Rajasthan News: राजस्थान की भजन लाल सरकार ने बदल दिया इंदिरा रसोई का नाम, अब ‘श्री अन्नपूर्णा'
Rajasthan News: सरकार बदलते ही पहले वाली सरकार की योजनाओं के नाम बदलने की बात कोई नहीं है। ऐसा ही इन दिनों राजस्थान की नई नवेली भजन लाल शर्मा सरकार कर रही है।
भजन लाल शर्मा सरकार ने राजस्थान में चल रही इंदिरा रसोई का नाम बदल लिया है। नया नाम अब'श्री अन्नपूर्णा' रसोई होगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को भाजपा कार्यालय में आयोजित बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने योजना का नाम बदलने की घोषणा की।

खबर है कि अब राजस्थान की नई सरकार इंदिरा गांधी क्रेडिट कार्ड योजना और इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना का नाम भी बदलने की तैयारी है। स्वायत्त शासन विभाग ने इन योजनाओं से जुड़ी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी है। सरकार ने विभाग से अब यह पूछा है कि क्या इनका संचालन मौजूदा स्वरूप में ही ठीक है या इसमें बदलाव की जरूरत है। इस आधार पर अफसर होमवर्क कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान में वसुंधरा राजे सरकार के समय से अन्नपूर्णा रसोई संचालित हो रही थी, जिसके लोगों को नाममात्र रुपए में भरपेट भोजन करवाया जा रहा था, लेकिन पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने 20 अगस्त, 2020 को इंदिरा रसोई शुरू की। अब भाजपा सरकार ने इंदिरा रसोई का नाम बदलकर श्रीअन्नपूर्णा रसोई कर दिया।
बता दें कि अभी तक प्रति थाली में भोजन की मात्रा 450 ग्राम दिया जा रहा है। अब इसे बढ़ाकर 600 ग्राम किया जाएगा। इसमें मोटा अनाज भी शामिल किया जाएगा। प्रदेश के शहरों में 1000 इंदिरा रसोई संचालित हैं, जहां 8 रुपए में भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इनके अलावा ग्रामीण इलाकों में भी रसोई चल रही है।
इनका नाम भी बदलने की चर्चा
राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने स्कूल व कॉलेज शिक्षा छात्रवृत्ति योजनाएं राजीव और इंदिरा गांधी के नाम पर की। जबकि वसुंधरा सरकार में ये योजनाएं पं. दीनदयाल उपाध्याय व अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर संचालित थी। भजन लाल शर्मा सरकार अब पहले की सरकार की योजनाओं का नाम बदल सकती है।
बता दें कि इंदिरा गांधी शहरी क्रेडिट कार्ड योजना के तहत थड़ी ठेला व्यवसायी, असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, जिला रोजगार कार्यालय में रजिस्टर्ड ऐसे बेरोजगार युवा जो बेरोजगारी भत्ता नहीं लेते हैं, उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने या मौजूदा व्यवसाय को सुदृढ़ करने के लिए लोन देने का प्रावधान है। इसमें 5 लाख लोगों को स्थानीय निकाय के जरिए लोन उपलब्ध कराया जाता है। करीब 3 लाख लोग इससे जुड़े हैं।












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