गर्मी ने दिखाए अभी से तेवर, Jammu-Kashmir में अप्रैल से Heat Wave का अलर्ट

जम्मू और कश्मीर में अप्रैल का महीना काफी गर्म रहने वाला है। मौसम विभाग ने जम्मू और कश्मीर ने लिए अप्रैल में लू चलने का अलर्ट जारी किया है। आसमान साफ रहने से जम्मू, कश्मीर और लद्दाख के तापमान में वृद्धि हो रही है।

 heat wave Jammu and Kashmir

Jammu and Kashmir Weather: गर्मियों के शुरू होते ही देश के अलग-अलग इलाकों में इसका असर दिखने लगा है। इस बीच मौसम विभाग ने जम्मू और कश्मीर के लिए अप्रैल में लू (Heat Wave) चलने का अलर्ट जारी किया है। साथ ही बताया है कि, कुछ समय के लिए यहां भारी बारिश का कोई पूर्वानुमान नहीं है।

कश्मीर, जम्मू और लद्दाख के कुछ हिस्सों में लू चलने का पूर्वानुमान
मौसम विभाग के निदेशक सोनम लोटस (Sonam Lotus) ने ग्रेटर कश्मीर को लेकर बताया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अधिकतम तापमान पहले से ही ऊपर की ओर चल रहा है और सामान्य से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि, 'इस साल अब तक- बल्कि सर्दियों में भी शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ की भारी कमी रही है।' उन्होंने कहा कि आसमान साफ रहने से जम्मू, कश्मीर और लद्दाख में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में वृद्धि हो रही है। लोटस ने कहा कि अप्रैल में कश्मीर, जम्मू और लद्दाख के कुछ हिस्सों में लू चलने वाली है।

पूरे उत्तर भारत को प्रभावित करेगी गर्मी
उन्होंने कहा कि, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख ही नहीं बल्की गर्मी की लहर पूरे उत्तर भारत को प्रभावित करेगी। लोटस ने कहा कि, 'मार्च में भारी वर्षा का कोई पूर्वानुमान नहीं है। हालांकि, 13 और 14 मार्च को हल्की बारिश हो सकती है। लोटस ने कहा कि इस वर्ष सिंचाई भूमि के लिए पानी का संकट हो सकता है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में पिछले दो महीनों के दौरान कम वर्षा हुई थी। उन्होंने कहा कि, 'लेकिन यह कहना अभी जल्दबाजी होगी।

कब कितना रहा तापमान
मार्च 2022 में जम्मू शहर में औसत तापमान 23.3 डिग्री सेल्सियस और श्रीनगर में 13.7 डिग्री सेल्सियस था, जो काफी अधिक है। हालांकि, ये उच्च तापमान असामान्य नहीं हैं क्योंकि औसत तापमान 2004 और 2010 में जम्मू में 24 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था और श्रीनगर में औसत तापमान 2004 और 2010 में 13.6 और 13.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। 2020 में जम्मू-कश्मीर में 1258.7 मिमी की औसत वर्षा के मुकाबले 979.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई। 22 फीसदी की कमी रही। 2021 में कमी 29 प्रतिशत तक पहुंच गई जब केंद्र शासित प्रदेश में लगभग 894.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई। 2010 के बाद यह सबसे कम बारिश थी।

जम्मू-कश्मीर में 38 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई
जनवरी से मई तक के महीने ऐसे होते हैं जिनमें ऊंचे इलाकों में भारी बर्फबारी दर्ज की जाती है जो ग्लेशियरों के निर्माण के लिए आवश्यक है। 2022 के पहले पांच महीनों में, जम्मू-कश्मीर में 38 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई। जम्मू-कश्मीर में 1 जनवरी से 31 मई के बीच केवल 345.4 मिमी वर्षा हुई। इसकी तुलना में इसी अवधि में 2020 में 34 प्रतिशत और 2021 में 11.5 प्रतिशत की कमी देखी गई।

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जून और सितंबर 2020 के बीच जम्मू-कश्मीर में 34 प्रतिशत और 2021 में 29 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। वास्तव में मार्च से मई 2022 तक जम्मू-कश्मीर में केवल 99.5 मिमी वर्षा हुई, जो 2005 के बाद से सबसे कम वसंत वर्षा है।

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