राजस्थान: बीजेपी ने वसुंधरा राजे की राह की आसान, जन्मदिन के समानांतर कार्यक्रम कर निपट गए पूनिया
भाजपा ने पार्टी अध्यक्ष बदलकर वसुंधरा राजे की मुख्यमंत्री बनने की राह आसान कर दी है। पार्टी के भीतर राजे का सबसे ज्यादा विरोध सतीश पूनिया ही कर रहे थे। पार्टी के नए समीकरणों से वसुंधरा को सीधे तौर पर फायदा होगा।

भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने प्रदेश में पार्टी अध्यक्ष बदल कर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की राह आसान कर दी है। प्रदेश में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के भीतर घमासान चल रहा था। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया को मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार थे। राजनीति के जानकारों की मानें तो सतीश पूनिया के अध्यक्ष रहते हुए पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को पार्टी के भीतर दरकिनार करने की हरसंभव कोशिश की गई। वसुंधरा राजे के जन्मदिवस के मौके पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने जयपुर में पार्टी का समानांतर कार्यक्रम कर सबसे बड़ी भूल कर दी। इसी का खामियाजा सतीश पूनिया को उठाना पड़ा। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से उनकी विदाई हो गई। पार्टी में चित्तौड़गढ़ से सांसद सीपी जोशी को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है।
पार्टी के पोस्टरों से वसुंधरा राजे का चेहरा हटाया
प्रदेश में भाजपा के पोस्टरों से वसुंधरा राजे का चेहरा हटा दिया गया। यह सब गतिविधियां पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के कार्यकाल में हुई। पार्टी सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दखल के बाद कुछ माह पहले पार्टी के बैनर में वसुंधरा राजे की वापसी हुई। इसी तरह वसुंधरा राजे को पार्टी के कार्यक्रमों के मंच पर भी उतनी तरजीह नहीं दी गई। जिसकी वह हकदार थी। इसके लिए भी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को ही दखल करना पड़ा। इसके बाद वसुंधरा राजे को पार्टी के मंच पर जगह मिलना शुरू हुई। राजे प्रदेश में भाजपा का लोकप्रिय चेहरा है। वे दो बार प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। प्रदेश में आज भी वसुंधरा राजे के समर्थकों की कमी नहीं है।

मुख्यमंत्री पद की राह होगी आसान
भाजपा के भीतर लंबे समय से मुख्यमंत्री पद को लेकर घमासान जारी था। लेकिन वसुंधरा राजे के जन्मदिवस पर समानांतर कार्यक्रम आयोजित करने के बाद पार्टी के भीतर जिस तरह से घटनाक्रम घटित हो रहा है। उससे साफ होता जा रहा है कि प्रदेश में वसुंधरा राजे की मुख्यमंत्री बनने की संभावनाएं प्रबल होती जा रही है। सूत्र बताते हैं सियासी गलियारों में वसुंधरा राजे के लंबे समय से चुप्पी साधे रहने की बड़ी अहम वजह मानी जा रही है। चर्चा है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर ही वसुंधरा राजे ने चुप्पी साध रखी है। पिछले दिनों कोटा में वसुंधरा समर्थक विधायक प्रह्लाद गुंजल के कार्यक्रम को भी राजे ने निरस्त करवा दिया था। इस कार्यक्रम को भी वसुंधरा राजे के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा था। माना जा रहा है कि वसुंधरा राजे लगातार पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में हैं।













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