OPINION: अशोक गहलोत की ओल्ड पेंशन स्कीम देशभर में बनी मुद्दा, जानिए कांग्रेस को ओपीएस से कैसे होगा फायदा

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत देश की सियासत में अपनी योजनाओं के लेकर जाने जाते हैं। राजस्थान ही नहीं बल्कि देशभर में वे अपनी योजनाओं को लेकर चर्चा में रहते हैं। अशोक गहलोत के मौजूदा कार्यकाल की योजनाओं को लेकर प्रदेश में चर्चा ही नहीं है। बल्कि राजस्थान के निवासियों को उनका लाभ भी मिल रहा है। राजनीति के जानकारों की मानें तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में प्रमुख दस जन कल्याणकारी योजनाएं ऐसी लागू कर रखी है। जिनसे प्रदेशवासी सीधे तौर पर लाभांवित हो रहे हैं। सीएम गहलोत की ओल्ड पेंशन स्कीम ने तो देशभर में धूम मचा रखी है। ओपीएस अब सिर्फ एक योजना नहीं रही है। बल्कि देश की जरूरत बन गई है। क्योंकि इस योजना से देश का सबसे बड़ा वर्ग जुड़ा हुआ है। सीएम गहलोत की यह योजना एक ऐसा चुनावी मुद्दा बन गई है। जिसे लेकर बीजेपी को बैकफुट पर आना पड़ रहा है। इसे राजस्थान में लागू करने का फायदा कांग्रेस को अन्य राज्यों में मिल रहा है। हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक चुनाव में ओपीएस प्रमुख मुद्दा बनकर उभरी है। कई मौकों पर तो सीएम गहलोत ने हिमाचल और कर्नाटक में कांग्रेस की जीत का श्रेय ओपीएस को दिया है। सीएम गहलोत को अपनी योजनाओं के दम पर सत्ता वापसी की पूरी उम्मीद हैं।

राजस्थान सरकार ने लागू की ओल्ड पेंशन स्कीम

राजस्थान में बजट 2023-24 पेश करने और जनता के लिए रियायतों की घोषणा करने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि घोषित योजनाएं सामाजिक सुरक्षा का हिस्सा हैं, न कि मुफ्त। उन्होंने राज्य में लगभग सभी सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने की घोषणा की है। राजनीति के जानकार बताते हैं कि राजस्थान में लंबे समय से कर्मचारियों द्वारा ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने की मांग की जा रही थी। देशभर में लगभग 2 करोड़ 25 लाख सरकारी कर्मचारी कार्यरत हैं। राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों की संख्या लगभग 7 लाख 50 हजार मानी जाती है। राजस्थान में सीएम गहलोत की घोषणा से पहले केवल डेढ़ लाख कर्मचारियों को ही ओपीएस का लाभ मिल रहा था। अब ओपीएस लागू करने के बाद राजस्थान के सभी कर्मचारियों को इसका लाभ मिलना तय हो गया है। ओल्ड पेंशन योजना को दिसंबर 2003 में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने खत्म कर दिया था। इसके बाद राष्ट्रीय पेंशन योजना लागू की गई। एनपीएस अप्रैल 2004 से प्रभावी है। पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारी के आखिरी वेतन का 50 फीसदी पेंशन होती थी। इसकी पूरी राशि का भुगतान सरकार करती थी। वहीं एनपीएस उन कर्मचारियों के लिए हैं। जो एक अप्रैल 2004 के बाद सरकारी नौकरी में शामिल हुए। कर्मचारी अपनी तनख्वाह से दस फीसदी हिस्सा पेंशन के लिए योगदान करते थे। इसके अलावा राज्य सरकार 14 फीसदी योगदान देती थी। पेंशन का पूरा पैसा पेंशन रेगुलेटर के पास जमा होता है। जो उसे निवेश करता है।

ashok gehlot

राजस्थान के बाद ओपीएस छत्तीसगढ़, पंजाब और झारखंड में भी लागू

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा ओपीएस की घोषणा करने के बाद उन्हीं की पार्टी कांग्रेस की सरकार ने छत्तीसगढ़ में मार्च 2022 में बजट में ओपीएस लागू करने की घोषणा की। छत्तीसगढ़ की घोषणा के बाद कुछ समय पहले पंजाब में भी सीएम भगवंत मान ने भी कर्मचारियों के लिए ओपीएस की घोषणा कर दी। अब झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने भी ओपीएस लागू करने की घोषणा कर दी है। आम आदमी पार्टी ने गुजरात चुनाव में भी सरकार में आने पर ओपीएस लागू करने का वादा किया था। ओपीएस हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक चुनाव में बड़ा मुद्दा बनकर उभरा था। दोनों राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने क्लीन स्वीप हांसिल की थी। जानकार कहते हैं कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इससे बेहद उत्साहित हैं। उनका दावा है कि अपनी योजनाओं के दम पर वे राजस्थान में भी दुबारा जीत हांसिल कर सत्ता में वापसी करेंगे।

भाजपा की राज्य सरकारों ने ओपीएस लागू नहीं किया

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओपीएस स्कीम का असर देशभर में इस कदर हुआ कि देश के कई राज्यों में भाजपा सरकार में होते हुए भी इसे लागू नहीं कर पाई। देश में अब तक कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। कई राज्यों में भाजपा की सरकारें हैं। लेकिन भाजपा शासित राज्यों में ओपीएस लागू करने की घोषणा नहीं की गई। राजनीति से जुड़े लोग बताते हैं कि हिमाचल के नतीजों में ओपीएस को एक मजबूत कारण कांग्रेस की जीत के लिए माना गया है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में इसी साल में विधानसभा चुनाव होने हैं। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ओपीएस लागू किया जा चुका है। ऐसे में माना जा रहा है कि इन राज्यों के चुनाव में कांग्रेस को ओपीएस का सीधे तौर पर लाभ मिलेगा।

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