बीएसएफ तैनात करेगा भारत पाक बॉर्डर पर विश्व का पहला महिला ऊंट सवार दस्ता, जानिए कैसे करेंगी सीमाओं की चौकसी

जयपुर, 15 सितंबर। भारत पाक बॉर्डर पर रेतीले धोरों के बीच ऊंटों पर सवार बीएसएफ की नारी शक्ति नजर आएगी। प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच ऊंट की लगाम थामें महिला प्रहरी बॉर्डर की चौकसी करेंगी। इसके लिए बकायदा महिलाओं को ऊंट को नियंत्रित करने का प्रशिक्षण दिया गया है। बीएसएफ ने महिला ऊंट सवार का एक दस्ता तैयार किया है। इसमें शामिल 30 महिलाओं को एक दिसंबर को बीएसएफ के स्थापना दिवस के मौके पर सार्वजनिक किया जाएगा। इसके बाद यह दस्ता राजस्थान और गुजरात से सटी भारत पाक सीमा निगरानी करेगा।

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सीमा पर पुरुषों के साथ तैनात है महिला प्रहरी

सीमा पर पुरुषों के साथ तैनात है महिला प्रहरी

पिछले कुछ सालों में महिलाओं ने भी सीमा सुरक्षा बलों में जाने में रुचि दिखाई है। इसी का नतीजा है कि महिलाएं पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सीमा पर मुस्तैद है। बीएसएफ सीमा सुरक्षा में दस्ते के रूप में पहली बार महिला कार्मिकों को शामिल करने का नवाचार कर रहा है। इसकी जिम्मेदारी बीकानेर के डीआईजी बीएसएफ पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ को सौंपी गई है। यह विश्व में अपनी तरह का इकलौता महिला जवानों का दस्ता होगा।

कुशल प्रशिक्षकों की निगरानी में तैयारी

कुशल प्रशिक्षकों की निगरानी में तैयारी

ऊंट सवार महिला जवानों की इस दस्ते की तैयारी कुशल प्रशिक्षकों की निगरानी में की गई है। इसके लिए सबसे पहले महिला जवानों को मनोवैज्ञानिक तौर पर तैयार किया गया है। इन महिला जवानों को ऊंट की सवारी का गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिससे ये रेगिस्तान में ऊंट की सवारी कर सीमा की सुरक्षा कर सके।

बीएसएफ स्थापना दिवस पर होगा सार्वजनिक

बीएसएफ स्थापना दिवस पर होगा सार्वजनिक

सीमा की सुरक्षा करने के लिए महिला प्रहरी दस्ते ने पूर्ण रूप से प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया है। बीएसएफ स्थापना दिवस समारोह के दौरान 1 दिसंबर को होने वाली परेड में इसे जनता के सामने सार्वजनिक किया जाएगा। इसमें बताया जाएगा कि यह दस्ता कैसे सीमाओं की सुरक्षा करेगा।

14 साल पहले हुई थी महिला प्रहरी की तैनाती

14 साल पहले हुई थी महिला प्रहरी की तैनाती

बीएसएफ में 14 साल पहले 2008 में पहली बार महिला प्रहरी की ड्यूटी लगाई गई थी। राजस्थान में श्रीगंगानगर में सबसे पहले सीमा पर बीएसएफ की महिला प्रहरियों को तैनात किया गया था। इन्हें तारबंदी और जीरो लाइन के बीच कृषि कार्य के लिए जाने वाली महिलाओं की तलाशी का काम दिया गया था। साल 2012 के बाद बीएसएफ में बड़ी संख्या में महिला परियों की भर्ती की गई।

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