Rajasthan: जगदीप धनकड़ को समर्थन देकर कांग्रेस के जाट मतदाताओं को रिझाएंगी मायावती, समीकरणों पर डालेगी असर

जयपुर, 5 अगस्त। बसपा प्रमुख मायावती एनडीए के उप राष्ट्रपति के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को अपनी पार्टी का समर्थन देकर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से बदला ले रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बसपा के 6 विधायकों को कांग्रेस में शामिल कर लिया था। अपने पिछले कार्यकाल में भी गहलोत ने ऐसा ही किया था। इसके बाद मायावती और गहलोत में तकरार जगजाहिर है। इस समय बसपा बहुत ही कमजोर होकर रह गई है। माना जा रहा है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में मायावती राजस्थान में कांग्रेस के जाट मतदाताओं में सेंध लगाएगी।

mayawati

कांग्रेस का जाट वोट बैंक साधने की कवायद

उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव में बसपा के केवल एक-एक विधायक ही जीत पाए। इसके अलावा लोकसभा में 10 और राज्यसभा में एक सांसद हैं। इतना होने के बावजूद भी बसपा ने इतनी ताकत जरूर है कि वह उत्तर प्रदेश के बाहर के राज्यों में भी चुनाव नतीजों को प्रभावित कर सके। राजस्थान में 2018 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने 190 सीटों पर चुनाव लड़ा था। यहाँ बसपा ने 6 सीटें जीती थी। यह सभी छह विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे। अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री के रूप में अपने पहले के कार्यकाल में भी बसपा विधायक कांग्रेस में शामिल कर लिए थे। मायावती द्वारा एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के प्रत्याशी जगदीप धनखड़ को समर्थन देने के राजस्थान में सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि बसपा अगले साल राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में जाट वोट बैंक में सेंध लगाना चाहती है। राजनीति में मायावती की ऊर्जा अब उतनी नहीं रही है। लेकिन अभी भी राजनीतिक पार्टियों के समीकरणों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती हैं। खासतौर से उन सीटों पर जहां कड़ा मुकाबला हो। राजस्थान जाट बाहुल्य प्रदेश है। ऐसे में मायावती यहां कांग्रेस के जाट वोट बैंक में सेंध लगाने का प्रयास करेंगी।

ashok gahlot

यूपी में नहीं कर पाई अच्छा प्रदर्शन

बसपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान 80 से अधिक मुस्लिम सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किए थे। लेकिन पार्टी वहां उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी को नुकसान पहुंचाने के सिवाय पार्टी का कोई खास प्रदर्शन नहीं रहा। इसके अलावा रामपुर और आजमगढ़ के उपचुनाव में भी प्रदर्शन कोई खास नहीं रहा। राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए गए कि बसपा ने अप्रत्यक्ष तौर पर भाजपा की मदद की। पिछले कुछ वर्षों में मायावती के भाजपा के नजदीक जाने के संकेत मिलते रहे हैं। संसद में भी ट्रिपल तलाक और जम्मू कश्मीर में धारा 370 खत्म करने के मामले को लेकर बसपा और मायावती की भूमिका ना के बराबर ही थी। साफ तौर पर राजस्थान में भी बसपा कांग्रेस के वोट बैंक में ही सेंध लगाएगी।

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