Rajasthan में बयानबाजी की रिपोर्ट सौंपेंगे गोविंद सिंह डोटासरा पर, क्या गहलोत के खिलाफ रिपोर्ट देंगे डोटासरा
राजस्थान में जब केसी वेणुगोपाल को नेताओं की बयानबाजी और कार्रवाई को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने गोविंद सिंह डोटासरा की ओर इशारा करते हुए रिपोर्ट सौंपने की बात कही। क्या डोटासरा सीएम गहलोत के खिलाफ रिपोर्ट दे पाएंगे।
Rajasthan Congress में 25 सितंबर को हुए घटनाक्रम के बाद नेताओं की बयानबाजी पर लगाम लगाने के लिए संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एडवाइजरी जारी की थी। उस एडवाइजरी के खिलाफ जाकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई मंत्रियों और विधायकों ने बयानबाजी की। इस एडवाइजरी के उल्लंघन पर जब खुद केसी वेणुगोपाल से सवाल किया गया तो उनका कहना था कि इस बारे में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से रिपोर्ट मांगी गई है।

कार्रवाई के सवाल को टाल गए वेणुगोपाल
प्रकरण बड़ा हास्यास्पद है कि जिन बयानों का प्रसारण राष्ट्रीय मीडिया और टीवी चैनलों पर हुआ और जो जगजाहिर है। उनके बारे में रिपोर्ट मांगी जा रही है और यहां सवाल यह है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा क्या इतने सक्षम हैं। जो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बयानबाजी को लेकर कोई रिपोर्ट पार्टी संगठन महासचिव को देख सकें। भारत जोड़ो यात्रा की राजस्थान में तैयारियों के संबंध में हुई समन्वय समिति की बैठक में आए केसी वेणुगोपाल से जब यह पूछा गया कि आप की ओर से जारी एडवाइजरी के बावजूद लगातार बयानबाजी हो रही है और खुद मुख्यमंत्री इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं तो क्या इस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। इस बात पर संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल का कहना था कि इस बारे में हमने प्रदेश कांग्रेस से रिपोर्ट मांगी है। इसका मतलब साफ है कि प्रदेश कांग्रेस के ऊपर सारी बात डालकर केसी वेणुगोपाल विवाद से अपना पल्ला झाड़ कर चले गए।

अनुशासनहीनता पर का कार्रवाई करेगा कांग्रेस हाईकमान
जबकि हकीकत यह है कि 25 सितंबर को राजस्थान में कांग्रेस विधायक दल की अधिकृत बैठक बुलाई गई थी। जिसमें पार्टी आलाकमान की ओर से पर्यवेक्षक के रूप में मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन को भेजा गया था। उस बैठक का बहिष्कार कर समानांतर विधायक दल की बैठक बुलाई गई। बैठक संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के निवास पर हुई और उसमें मुख्य सचेतक महेश जोशी ने उसके लिए विधायकों को सूचना भेजी थी। जबकि इन दोनों की जिम्मेदारी सदन में और सदन के बाहर विधायकों को पार्टी के प्रति एकजुट रखने की होती है। इतना होने के बाद शांति धारीवाल में जोशी और समानांतर बैठक की व्यवस्था करने में सहयोगी रहे धर्मेंद्र राठौड़ को पार्टी की ओर से अनुशासनात्मक मामले में नोटिस जारी किए गए। लेकिन लगभग 3 महीने हो गए हैं और इनके जवाब के बाद भी आज तक यह पता नहीं है कि क्या इन तीनों ने समानांतर बैठक बुलाकर अनुशासन तोड़ा था या फिर इन्होंने सही किया था। जब इतनी बड़ी घटना के बावजूद कांग्रेस आलाकमान जिसमें कि पर्यवेक्षक बनकर आए मल्लिकार्जुन खड़गे जो कि अब खुद हाईकमान की जगह है। कोई निर्णय नहीं कर पाए तो क्या आने वाले दिनों में पार्टी किसी तरह की बयानबाजी को लेकर कार्रवाई करने में सक्षम हो सकती है। यह सवाल कांग्रेसी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

राहुल गांधी के हाथ खड़े करवाने के बाद भी नहीं दिखी एकजुटता
संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल इन सब सवालों को टाल गए। लेकिन अशोक गहलोत और सचिन पायलट के हाथ एक साथ उठाकर यह संदेश दे गए कि देश राजस्थान कांग्रेस यह वैसा ही है। जैसा कि राहुल गांधी ने भी विद्याधर नगर स्टेडियम में किया था। लेकिन राहुल गांधी की ओर से हाथ उठाने के बावजूद पार्टी में एकजुटता नहीं दिखाई दी और अब भी सवाल यही है कि क्या सिर्फ हाथ उठाने से कांग्रेस एकजुट नजर आएगी। क्या मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की ओर से सचिन पायलट पर अब तक चलाए गए कड़वे शब्दबाण भुला दिए जाएंगे। इन सब सवालों के बीच अब देखना यह है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा राजस्थान से गुजरने के बाद कांग्रेस में क्या बदलाव होता है।












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