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क्या राजस्थान की राजनीति में षड्यंत्र का शिकार हैं सचिन पायलट? पायलट को दिया अपनों ने दगा, जानिए पूरा मामला

जयपुर, 20 सितंबर। राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के लिए प्रदेश में सियासी डगर आसान नहीं है। पिछले दिनों सचिन पायलट को लेकर जिस तरह के विवाद राजस्थान में खड़े किए गए। उससे उनके समर्थकों को पायलट की राजनीतिक छवि बिगाड़ने के षड्यंत्र का अंदेशा हो रहा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की संभावनाओं के बाद प्रदेश में सचिन पायलट के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा तेज हो गई है। पिछले दिनों पुष्कर में घटित घटना इसी का नतीजा थी। कांग्रेस पार्टी में सचिन पायलट को दबाने के लिए भरसक प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि पायलट समर्थक लगातार उनको मुख्यमंत्री बनाने की मांग करते रहे हैं। लेकिन पायलट विरोधी खेमा पूरी प्रबलता से उन्हें रोकने के हर संभव प्रयास करता है। पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव नजदीक आने के साथ ही राजस्थान में मुख्यमंत्री पद पर सचिन पायलट की ताजपोशी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई है। वही सियासी गलियारों में पायलट के धैर्य और चुप्पी को लेकर भी चर्चाएं हैं।

sachin pilot

पुष्कर के घटना से पायलट का नाता

पुष्कर के घटना से पायलट का नाता

पिछले दिनों पुष्कर में गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी बैसला की अस्थि विसर्जन की सभा में मंत्री अशोक चांदना के पहुंचने पर गुर्जर समाज के युवकों द्वारा जूते चप्पल उछाले गए। इसके बाद चांदना ने पायलट के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इसके बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई। चांदना के खिलाफ पायलट समर्थकों में नाराजगी बढ़ गई। इसके बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जब चांदना से मुलाकात की तो चांदना ने उनके पैर छुए। गहलोत ने साफा बंधा कर उन्हें आशीर्वाद दिया। इसके अगले ही दिन अशोक चांदना ने पोलो ग्राउंड में प्रेस वार्ता कर पायलट के खिलाफ बयान दिया। पायलट विरोधी नेता किसी न किसी रूप में पुष्कर के पूरे घटनाक्रम को पायलट से जोड़ रहे हैं।

 पायलट को अपनों ने दिया धोखा

पायलट को अपनों ने दिया धोखा

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राजीव गांधी ग्रामीण ओलंपिक के समारोह में सवाई माधोपुर पहुंचे। वहां उन्होंने विधायक दानिश अबरार की जमकर तारीफ की। पायलट समर्थक इसे एक संदेश के तौर पर देख रहे हैं। सचिन पायलट ने जब अपनी सरकार से बगावत की थी। तब विधायक दानिश अबरार चेतन डूडी और रोहित बोहरा पायलट खेमे में थे। पायलट समर्थकों का आरोप है कि इन्हीं नेताओं ने पायलट को बगावत करने के लिए उकसाया था। इसके बाद जब पायलट ने बगावत कर दी तो यह तीनों विधायक गहलोत खेमे में लौट आए। इस वज से पायलट सरकार गिराने में नाकाम रहे। वही पायलट के कट्टर समर्थक माने जाने वाले मंत्री रमेश मीणा के सुर भी अब बदले-बदले नजर आने लगे हैं। सचिन पायलट को उनके अपने ही नेताओं ने धोखा दिया। इन्हीं नेताओं की अदावत ने राजस्थान में पायलट की पकड़ को कमजोर कर दिया।

 पायलट का धैर्य और चुप्पी बरकरार

पायलट का धैर्य और चुप्पी बरकरार

राजस्थान में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री नहीं बनाने के लिए तमाम तरह के षड्यंत्र किए जा रहे हैं। बावजूद उसके सचिन पायलट लंबी चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने अपने धैर्य को बरकरार कर रखा है। पिछले दिन और राहुल गांधी ने भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मौजूदगी में दिल्ली में उनके धैर्य की खुलकर तारीफ की थी। अब उनकी चुप्पी सियासी गलियारों में चर्चा का विषय है। पायलट ने अपने समर्थकों को भी खामोश रहने का संदेश दिया है। जिस तरीके से राजस्थान में पायलट के कितना खिलाफ षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। उससे साफ है कि पायलट विरोधी खेमा उन्हें घेरने के तमाम जतन कर रहा है। लेकिन पायलट चुप्पी बनाए सब कुछ सह रहे हैं। पायलट सही वक्त का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले वक्त में पार्टी और प्रदेश की जनता पायलट को कितना क्या देती है। यह आने वाला वक्त ही तय करेगा।

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