Rajasthan में गहलोत सरकार के 6 नए जिलों की घोषणा की चर्चा, जानिए पूरा सच
राजस्थान में सोमवार को प्रदेशभर में गहलोत सरकार द्वारा छह नए जिले बनाने की घोषणा की चर्चा रही। गहलोत सरकार बजट सत्र के दौरान नए जिलों की घोषणा कर सकती हैं।

Rajasthan में सोमवार को सोशल मीडिया पर छह नए जिले बनाए जाने की चर्चा रही। प्रदेश में डीडवाना, बालोतरा, भिवाड़ी, कोटपूतली, फलौदी और ब्यावर को जिला बनाए जाने की खबर चलती रही। प्रदेशभर में इस बात की चर्चा रही कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 6 नए जिलों की घोषणा की है। आपको बता दें पिछले कई महीनों से राजस्थान में नए जिले बनाने की मांग जोर पकड़ रही है। लेकिन सरकार ने अभी तक इस तरह की कोई घोषणा नहीं की है। संभवतया बजट सत्र के दौरान सरकार प्रदेश में नए जिलों की घोषणा कर सकती है।

गहलोत सरकार इन शहरों को बना सकती है जिला
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत रामलुभाया कमेटी की रिपोर्ट और सिफारिशों पर मुहर लगाते हुए बजट सत्र के दौरान प्रदेश में 5 से 6 जिलों की घोषणा कर सकते हैं। राम लुभाया कमेटी तेजी से अपनी रिपोर्ट पर काम कर रही है। राजस्थान में कोटपूतली, बालोतरा, फलौदी, डीडवाना, ब्यावर और भिवाड़ी नए जिले बनने की रेस में सबसे आगे है। माना जा रहा है कि गहलोत सरकार बजट सत्र के दौरान इस पर अंतिम मुहर लगा सकती है।

राजस्थान में 2008 के बाद नहीं बना कोई जिला
राजस्थान में पिछले 14 साल में कोई नया जिला नहीं बनाया गया है। वसुंधरा राजे की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार ने 26 जनवरी 2008 को प्रतापगढ़ को जिला बनाया था। इसके बाद से राजस्थान में कोई नया जिला नहीं बनाया गया है। तत्कालीन भाजपा सरकार ने 2014 में आईएस परमेश चंद की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी। कमेटी ने 2018 में सरकार को रिपोर्ट भी भेजी थी। लेकिन कोई नया जिला बनाने की घोषणा नहीं की गई। गहलोत सरकार ने परमेश चंद की कमेटी की सौंपी गई। इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए नए सिरे से रिपोर्ट तैयार करने के लिए रामलुभाया कमेटी का गठन किया।

रामलुभाया कमेटी कर रही है तेजी से रिपोर्ट तैयार
राजस्थान में नए जिलों के गठन को लेकर रामलुभाया कमेटी तेजी से रिपोर्ट तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट सत्र के दौरान नए जिलों के गठन को लेकर हाई पावर कमेटी बनाने की घोषणा की थी। 17 मार्च को रामलुभाया की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई थी। इस कमेटी को 6 महीने में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी थी। सितंबर में कमेटी का कार्यकाल पूरा हो गया था। लेकिन इसे मार्च 2023 तक के लिए बढ़ा दिया गया। कमेटी मार्च से पहले सरकार को अपनी रिपोर्ट देने की तैयारी में है।












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