Padma Shri Award : जयपुर के हुसैन भाइयों की साइकिल के पंक्‍चर बनाने से पद्मश्री तक की पूरी कहानी

गणतंत्र दिवस 2023 के मौके पर गजल सिंगर अहमद हुसैन व मोहम्‍मद हुसैन को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। जयपुर के हुसैन भाइयों का जीवन संघर्ष हर किसी के लिए प्रेरणादायी है।

Ahmed Hussain Mohammad Padma Shri Award

भारत ने 26 जनवरी 2023 को अपना 74वां गणतंत्र दिवस मनाया है। देशभर में विशेष आयोजन हुए। इसी दिन पद्म पुरस्कार भी प्रदान किए गए, जो भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कारों में से एक हैं। राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्‍या पर 106 हस्तियों को पद्म अलंकरण देने की मंजूरी दी।

राजस्‍थान में इनको भी मिला पद्म श्री

राजस्‍थान में इनको भी मिला पद्म श्री

राजस्‍थान की चार हस्तियों को पद्म श्री मिला है। इमनें झुंझुनूं के बेटे व शेयर मार्केट के जाने-माने निवेशक राकेश झुनझुनवाला को मरणोपरांत पद्म श्री दिया गया है। इनके अलावा जयपुर के गजल गायक भाई उस्‍ताद अहमद हुसैन (72) व उस्‍ताद मोहम्‍मद हुसैन (70) और समाजसेवी लक्ष्‍मण सिंह व डूंगरपुर के मूलचंद लोढ़ा (70) का भी पद्म अवार्ड मिला है।

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     हुसैन बधुओं का जन्‍म जयपुर के संगीत परिवार में हुआ

    हुसैन बधुओं का जन्‍म जयपुर के संगीत परिवार में हुआ

    बता दें कि जयपुर हुसैन बंधुओं के वालिद उस्‍ताद अफजल हुसैन गजल और ठुमरी के उस्‍ताद थे। हुसैन बंधु बीते 60 साल से गजल गायिका कर रहे हैं। वे 10 से अधिक देशों में प्रस्‍तुति दे चुके हैं। हुसैन भाइयों का पद्म श्री पुरस्‍कार तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा।

    हुसैन बधुओं का जन्‍म जयपुर के संगीत परिवार में हुआ। संगीत इनकी रगो में समाया हुआ है। चाचा, पिता व नाना सभी संगीत की दुनिया में जाने माने नाम रहे। दोनों भाइयों सगीत की शुरुआती शिक्षा वालिद उस्‍ताद अफजल हुसैन से ली।

    दीवारों पर पेंट भी किया करते थे

    दीवारों पर पेंट भी किया करते थे

    दोनों भाइयों ने पढ़ाई छोड़कर संगीत को चुना। कुछ साल बाद बीमारी की वजह से पिता की मौत हो गई। परिवार का खर्च निकालने के लिए दोनों भाई पार्ट टाइम जॉब करने लगे। साइकिल के पंक्‍चर तक बनाया करते थे। कभी घिसाई व कभी दीवारों पर पेंट किया करते थे। आर्थिक दिक्‍कतों के बावजूद गजल से मुंह नहीं मोड़ा।

     सितारा देवी की वजह से बॉलीवुड में एंट्री

    सितारा देवी की वजह से बॉलीवुड में एंट्री

    एक बार जयपुर में परफॉर्म कर रहे हुसैन बंधुओं पर भारत की कथक क्‍वीन सितारा देवी की नजर पड़ी। उन्‍होंने दोनों भाइयों को मुम्‍बई बुलाया। सितारा देवी ने इन्‍हें कल्‍याणजी आनंदजी से मिलवाया। साल 1980 एलबम गुलदस्‍ता में गाने का मौका मिला और गजल गायकी में पूरे बॉलीवुड में छा गए। फिर तेरे दर पर दीवाना गाने से दुनियाभर में पहचान मिली।

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