IAF के पायलट मौत से पहले बचा गए 2500 लोगों की जान, आग लगते ही 2 KM दूर खेत में लग गए थे Mig-21
बाड़मेर, 29 जुलाई। राजस्थान में लड़ाकू विमान मिग-21 क्रैश हादसे में वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय वायुसेना के दो जाबांज पायलट 2500 लोगों की जान बचा गए। दोनों गुरुवार रात को मिग-21 में भारत-पाकिस्तान सीमा के नजदीक नियमित उड़ान पर थे। हवा में ही आन लगने से रात करीब नौ बजकर 10 मिनट पर फाइटर प्लेन मिग-21 बाड़मेर जिले के भीमड़ा गांव में क्रैश हो गया, जिसमें दोनों पायलट हिमाचल प्रदेश के मंडी निवासी विंग कमांडर मोहित राणा और जम्मू निवासी फ्लाइट लेफ्टिनेंट अदवितिया बाल भी शहीद हो गए।
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मिग-21 ने बाड़मेर स्थित उतरलाई एयरबेस से ट्रेनिंग के लिए उड़ान भरी थी
बता दें कि भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान मिग-21 ने बाड़मेर स्थित उतरलाई एयरबेस से ट्रेनिंग के लिए उड़ान भरी थी। थोड़ी देर बात ही विमान में किसी तकनीकी खामी या किसी अन्य कारण से हवा में ही आग लग गई थी। दोनों पायलट को इस बात का पता भी चल गया था। क्रैश होने से ठीक पहले IAF का यह विमान 2500 की आबादी के ऊपर था। वहां गिरता तो जान माल का काफी नुकसान हो सकता था।

खेत में करीब 10-15 फीट तक गहरा गड्डा हो गया
मिग-21 के दोनों पायलट ने सूझबूझ और तत्परता दिखाई। आग लगने का पता लगने के बाद भी पायलट अपनी जान की परवाह किए बगैर MIG-21 को भीमड़ा ग्राम पंचायत से 2 किलोमीटर दूर ईशरामों का तला गांव में रेत की टीलों पर ले गए। वहां विमान क्रैश हुआ तो टीलों घास व झाड़-झखाड़ में आग लग गई। खेत में करीब 10-15 फीट तक गहरा गड्डा हो गया। विमान का मलबा करीब तीन किलोमीटर तक के इलाके में बिखरा। स्थानीय ग्रामीणों को तेज धमाका भी सुनाई दिया।

दोनों पायलट शहीद हो चुके थे
मीडिया से बातचीत में आर्मी से रिटायर्ड संपतराज कहते हैं कि गुरुवार रात नौ बजे खाना खाने के बाद वे घर के बाहर खड़े थे। आसमान में एक प्लेन दिखाई दिया, जिसमें आग लगी हुई थी। एक बारगी तो लगा कि यह उन्हीं के घर आस-पास गिरेगा, मगर थोड़ी देर में तेज धमाका सुनाई दिया। पता चला कि ईशरामों का तला गांव के खेत में विमान क्रैश हो गया। हम कई ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे। हमने सोचा कि हादसे में कोई पायलट कहीं फंसा होगा तो बचा लेंगे, लेकिन मौके पर गए तो देखा कि दोनों पायलट शहीद हो चुके थे।

गांव भीमड़ा के ऊपर से दो-तीन बार घूमा
इसी तरह से जांगू की ढाणी में रहने वाले चंद्र प्रकाश कहते हैं कि गांव सोकला की ओर से आया प्लेन क्रैश होने से पहले गांव भीमड़ा के ऊपर से दो-तीन बार घूमा। उसमें आग लगी हुई थी। यह नजारा खौफनाक था। पूरा गांव भयभीत हो रहा था कि पता नहीं यह विमान कहां गिरेगा? फिर पता चला कि प्लेन रेत के टीलों की तरफ एक खेत में क्रैश हो गया। हम मौके पर गए, मगर क्रैश हुए विमान से इतनी भयंकर आग लगी हुई थी कि हम पायलट के पास नहीं जा पाए। आग कुछ कम होने पर हमने पायलट को ढूंढने की कोशिश की, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

IAF के दोनों पायलट के पर्स, घड़ी व मोबाइल मिले
ग्रामीणों ने मिग 21 क्रैश होने की सूचना तुरंत पुलिस और सेना के अधिकारियों को दी। फिर सेना ने आधे किलोमीटर के एरिया को अपने कब्जे में लिया और जांच पड़ताल शुरू की। विमान क्रैश होने के बाद जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे थे तब उन्हें वहां पर IAF के दोनों पायलट के पर्स, घड़ी व मोबाइल मिले थे, जिन्हें ग्रामीणों ने प्रशासन के अधिकारियों को सौंप दिया।












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