Rajasthan News: भाजपा ने राजस्थान के 25 में से 5 सांसदों को दी संगठन में तरजीह, जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष
Rajasthan News: राजस्थान में विधानसभा चुनाव के चलते राजनीतिक संगठनों में नियुक्तियों का दौर शुरू हो गया है। भाजपा में हाल ही में प्रदेश कार्यकारिणी और संगठन से जुड़े विभिन्न मोर्चों में अहम पदों पर नियुक्तियां दी है। राजनीति के जानकारों की मानें तो पार्टी ने प्रदेश की टीम और मोर्चों में जिन नेताओं को नियुक्ति दी है। उनमें से ज्यादातर नेता पहले से जनप्रतिनिधि हैं। पार्टी द्वारा प्रदेश में पच्चीस में से पांच सांसदों को संगठन में नियुक्ति दी गई है। ऐसे में पार्टी से जुड़े जमीनी नेताओं में निराशा का माहौल है। राजनीति के जानकार बताते हैं कि मौजूदा दौर में प्रदेश में ज्यादातर नियुक्तियां सीधे दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा दी जा रही है। जिसमें पार्टी में जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं की उपेक्षा की जा रही है। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में निराशा है। जानकार कहते हैं कि पार्टी के सांसद मलाई खा रहे हैं और कार्यकर्त्ता मुंह देख रहे हैं।
दिल्ली दरबार में जी हुजूरी करने वाले नेताओं की मौज
पार्टी ने राजस्थान के मौजूदा सांसदों को संगठन में तरजीह दी है। इससे पार्टी के प्रदेश और जिला स्तर पर काम करने वाले नेताओं में नाराजगी देखी जा रही है। पार्टी ने अलवर सांसद बालकनाथ योगी और टोंक सवाईमाधोपुर सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया को पार्टी में प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया है। वहीं राजसमंद सांसद दिया कुमारी को पार्टी में प्रदेश महामंत्री नियुक्त किया गया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद पर काबिज सीपी जोशी खुद चित्तौड़गढ़ से सांसद हैं। हाल ही में संगठन से जुड़े किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर अजमेर के सांसद भागीरथ चौधरी को नियुक्त किया गया है। इससे सियासी गलियारों में सवाल उठने लगे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक पार्टी में जमीनी स्तर पर काम कर रहे कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई है। प्रदेश में चार महीने बाद विधानसभा चुनाव और दस महीने बाद लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पार्टी द्वारा चुनाव से पहले संगठन के अहम पदों पर जनप्रतिनिधियों की नियुक्त पर सवाल खड़े हो रहे हैं। राजनीति के जानकार कहते हैं कि राजस्थान को लेकर दिल्ली से नियुक्तियां की जा रही है। प्रदेश में पार्टी संगठन का महत्त्व लगातार कम होता जा रहा है। ऐसे में दिल्ली दरबार में जी हुजूरी करने वाले नेताओं की मौज हो रही है।

शेखावत और वसुंधरा के समय पार्टी के नेताओं का मिली तरजीह
राजनीति के जानकार यह भी बताते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत और वसुंधरा राजे के दौर में पार्टी में नेताओं को पूरी अहमियत दी जाती थी। पार्टी में काम करने वाले कार्यकर्ताओं को उनकी योग्यता और क्षमता के अनुसार पद दिए जाते थे। लेकिन अब पीएम मोदी के दौर में पार्टी और संगठन से जुड़े फैसले दिल्ली में होते हैं। ऐसे में दिल्ली से ही नियुक्तियां की जा रही है। पार्टी की प्रदेश इकाई की कोई अहमियत नहीं रह गई है। जानकार कहते हैं पार्टी के जो कार्यकर्ता चुनाव नहीं लड़ पाते हैं या जिन्हें पार्टी टिकट नहीं दे पाती है। उन कार्यकर्ताओं को संगठन में समायोजित कर संतुष्ट किया जाता है। लेकिन राजस्थान में पार्टी के भीतर संगठन में भी जनप्रतिनिधियों के जगह बनाने का दौर शुरू हो गया है।












Click it and Unblock the Notifications