Rajasthan News: हनुमान बेनीवाल की आरएलपी से किस पार्टी को मिलेगी संजीवनी, जानिए तीसरे मोर्चे की गणित

Rajasthan News: राजस्थान में 25 नवंबर को विधानसभा चुनाव होने हैं। प्रदेश में चुनाव प्रचार की सरगर्मियां तेज हो गई है। बीजेपी और कांग्रेस यहां हनुमान बेनीवाल की आरएलपी और चंद्रशेखर की पार्टी आजाद समाज पार्टी गठबंधन के साथ चुनाव मैदान में है। कई अहम सीटों पर इनके उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। हनुमान बेनीवाल प्रदेश में तीसरे मोर्चे के बड़े पैरोकार रहे हैं। यह गठबंधन प्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस के समीकरण बिगाड़ेगा। सियासी गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा है कि बेनीवाल और चंद्रशेखर का गठबंधन सबसे ज्यादा किस पार्टी के समीकरण बदलेगा। इस गठबंधन से किस पार्टी को फायदा होगा और किसे नुकसान। क्या राजस्थान में इस चुनाव में कोई तीसरा विकल्प होगा।

जातीय समीकरण होंगे प्रभावित

राजस्थान में अगर जाट और दलित मतदाता एक हो जाते हैं तो बीजेपी और कांग्रेस के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है। प्रदेश की 40 सीटों पर जाट समुदाय का सीधा असर रहता है। प्रदेश की कुल मतदाताओं का 10 फीसदी मतदाता जाट समुदाय से है। वही 18 प्रतिशत के लगभग दलित मतदाता हैं। राजस्थान की 200 में से 142 सीटें सामान्य वर्ग के लिए है। जबकि अन्य 58 सीटें आरक्षित हैं। हनुमान बेनीवाल और चंद्रशेखर जाट और दलित मतदाताओं को एक कर सियासत में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में अगर इनका गठबंधन सफल रहता है तो यह दोनों प्रमुख दलों के समीकरणों को प्रभावित कर सकेंगे।

hanuman beniwal

जाट और दलित प्रभावित क्षेत्र पर नजर

हनुमान बेनीवाल की सबसे ज्यादा नजर जाट मतदाताओं पर है। यही वजह है कि आरएलपी ने ज्यादातर प्रत्याशी जाट बाहुल्य इलाकों में उतरे हैं। इसमें बाड़मेर, नागौर, जोधपुर, बीकानेर, चूरू, भीलवाड़ा, अजमेर और उदयपुर की जाट बहुल सीटें शामिल है। हालांकि कांग्रेस और भाजपा ने भी इनमें से ज्यादातर सीटों पर जाट नेताओं को ही चुनाव मैदान में उतारा है। वही आजाद समाज पार्टी ने 30000 से ज्यादा एससी मतदाताओं वाली सीटों पर अपनी पार्टी के प्रत्याशी उतारे हैं। राजस्थान में अब तक कभी तीसरे मोर्चे का कोई प्रभाव नहीं रहा है। 40 साल से ज्यादा समय से कांग्रेस और भाजपा के बीच ही सीधा मुकाबला रहा है।

युवाओं में लोकप्रिय हैं बेनीवाल और चंद्रशेखर

राजस्थान में हनुमान बेनीवाल और चंद्रशेखर की सबसे ज्यादा लोकप्रियता युवाओं में देखी जा रही है। हनुमान बेनीवाल जाट समुदाय में युवाओं के लोकप्रिय नेता माने जाते हैं। वही चंद्रशेखर दलितों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। दोनों नेताओं को बेबाकी के साथ बात रखने के लिए जाना जाता है। हालांकि दोनों नेताओं का स्वभाव उग्र होने की वजह से प्रदेश में इनके गठबंधन को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। विपक्ष के नेता दावा करते हैं कि इनका गठबंधन बहुत अधिक समय तक चलने वाला नहीं है।

बेनीवाल को घर में घेरने की तैयारी में भाजपा

भाजपा हनुमान बेनीवाल को खींवसर सीट पर उन्हीं के घर में घेरने की तैयारी में है। नागौर की पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा को भाजपा में शामिल कर नागौर सीट से चुनाव मैदान में उतर गया है। सांसद रहने से ज्योति मिर्धा का नागौर में अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है। खींवसर में ज्योति मिर्धा लगातार बेनीवाल के सेनापतियों को भाजपा में शामिल कर रही है। विपक्ष के नेताओं द्वारा बेनीवाल पर कांग्रेस से सांठ-गांठ के आरोप भी लगते रहे हैं।

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