OPINION: राजस्थान में कांग्रेस के लिए करिश्माई साबित होंगी अशोक गहलोत की योजनाएं, जानिए पूरी रणनीति
राजस्थान में विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही कांग्रेस पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुकी है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद रविवार को कांग्रेस की पहली सीडब्लूसी की घोषणा कर दी है। सीडब्लूसी में उन राज्यों के नेताओं को तरजीह दी गई है। जहां विधानसभा चुनाव होने हैं। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनकी सरकार की घोषणाओं और योजनाओं से कांग्रेस मजबूत बनी हुई है। वहीं पार्टी संगठन द्वारा चुनाव से जुडी कमेटियों की एक के बाद एक घोषणा पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा रही है। राजनीति से जुड़े लोग बताते हैं कि राजस्थान में कांग्रेस के मजबूत होकर उभरने की बड़ी वजह खुद भाजपा बनी हुई है। दरअसल, भाजपा अभी तक यह तय नहीं कर पा रही है कि राजस्थान में चुनाव किस तरह लड़ा जाए। भाजपा की यही कमजोरी प्रदेश में कांग्रेस को ताकत दे रही है।
कांग्रेस ने सीडब्लूसी में राजस्थान के इन नेताओं को किया शामिल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी का ऐलान किया है। इसमें राजस्थान से पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट सहित 7 नेताओं को इसमें जगह दी गई है। राजस्थान से सिर्फ एक मंत्री महेंद्रजीत मालवीय को मेंबर बनाया है। सीडब्लूसी के 39 मेंबर में राजस्थान से बनने वाले सदस्यों में सचिन पायलट, पूर्व सांसद जितेंद्र सिंह, जल संसाधन मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय और अभिषेक मनु सिंघवी को शामिल हैं। हरीश चौधरी को पंजाब प्रभारी के नाते वर्किंग कमेटी में शामिल किया गया है। वहीं मोहन प्रकाश को सीडब्लूसी के 32 स्थायी आमंत्रित मेंबर्स में जगह दी गई है। उदयपुर के रहने वाले पवन खेड़ा को 9 विशेष आमंत्रित मेंबर्स में जगह दी गई है। राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा भी सीडब्ल्यूसी में है। सीडब्ल्यूसी के मेंबर रहे रघुवीर मीणा को इस बार जगह नहीं मिली है। रघुवीर मीणा की जगह आदिवासी बेल्ट से जल संसाधन मंत्री महेंद्रजीत मालवीय को सीडब्ल्यूसी में लिया गया है। मालवीय आदिवासी बेल्ट में जनाधार वाले नेता माने जाते हैं।

सचिन पायलट को सीडब्लूसी में शामिल किए जाने के मायने
सीडब्लूसी में सचिन पायलट को जिम्मेदारी मिलने के बाद अब कांग्रेस में उनकी भूमिका लेकर चल रहे कयासों पर विराम लग गया है। पहले उनके कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष बनाने और राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने की चर्चा थी। पायलट को कांग्रेस की सुप्रीम बॉडी में लेकर हाईकमान ने उन्हें अहमियत देने का भी मैसेज दे दिया है। विधानसभा चुनावों से ठीक पहले पायलट को जिम्मेदारी दी गई है। सचिन पायलट को तीन साल से ज्यादा समय बाद संगठन में पद दिया गया है।
विधानसभा चुनाव में मजबूत होकर उभरेगी कांग्रेस
राजनीति के जानकार बताते हैं कि राजस्थान में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं। पार्टी ने जिस तरह से चुनाव को लेकर संगठन के रूपरेखा तय की है। उससे कांग्रेस मजबूत होकर उभरेगी। राजस्थान में सचिन पायलट के चेहरे पर भी पार्टी को वोट मिलते हैं। पार्टी ने सचिन पायलट को भुनाने की पूरी कोशिश की है। जानकार यह भी कहते हैं कि पायलट की गिनती कांग्रेस में बड़े नेताओं में की जाती है। पार्टी ने सचिन पायलट को सीडब्लूसी में शामिल कर उन्हें संगठन में मौका दिया है। अब राजस्थान में क्षेत्रीय नेता के तौर पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राष्ट्रीय नेता के तौर पर सचिन पायलट चुनाव प्रचार करेंगे। निश्चित तौर पर कांग्रेस को चुनाव में इसका फायदा मिलेगा।
राजस्थान में चुनाव की कमान अशोक गहलोत को
कांग्रेस भले ही राजस्थान में चेहरे पर चुनाव नहीं कराए जाने की बात करती हो। लेकिन पार्टी राजस्थान में जिस तरह संगठन की कर रही है। उससे साफ जाहिर है कि पार्टी राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के चेहरे पर ही चुनाव मैदान में उतारेगी। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की योजनाएं और घोषणाओं ने आमजन के जेहन में इस कदर उतर चुकी है कि आम आदमी अशोक गहलोत से आगे सोच ही नहीं पा रहा है। राजनीतिक समीक्षक बताते हैं कि जनता सरकार द्वारा चलाई गई मुफ्त योजनाओं का लंबे समय तक फायदा उठाना चाहेगी। ऐसे में पूरी उम्मीद है कि जनता का झुकाव कांग्रेस और अशोक गहलोत के पक्ष में ज्यादा रहेगा। वे कहते हैं कि राजस्थान में कांग्रेस अगर दुबारा सत्ता में आती है तो उसकी सबसे बड़ी वजह यही रहेगी।












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