घाटी में कश्मीरी पंडितों के ट्रांजिट कैंप किए गए सील, पलायन की दी थी धमकी
श्रीनगर, 01 जून: कश्मीर घाटी में पिछले कई दिनों से एक के बाद एक टारगेट किलिंग के चलते कश्मीरी पंडितों में खासा गुस्सा देखा जा रहा है। कश्मीरी पंडितों ने एक साथ घाटी से सामूहिक पलायन की धमकी दी है। जिसके बाद जम्मू कश्मीर प्रशासन ने उन्हें उनके ट्रंजिट कैंप तक सीमित कर दिया है। लगातार हो रही हत्याओं से नाराज कश्मीरी पंडितों ने एक साथ बड़े पैमाने पर घाटी छोड़ने की धमकी दी थी।

प्रधानमंत्री के विशेष पैकेज के तहत नियोजित लगभग 4,000 कश्मीरी पंडितों ने कल धमकी दी थी कि अगर प्रशासन ने उन्हें 24 घंटे के भीतर सुरक्षित स्थानों पर नहीं पहुंचाया तो वे घाटी छोड़ देंगे। दरअसल कुलगाम में मंगलवार को आतंकवादियों ने कश्मीरी पंडित महिला टीचर रजनी बाला की गोली मारकर हत्या कर दी। आतंकियों ने स्कूल में घुसकर पहले टीचर से उनका नाम पूछा और फिर एके-47 से सिर में गोली मार दी। बड़गाम के बाद कुलगाम में हुई हत्या के बाद कश्मीरी पंडितों का गुस्सा भड़क गया।
जिसके बाद से कश्मीरी पंडितों ने घाटी छोड़ने की धमकी दी है। कश्मीरी पंडित महिला टीचर मूल रूप से जम्मू रीजन में सांबा की थीं और कुलगाम के गोपालपुर के सरकारी स्कूल में टीचर थीं। फिलहाल वह कुपवाड़ा के चवलगाम में पति और बेटी के साथ किराये के घर में रह रही थीं। साल 1990 में हुए पलायन में रजनी का परिवार भी घाटी छोड़ चुका था, लेकिन पीएम इम्लॉयमेंट पैकेज के तहत रजनी को फिर से कश्मीर बुलाकर नौकरी दी गई थी।
आज कई जगहों पर प्रवासी पंडित ट्रांजिट कैंप को सील कर दिया गया। श्रीनगर के इंद्रा नगर पड़ोस में, जहां कश्मीरी पंडित समुदाय के कई कर्मचारी रहते हैं, पुलिस ने एट्री प्वाइंट को अवरुद्ध कर दिया और किसी भी कश्मीरी पंडित को बाहर आने की अनुमति नहीं दी गई। सबसे पड़े ट्रांजिट शिविरों में से एक, वेसु पंडित कॉलोनी में, सैकड़ों कश्मीरी पंडितों ने विरोध प्रदर्शन किया और घाटी से न्याय और पुनर्वास की मांग करते हुए नारे लगाए।
किसी भी पंडित को बाहर नहीं आने दिया जाए, यह सुनिश्चित करने के लिए कई शिविरों के मुख्य द्वारों को बंद कर दिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने कल कहा था कि समुदाय अपनी सुरक्षा के लिए सरकार से अपील करते-करते थक गया है। हमें स्थानांतरित किया जाना चाहिए ताकि हमें बचाया जा सके। हमारा प्रतिनिधिमंडल उपराज्यपाल (मनोज सिन्हा) से मिला था और हमने उनसे हमें बचाने के लिए कहा था। हम घाटी में स्थिति वापस आने तक दो से तीन साल के लिए अस्थायी स्थानांतरण की मांग कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि सरकार बसें मुहैया कराए ताकि वे जम्मू की ओर पलायन कर सकें।












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