कांग्रेस को मिलेगा 13वां नेता जो गैर नेहरू गांधी परिवार का अध्यक्ष बनेगा, पार्टी में यह रहा है इतिहास
जयपुर, 22 सितंबर। देश के आजाद होने के बाद से लेकर अब तक कांग्रेस में गांधी नेहरू परिवार के पांच नेता अध्यक्ष रहे हैं। इनमें खुद जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी शामिल है। पिछले 30 सालों में कांग्रेस अध्यक्ष के लिए तीसरा चुनाव होने जा रहा है। 38 साल से गांधी नेहरू परिवार का कोई न कोई सदस्य इस पार्टी का अध्यक्ष रहा है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने यदि कोई उम्मीदवार खड़ा नहीं होता है तो गहलोत गैर नेहरू-गांधी परिवार से कांग्रेस के 13वें अध्यक्ष होंगे।
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आजादी के बाद 12 अध्यक्ष गैर नेहरू गांधी परिवार से
कांग्रेस में आजादी के बाद से अब तक 12 नेता ऐसे रहे हैं। जिन का नाता गांधी परिवार से नहीं था और वह पार्टी के अध्यक्ष बने। इनमें सबसे पहला नाम आचार्य कृपलानी का था। इसके बाद पट्टाभि सीतारमैया, पुरुषोत्तम दास टंडन, उछंगराय लवलगढ़ ढेबर, नीलम संजीव रेड्डी, के कामराज, एस निजलिंगप्पा, जगजीवन राम, शंकरदयाल शर्मा, देवकांत बरुआ, पीवी नरसिम्हा राव और सीताराम केसरी गैर गांधी परिवार से अध्यक्ष रहे हैं। इनमें से पीवी नरसिम्हा राव और के कामराज ने अपने कार्यकाल के दौरान पार्टी में कई बड़े बदलाव किए।

अध्यक्ष रहते हुए प्रधानमंत्री पद ठुकराया
कांग्रेस में 1960 के दशक में के कामराज यानी कुमारस्वामी कामराज पार्टी के अध्यक्ष बने। कांग्रेस में कामराज को किंगमेकर कहा जाता था। कामराज इंदिरा गांधी की कैबिनेट में शामिल थे। उन्होंने दो बार पार्टी के अध्यक्ष पद को संभाला। जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद लाल बहादुर शास्त्री और फिर इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनाया। सबसे खास बात यह है कि पार्टी के सभी नेताओं ने एक राय होकर के कामराज को देश का प्रधानमंत्री बनाने का फैसला किया था। बावजूद इसके उन्होंने अध्यक्ष पद पर रहते हुए दूसरे नेताओं को प्रधानमंत्री बनाया। यही वजह थी कि के कामराज की किंगमेकर के तौर पर पहचान बनी।

प्रधानमंत्री रहते पार्टी के अध्यक्ष बने नरसिम्हा राव
कांग्रेस में पीवी नरसिम्हा राव पहले गैर गांधी नेता थे। जो प्रधानमंत्री रहते हुए कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर भी रहे। 1993 में राजीव गांधी की हत्या के बाद राव प्रधानमंत्री बने थे। बतौर प्रधानमंत्री उन्हें देश की आर्थिक स्थिति की कायापलट ने के लिए जाना जाता है। उन्होंने देश में व्यापार के अवसर बढ़ाने के लिए विदेशी कंपनियों को देश में व्यापार करने का मौका दिया। नरसिम्हा राव ने देश की अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने का काम किया। राव ने विदेशी निवेश, पूंजी बाजार और घरेलू व्यापार के क्षेत्र में व्यापक काम किए थे।












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