Rajasthan के पाली में वन्य जीवों को बचाने में जुटे ओमवीर धवल के लिए पर्यावरण संरक्षण कैसे बना मिशन, जानिए वजह
राजस्थान के पाली जिले के बीसलपुर के रहने वाले ओमवीर धवल की वाइल्ड लाइफ में शुरुआत फोटोग्राफी से हुई थी। धवल अब पश्चिमी राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण के लिए जाने जाते हैं।
Rajasthan के पाली जिले के बीसलपुर गांव के ओमवीर धवल अजमेर के महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से एमएससी कर रहे थे। इसी दौरान रिसर्च वर्क के सिलसिले में धवल वाइल्ड लाइफ के संपर्क में आए वन्यजीवों से मानव को होने वाले खतरों को भांपते हुए उन्होंने वन्यजीवों के संरक्षण का बीड़ा उठाया। गांव के चुनिंदा साथियों के साथ वन्यजीवों के संरक्षण करते करते-करते धवल पश्चिमी राजस्थान में वाइल्डलाइफ की पहचान बन चुके हैं। ओमवीर धवल का मकसद अब वाइल्ड लाइफ मिशन बन चुका है।

5000 सांपों की बचाई जान
वन्यजीव शोधकर्ता ओमवीर धवल वाइल्ड लाइफ और इकोलॉजी सोसायटी वेस्ट बंगाल से बतौर वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट जुड़े हुए हैं। धवल की टीम में तकरीबन 20 लोग शामिल है। उन्होंने अपने टीम के सहयोग से पिछले 6 सालों में जवाई के आसपास करीब 16 गांव में पाए जाने वाले सांपों की 23 प्रजातियों को पहचान कर शोध पत्र प्रकाशित किए। धवल ने वन्यजीवों में लेपर्ड, हायना, मगरमच्छ और अन्य कई प्रकार के पक्षियों और सांपों को रेस्क्यू कर बचाया है। ओमवीर धवल बताते हैं जब वे उदयपुर में बीएड कर रहे थे। तब उनके गांव में सांपों के काटने की घटनाएं बढ़ रही थी। इसके बाद उन्होंने तय किया कि वह गांव में वन्यजीवों को संरक्षण देते हुए गांव वालों का जीवन बचाएंगे। तभी से ओमवीर वन्य जीव संरक्षण में जुट गए। फोटोग्राफी का शौक उन्हें वाइल्ड लाइफ की तरफ खींचता चला गया। अभी ओमवीर अपने बीच 20-25 साथियों के साथ क्षेत्र के 16 गांव में वन्यजीवों के संरक्षण में जुटे हैं।

वाइल्ड लाइफ और पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रकाशित हो चुके शोध पत्र
ओमवीर धवल समय-समय पर जवाई क्षेत्र में पौधरोपण कार्यक्रम, वन्यजीवों के प्रति जागरूकता अभियान, जवाई क्षेत्र में वन्यजीव अपराध को रोकने का काम कर रहे हैं। धवल के वाइल्डलाइफ और पर्यावरण को लेकर कई शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं और कुछ प्रकाशन के लिए भेजे हुए हैं। धवल का जवाई बांध से दुर्लभ पक्षी इंडियन स्कीमर की फोटोग्राफी पर पहली बार जवाई क्षेत्र से 2018 में अंतरराष्ट्रीय स्तर के जर्नल इंडियन वर्ल्ड में शोध पत्र प्रकाशित हुआ। उन्होंने जवाई के 16 गांव में पाए जाने वाले सांपों की सूची तैयार कर अंतरराष्ट्रीय स्तर के जनरल जर्नल ऑफ़ एंटोंमोनोलॉजी एंड जूलॉजी स्टडी में 2021 में शोध पत्र प्रकाशित किया। धवल बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्र में सांपों को लेकर जागरूकता आई है। अब गांव वाले भी सांपों की प्रजातियों को पहचानने लगे हैं। वह भी उनके संरक्षण में जुट गए हैं। इंटरनेशनल जनरल ऑफ एंड बायोलॉजिकल स्टडीज में दुर्लभ सांप लिथ सैंड स्नेक पर उनका शोध पत्र 2021 में प्रकाशित हुआ। धवल अपने क्षेत्र में क्षेत्रवासियों को वन्यजीवों के प्रति जागरूक करने के साथ उनके बचाव के लिए समझाइश भी करते हैं। इसके साथ ही वन्यजीवों के प्रति होने वाले अपराधों को रोकने में भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं।













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