Rajasthan में ओबीसी आरक्षण नियमों में संशोधन पर बढ़ रही तकरार, जानिए पूरी वजह

Rajasthan में ओबीसी आरक्षण नियमों में संशोधन के मामले में विवाद बढ़ता जा रहा है। पूर्व सैनिकों से जुड़े आरक्षण नियमों में संशोधन के खिलाफ और समर्थन में सरकार के मंत्री विधायक आमने-सामने हो रहे हैं। इस बीच पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने भी मुख्यमंत्री से जल्द समाधान निकालने की मांग रखी है। वही मंत्री हेमाराम चौधरी, विधायक गिरधारी लाल माहिया, अमीन कागजी, सांसद हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री पर वादाखिलाफी के आरोप लगाते हुए 17 अप्रैल 2018 के नियमों में संशोधन की मांग रखी है। इधर नियमों में संशोधन के खिलाफ बोलते हुए सैनिक कल्याण मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने कहा कि सरकार की ईट से ईट बजा देंगे। लेकिन ऐसा कभी नहीं होने देंगे।

जनप्रतिनिधियों की बात सुनकर मामला सुलझाए सरकार

जनप्रतिनिधियों की बात सुनकर मामला सुलझाए सरकार

सचिन पायलट ने ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामले को लेकर कहा कि सरकार को जनप्रतिनिधियों की बात सुनकर मामला सुलझाना चाहिए। जो भी संविधान के प्रावधान है। उसके तहत सुधार करना चाहिए। बिना कानूनी पेंच में फंसे इसका रास्ता निकलना चाहिए। पायलट ने कहा कि युवाओं को सरकारों से बड़ी उम्मीद होती है और जब उनके सपने पूरे नहीं होते तो स्थिति खराब होती है। आरक्षण के मामले में अगर कोई कानूनी उलझन नहीं है तो उसे पूरा करने के लिए सरकार को प्रयास करने चाहिए।

 क्या है ओबीसी आरक्षण से जुड़ा पूरा मामला

क्या है ओबीसी आरक्षण से जुड़ा पूरा मामला

पूर्व मंत्री हरीश चौधरी का कहना है कि सरकारी नौकरियों में ओबीसी वर्ग को 21 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त है। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने 17 अगस्त 2018 को एक नया नियम जोड़ा इस नियम के तहत पूर्व सैनिकों को 12.5 फीसदी होरिजेंटल आरक्षण दिया गया। इस नियम की वजह से ओबीसी के अभ्यर्थियों के पदों पर पूर्व सैनिकों का कब्जा होने लगा है। ऐसे में ओबीसी वर्ग के मूल अभ्यर्थी सरकारी नौकरियों में चयनित होने से वंचित हो रहे हैं। इस मामले को लेकर पूर्व सैनिकों ने हरीश चौधरी के खिलाफ मोर्चा खोला है।

संशोधन कर सरकार करे पदों की भरपाई

संशोधन कर सरकार करे पदों की भरपाई

पूर्व मंत्री हरीश चौधरी के समर्थन में वन एवं पर्यावरण मंत्री हेमाराम चौधरी ने मुख्यमंत्री से ओबीसी आरक्षण नियमों में विसंगतियों को दूर करने का निवेदन करते हुए कहा कि ओबीसी वर्ग की सरकारी सेवाओं में भर्ती में उत्पन्न होने वाली समस्या का शीघ्र निर्णय किया जाना चाहिए। साथ ही इस विसंगति के कारण ओबीसी वर्ग को हुए नुकसान की भरपाई वर्तमान में प्रक्रियाधीन सभी भर्तियों में अतिरिक्त पद सृजित कर पूर्ति की जाए। इस विसंगति के कारण ओबीसी वर्ग में भारी असंतोष है। जिसे दूर करना जरूरी है।

48 घंटे का वादा था, 45 दिन बाद भी समाधान नहीं

48 घंटे का वादा था, 45 दिन बाद भी समाधान नहीं

नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामले का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार ने 48 घंटे में नियमों में संशोधन का वादा किया था। लेकिन 45 दिन बीत जाने के बाद भी समाधान नहीं निकाला है। राज्य सरकार इस मामले में गंभीर होकर ओबीसी वर्ग के आंदोलित युवाओं के साथ न्याय दें। विधायक गिरधारी लाल माहिया ने कहा कि अति शीघ्र इस विसंगति का निस्तारण कर ओबीसी युवाओं को उनका हाथ दें। अन्यथा समस्त ओबीसी वर्ग सरकार के खिलाफत करने से परहेज नहीं करेगा।

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