ओसिया विधायक दिव्या मदेरणा ने चौंकाया, अशोक गहलोत के खिलाफ विधायक दल की बैठक में पहुंची दिव्या
जयपुर, 26 सितंबर। राजस्थान में चल रहे सियासी घटनाक्रम का असर जोधपुर की राजनीति पर देखने को मिला। जोधपुर जिले के ओसियां से विधायक दिव्या मदेरणा को छोड़कर कांग्रेस के सभी विधायक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पक्ष में खड़े हो गए। दिव्या मदेरणा अकेले विधायक दल की बैठक में रायशुमारी के लिए सीएमआर पहुंची। जबकि जोधपुर जिले से अन्य तमाम कांग्रेस के विधायक शांति धारीवाल के घर पहुंचे थे। हालांकि विधायक दल की बैठक में ज्यादातर विधायकों के शामिल नहीं होने से बैठक आहूत नहीं हो पाई।

दिव्या ने गहलोत को याद दिलाया 1998 का घटनाक्रम
ओसिया विधायक दिव्या मदेरणा ने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को 1998 का घटनाक्रम याद दिलाया है। दिव्या मदेरणा ने ट्वीट कर लिखा कि 1998 में पीसीसी की बैठक में एक लाइन का प्रस्ताव उन्होंने ही माइक पर बोल कर पारित कराया था। आलाकमान का निर्णय सबको मान्य होगा। जबकि ज्यादातर विधायक परसराम मदेरणा के पक्ष में थे लेकिन उन्होंने सब को बुला कर सख्ती से कह दिया था कि विद्रोह का एक शब्द नहीं सुनना चाहता हूँ। दिव्या ने लिखा कि परसराम मदेरणा जिस मिट्टी के बने थे। वह मिट्टी आज के दौर में नहीं मिलती। उनके रग-रग में, खून में, आत्मा में सिर्फ कांग्रेस और आलाकमान के प्रति वफादारी थी। आखिरी सांस तक उफ तक नहीं किया। राजस्थान की राजनीति में कोई भी व्यक्ति परसराम मदेरणा नहीं हो सकता है।

राजस्थान के सीएम नहीं बन पाए परसराम मदेरणा
परसराम मदेरणा 1998 में जब कांग्रेस की सरकार बन रही थी। तब मुख्यमंत्री की दौड़ में सबसे आगे थे। लेकिन कांग्रेस आलाकमान के फैसले के आगे वे झुक गए। पिछले चुनाव में भी सचिन पायलट का नाम आगे था। लेकिन आलाकमान के निर्णय पर सभी ने सहमति जताई। अब जब खुद अशोक गहलोत की बारी आई है तो उन्होंने दबी जुबान विरोध की आग को हवा देने का काम किया है। कांग्रेस के दिग्गज नेता परसराम मदेरणा दिव्या मदेरणा के दादा थे। जो 1998 में मुख्यमंत्री बनते-बनते रह गए थे। ट्वीट में दिव्या ने उनके ज्यादा और कांग्रेस के दिग्गज नेता परसराम मदेरणा की सीएम पद की दावेदारी वाली घटनाक्रम की यादों को ताजा किया है।












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