भारतीय इंजीनियरिंग का करिश्मा है 'अंजी ब्रिज'! देश में मिलने जा रहा है पहला केबल रेल पुल
भारतीय रेलवे की उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेलवे परियोजना के तहत रियासी और कटड़ा के बीच रेल पुल बन रहा है। ये इंजीनियरिंग का अद्भुद नमूना है।

भारत सरकार कश्मीर घाटी के लिए यातायात को सुगम बनाने की हर संभव कोशिश कर रही है। घाटी को हर मौसम में देश से जोड़ने के लिए रेल लाइन परियोजना पर तेजी से काम हो रही है। जम्मू को कश्मीर से जोड़ने वाली रेल लाइन का एक पुल चिनाब ब्रिज बनकर तैयार है। वहीं चिनाब ब्रिज से 7 किमी की दूसरी पर दूसरा रेल पुल बन रहा है। यह ब्रिज भी चिनाब ब्रिज की तरह इंजीनियरिंग का बेहतरीन करिश्मा है। अंजी नदीं पर बन रहे इस पुल को केबल के सहारे तैयार किया गया है।
पुल को 96 केबलों का सपोर्ट मिला हुआ है
भारतीय रेलवे की उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेलवे परियोजना के तहत जम्मू और कश्मीर के रियासी जिले में इंजीनियरिंग के इस मार्बल का निर्माण किया जा रहा है। अंजी खड ब्रिज जम्मू से करीब 80 किमी दूर स्थित है। 725 मीटर लंबा ये पुल किसी इंजीनियरिंग चमत्कार से कम नहीं है। इस पुल की लंबाई 473.25 मीटर है, जो नदी तल से 331 मीटर की ऊंचाई पर बना है। पुल को बनाते वक्त इस बात का ध्यान में रखा गया है कि यह तेज हवाओ से निपट सके। इस पुल को 96 केबलों का सपोर्ट मिला हुआ है।

2016 में बदली गई थी पुल की डिजाइन
जिस जगह पर ये पुल बनाया गया है, उस स्थान का भू-विज्ञान काफी जटिल है। इस पुल के पहले चिनाब ब्रिज की तरह आर्च पर ही बनाया जाना था। लेकिन जटिल संरचना के कारण ये जगह आर्च ब्रिज के लिए उपयुक्त नहीं थी। 2016 में भारतीय रेलवे ने भौगोलिक दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए इस पुल को केबल-स्टे ब्रिज में बनाने का फैसला किया। इस पुल के दोनों सिरों पर सुरंगें हैं। कटरा छोर पर एक सुरंग 5 किमी लंबी है। जबकि कश्मीर के छोर पर सुरंग की लंबाई 3 किमी है।

पुल के निर्माण के लिए स्पेन से मंगवाई गई क्रेन
अंजी खड ब्रिज 213 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है। पुल के 47 में से 41 सेगमेंट पूरे कर चुके हैं। केबल स्टे ब्रिज का सेंट्रल स्पैन 290 मीटर है। अंजी पुल का केबल वाला हिस्सा 472.25 मीटर है, जबकि पुल की कुल लंबाई 725.5 मीटर है। चार भागों में बंटे इस पुल की नींव से 193 मीटर लंबे पुल का डेक स्तर 51 मीटर है। इस पुल् के निर्माण में लगी स्पेशल क्रेन को स्पेन से मंगवाया गया है। ये क्रेन 40 टन तक का वजन उठाने में सक्षम है।

पुल की देखरेख के लिए बड़ी संख्या में लगाए गए हैं सेंसर
रेलवे के इंजीनियरियों के मुताबिक, अंजी खड ब्रिज की कोडल लाइफ 120 साल है। पुल की देखरेख के लिए इंटीग्रेटिड मॉनिटरिंग सिस्टम लगा हुआ है। पुल के संरचनात्मक स्वास्थ्य की निगरानी के लिए बड़ी संख्या में सेंसर लगाए जाएंगे। मई तक ये पुल बन कर तैयार हो जाएगा। पुल की मजबूत की जांच के लिए कई तरह के टेस्ट किए जा चुके हैं। इसे बनाने में लगभग 28000 करोड़ रुपये की लागत आई है। देश के सबसे लंबा केबल-स्टे ब्रिज पर ट्रेनें 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगी।
अंजी खड्ड पुल एक केंद्रीय तोरण की धुरी पर संतुलित एक विषम केबल-स्थिर पुल है। ब्रिज को तेज हवाओं के भारी तूफानों को संभालने के लिए डिजाइन किया गया है। इस बनाने के लिए डीओकेए जंप फॉर्म शटरिंग और पंप कंक्रीटिंग सिस्टम जैसी विभिन्न तकनीकों और उपकरणों का उपयोग किया गया है। इस प्रतिष्ठित पुल के विस्तृत डिजाइन और निर्माण पर्यवेक्षण (डीडीसी) का काम इटालियन कंपनी को सौंपा गया है।












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