Rajasthan News: राजस्थान में क्या नवनिर्वाचित विधायकों की होगी बाड़ेबंदी ? राजनीतिक दलों का क्या है सियासी गणित
Rajasthan Election 2023: राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हो चुके हैं। अब चुनाव परिणाम 3 दिसंबर को आने हैं। राजस्थान में अब नई सरकार के गठन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इस बीच दोनों दलों के प्रमुख नेता प्रत्याशियों से संपर्क कर समीकरण जान रहे हैं। प्रदेश में इस बार बाड़ेबंदी जैसे कोई हालात नहीं दिख रहे हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे चुनाव परिणाम का आकलन करने में जुटे हैं। साल 2018 में अशोक गहलोत और वसुंधरा राजे ने नवननिर्वाचित विधायकों की बाड़ेबंदी के पुख्ता इंतजाम किया था। लेकिन इस बार बाड़ेबंदी के आसार बहुत कम लग रहे हैं। राजनीति के जानकार कहते हैं कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बाड़ेबंदी पर इसलिए ध्यान नहीं दे रहे। क्योंकि वे समझ रहे हैं कि भाजपा को कांग्रेस के मुकाबले ज्यादा सीट मिल रही है। जानकारों का दावा है कि भाजपा जरूर निर्दलीय और बागी प्रत्याशियों को एकत्र कर सकती है। उनका मानना है कि भाजपा अपने बागी निर्वाचित विधायकों को खुशी से वापस ले लेती है।
राजस्थान में भाजपा सरकार का आकलन
राजस्थान में भाजपा सरकार बनने की पूरी संभावना है। भाजपा के नेता बस इस आकलन में जुटे हैं कि चुनाव में उनका कितनी सीटें मिलती है। नेता इस बात का आकलन कर रहे हैं कि भाजपा को 110 से 115 सीट मिलती है या 120 से 125 सीट ला पाते हैं। प्रदेश में 110 से 115 सीट भाजपा को मिलती है तो पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सीएम पद के लिए प्रबल दावेदार होंगी। अगर इससे ज्यादा सीटें आई तो भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व मुख्यमंत्री पद का चेहरा तय करेगा। फिलहाल भाजपा के अकेले बहुमत पाने की संभावना ने सीएम गहलोत के खेमे को बाड़ेबंदी के रास्ते जाने को लेकर हतोत्साहित कर दिया है। भाजपा हाई कमान का झुकाव बागियों और निर्दलीय विधायकों की बाड़ेबंदी की और दिख रहा है। लेकिन इसके पीछे हम वजह प्रदेश में मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर चल रही तनातनी को माना जा रहा है।

भाजपा के सामने वसुंधरा राजे की दिक्कत
भाजपा के सामने सबसे बड़ी दिक्कत वसुंधरा राजे को लेकर है। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व नहीं चाहता कि किसी भी तरह से वसुंधरा राजे की मदद से प्रदेश में भाजपा की सरकार बने। पार्टी नहीं चाहती कि राजस्थान में वसुंधरा राजे पर निर्भर सरकार बने इसके लिए भाजपा हाई कमान बाड़ेबंदी को लेकर गंभीर रूप से विचार कर रहा है।
मोहनलाल सुखाडिया के दौर से शुरू हुआ बाड़ेबंदी का चलन
राजनीति के जानकार बताते हैं कि राजस्थान में बाड़ाबंदी के चलन का इतिहास सदा से ही रहा है। लेकिन इसका चलन मोहनलाल सुखाड़िया के दौर से शुरू हुआ। तब पार्टी हाई कमान का जयनारायण व्यास के खिलाफ उन्हें मूक समर्थन प्राप्त था। राजनीति के जानकारों की मानें तो प्रदेश में सरकारों को लेकर बाड़ेबंदी तो चलती रही है। बाड़ेबंदी की ताज बानगी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के 2018 के कार्यकाल में देखी गई जब उन्हीं की सरकार के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने बगावत की थी। सचिन पायलट ने बागी विधायकों के साथ सरकार गिराने के लिए मानेसर में डेरा डाल लिया था गहलोत के कार्यकाल में विधायकों की दो बार बाड़ेबंदी देखी गई।












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