Rajasthan News : भाजपा में अगड़ी जातियों के बढ़ते वर्चस्व से पिछड़े वर्ग में बढ़ रही नाराजगी, जानिए सियासी वजह
राजस्थान में भाजपा ने सिलसिलेवार नियुक्तियां कर प्रदेश के ब्राह्मण, राजपूत और जाट समुदाय को साधने की कवायद की है। बीजेपी की इस कोशिश से पिछड़े वर्ग में नाराजगी बढ़ी है।

Rajasthan News : राजस्थान में इसी साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा में नियुक्तियों का सिलसिला तेज हो गया है। प्रदेश में सिलसिलेवार हो रही नियुक्तियों में भाजपा जातीय समीकरणों को साधने की भी पूरी कोशिश कर रही है। भाजपा ने प्रदेशाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और उपनेता प्रतिपक्ष बनाकर प्रदेश में ब्राह्मण, राजपूत और जाट समुदाय को साधने की कोशिश की है। राजनीति के जानकारों की मानें तो भाजपा की प्रदेश में अगड़ी जातियों के साधने कवायद के बीच पिछड़ी जातियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। पार्टी ने चुनाव पर फोकस करने के साथ दलित, आदिवासी और ओबीसी वर्ग से जुडी कुछ पिछड़ी जातियों की अनदेखी करना शुरू कर दिया है। जानकारों का मानना है कि इससे इन जातियों का झुकाव कांग्रेस और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रति बढ़ता जा रहा है। अशोक गहलोत का पिछले कुछ दिनों से मुख्यमंत्री आवास पर इन जातियों से मेल-मुलाकात का सिलसिला तेज हो गया है। सियासी गलियारों में इसे लेकर चर्चा भी तेज हो गई है।
जाट-राजपूत के झोल में उलझी बीजेपी
प्रदेश में जातीय समीकरणों को साधने के लिए भाजपा ने अलग-अलग दांव चले हैं। पिछले दिनों प्रदेश में हुई नियुक्तियों को इससे जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने ब्राह्मण प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर ब्राह्मणों को साधने की कोशिश की है। वहीं नेता प्रतिपक्ष और उपनेता प्रतिपक्ष के लिए राजपूत और जाट समुदाय को तरजीह देकर इन समुदायों पर भरोसा जताया है। राजस्थान में जाट समुदाय ओबीसी वर्ग में आता है। लेकिन राजनीतिक लिहाज से जाट समुदाय सक्षम कौम है। जानकार बताते हैं प्रदेश में मौजूदा सरकार में तकरीबन 21 विधायक जाट समुदाय और 12 से ज्यादा विधायक राजपूत समुदाय से आते हैं। लोकसभा में राजस्थान से 7 सांसद जाट और 3 सांसद राजपूत हैं। इसके अलावा प्रदेश में पंचायतीराज और निकाय में इन समुदाय का खासा वर्चस्व है। बावजूद इसके प्रदेश में भाजपा के इन जातियों पर फोकस से पिछड़े वर्ग में नाराजगी है।
पिछड़ी जातियों का गहलोत पर बढ़ता भरोसा
प्रदेश की सियासत में भाजपा का अगड़ी जातियों को बढ़ता समर्थन पिछड़े वर्ग को खटक रहा है। इससे नाराज इस वर्ग का ग्राफ कांग्रेस की ओर बढ़ता जा रहा है। शायद यही वजह है कि प्रदेश में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का ग्राफ तेजी से बढ़ता जा रहा है। चर्चा है कि सीएम गहलोत प्रदेश की पिछड़े वर्ग से जुडी छोटी-छोटी जातियों को जोड़ने की कोशिश की है। ऐसे में आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। राजनीति के जानकार कहते हैं प्रदेश में जातीय समीकरणों को साधने की कवायद में भाजपा को अगड़ी जातियों के साथ इन जातियों को भी शामिल करना होगा।












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