Doda Cloudburst: जम्मू-कश्मीर में तबाही! 4 की जान गई-नेशनल हाईवे बंद, 21 दिनों में 6 जगह 80 मौतें
Cloudburst Timeline: जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में 26 अगस्त 2025 को बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचाई। इस प्राकृतिक आपदा में चार लोगों की मौत हो गई, 10 से ज्यादा घर ध्वस्त हो गए, और जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे सहित कई प्रमुख सड़कें बंद हो गईं।
किश्तवाड़ और कठुआ में हाल की आपदाओं के बाद यह तीसरा बड़ा बादल फटने का मामला है, जिसने जम्मू क्षेत्र को हिलाकर रख दिया। मौसम विभाग ने 27 अगस्त तक भारी बारिश, बादल फटने, और भूस्खलन की चेतावनी जारी की है।

Doda Cloudburst News: डोडा में बादल फटने से तबाही
26 अगस्त की सुबह डोडा के कहारा गांव और भद्रवाह के पास गुप्त गंगा मंदिर क्षेत्र में बादल फटने से अचानक बाढ़ और भूस्खलन शुरू हो गया। डोडा के डिप्टी कमिश्नर हरविंदर सिंह ने बताया, 'गंधोह में दो लोगों की घर ढहने से और थाथरी में एक व्यक्ति की बाढ़ में बहने से मौत हुई। चौथा शव कहारा गांव से बरामद हुआ। 15 घर, कई गोशालाएं, और एक निजी स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह नष्ट हो गए। तीन पैदल पुल भी बह गए।'
चिनाब नदी का जलस्तर 899.3 मीटर तक पहुंच गया, जो 900 फीट के उच्चतम बाढ़ स्तर से थोड़ा कम है। तवी नदी उधमपुर में 20 फीट के खतरे के निशान को पार कर गई, और कठुआ में रावी नदी ने 1 लाख क्यूसेक का आँकड़ा छू लिया।
जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद, यातायात ठप
भारी बारिश और भूस्खलन के कारण जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (NH-44) पर चंदेरकोट, केला मोड़, और बैटरी चेशमा में भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएं हुईं, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। उधमपुर और काजीगुंड में वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। किश्तवाड़ में पड्डर रोड का एक हिस्सा और डोडा में जंगलवार-थाथरी रोड भी भूस्खलन से बंद हो गए। बटोटे-किश्तवाड़ हाईवे (NH-244) पर बड़े-बड़े बोल्डर गिरने से स्थिति और बिगड़ गई।
Cloudburst Timeline: 21 दिनों में 6 बादल फटने की घटनाएं
पिछले 21 दिनों में जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में 6 बादल फटने की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।
- 5 अगस्त: धराली, उत्तराखंड - 5 मौतें, 100+ लापता
- 14 अगस्त: किश्तवाड़, जम्मू-कश्मीर - 65 मौतें, 200+ लापता
- 17 अगस्त: कठुआ, जम्मू-कश्मीर - 7 मौतें, 6+ लापता
- 22 अगस्त: थराली, उत्तराखंड - 1 मौत
- 26 अगस्त: डोडा, जम्मू-कश्मीर - 4 मौतें
किश्तवाड़ के माचैल माता मंदिर के पास 14 अगस्त को हुए बादल फटने से 65 लोगों की मौत हुई थी, और 200 से ज्यादा लोग लापता हैं।
मौसम विभाग की कड़ी चेतावनी
मौसम विभाग ने 27 अगस्त तक जम्मू संभाग के ऊंचे इलाकों में भारी बारिश, बादल फटने, और भूस्खलन की चेतावनी दी है। कठुआ में पिछले 24 घंटों में 155.6 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो इस सीजन में सबसे ज्यादा है। भद्रवाह में 99.8 मिमी, जम्मू में 81.5 मिमी, और कटरा में 68.8 मिमी बारिश हुई।
अधिकारियों ने लोगों से नदियों, नालों, और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। जम्मू संभाग में सभी स्कूल बंद कर दिए गए हैं, और माता वैष्णो देवी यात्रा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है।
राहत और बचाव कार्य
डोडा और किश्तवाड़ में NDRF, SDRF, सेना, और स्थानीय पुलिस ने युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू किए हैं। कई परिवारों को अस्थायी शिविरों में स्थानांतरित किया गया है। डोडा के डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को निकाला जा रहा है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, 'मैं डोडा प्रशासन के लगातार संपर्क में हूँ। स्थिति पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है।'
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने X पर लिखा, 'जम्मू क्षेत्र की स्थिति गंभीर है। मैं जल्द श्रीनगर से जम्मू पहुंचकर राहत कार्यों की निगरानी करूंगा। जिला प्रशासनों को आपातकालीन कार्यों के लिए अतिरिक्त फंड दिए गए हैं।'
जम्मू में रिकॉर्ड बारिश
जम्मू में 24 घंटों में 190.4 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो अगस्त में सदी की दूसरी सबसे बड़ी बारिश है। इससे पहले 5 अगस्त 1926 को 228.6 मिमी बारिश हुई थी। कश्मीर के ऊंचे इलाकों में भारी बारिश और मध्य कश्मीर में हल्की से मध्यम बारिश हुई, लेकिन झेलम नदी के लिए अभी बाढ़ की चेतावनी नहीं है।
क्या है चुनौती?
डोडा, किश्तवाड़, और कठुआ में बार-बार बादल फटने की घटनाएं जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित निर्माण की ओर इशारा करती हैं। सड़कें, पुल, और घरों की तबाही ने हजारों लोगों को बेघर कर दिया है। राहत कार्यों के बावजूद, कई गाँव अभी भी कटे हुए हैं, और बुनियादी सेवाओं को बहाल करने में हफ्तों लग सकते हैं। क्या सरकार इस आपदा से सबक लेगी और भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए कदम उठाएगी? यह सवाल अभी अनुत्तरित है।
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