

5 संभावित मनोनीत एमएलए को लेकिर बवाल
काउंटिंग से पहले ही वहां अफवाहों का दौर शुरू हो गया था। सबसे बड़ा विवाद उपराज्यपाल की ओर से मनोनीत होने वाले 5 संभावित विधायकों को लेकर चल रहा था। इनके अलावा अपनी पार्टी, अवामी इत्तेहाद पार्टी और कुछ निर्दलियों की होने वाली भूमिका को लेकर भी कयासों का दौर जारी रहा।

विपक्ष को सबसे ज्यादा डर पांच मनोनीत सदस्यों को लेकर लग रहा था। चर्चा यह थी कि अगर अगली सरकार के गठन से पहले उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 5 विधायकों को मनोनीत किया तो उनके फैसले को अदालत में चुनौती दी जा सकती है। लेकिन, वोटरों ने ऐसे नतीजे दिए हैं, जिससे इस तरह की आशंकाओं पर फिलहाल विराम लग गया है।

नतीजों से पहले की हेराफेरी-कांग्रेस
जम्मू और कश्मीर कांग्रेस के अध्यक्ष तारिक हामिद कर्रा ने मनोनीत विधायकों को 'नतीजों से पहले की हेराफेरी' तक कह दिया था। उनका यहां तक कहना था कि राष्ट्रपति भी सदस्यों को नॉमिनेट करने में 'मनमानी' नहीं कर सकते।

1987 से भी कोई सबक नहीं सीखा-पीडीपी
वहीं पीडीपी नेता और महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने इसके बारे में कहा कि, '1987 में चोरी के चुनावों ने जम्मू और कश्मीर को कगार तक पहुंचा दिया है। फिर भी कोई सबक नहीं सीखा है।'

हमारे सदस्यों को मनोनीत किया जाएगा- बीजेपी प्रत्याशी सोफी यूसुफ
वहीं बिजबेहरा से इल्तिजा के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले बीजेपी नेता सोफी यूसुफ ने यह कहकर विवाद को और हवा दे दी थी कि 'केंद्र में हमारी सरकार है और निश्चित रूप से हमारे सदस्यों को मनोनीत किया जाएगा।'

अपने लोकतंत्र को अगवा नहीं करने देंगे- केसी वेणुगोपाल
वहीं कांग्रेस के महासचिव (संगठन) और राहुल गांधी के दाहिने हाथ केसी वेणुगोपाल ने तक यहां तक चेतावनी दे डाली कि 'लोगों के जनादेश को स्पष्ट खतरा है'। उन्होंने आगे कहा, 'हम उनके सभी गंदे हथकंडों के प्रति सतर्क हैं और उन्हें अपने लोकतंत्र को अगवा नहीं करने देंगे। केंद्र की शक्तियों का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।'

विपक्ष का कहना था कि नजीतों से पहले यह मालूम ही नहीं है कि जादुई आंकड़ा 46 होगा या फिर 48. उनका आरोप था कि 'गोलपोस्ट शिफ्ट' किया जा रहा है।

संसद से जब संशोधन पास हो रहा था तो कांग्रेस सो रही थी?
वहीं जम्मू और कश्मीर के बीजेपी अध्यक्ष रविंद्र रैना ने विपक्ष के 5 एमएलए के मनोनय पर हाय-तोबा पर तगड़ा चोट किया। उन्होंने कहा कि जब संसद में इस संशोधन पर बहस चल रही थी तो क्या कांग्रेस सो रही थी।

उन्होंने कहा, 'उपराज्यपाल की ओर से 5 विधायकों का मनोनय संवैधानिक व्यवस्था है। संसद में 2023 में जम्मू-कश्मीर संशोधन विधेयक पेश हुआ था, जिसपर दोनों सदनों में चर्चा के बाद इसे पारित किया गया था। तब क्या कांग्रेस सो रही थी? विधेयक पेश होने के वक्त फारूक अब्दुल्ला और राहुल गांधी भी थे....फिर उन्होंने इसपर आपत्ति क्यों नहीं जताई?'

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