अर्जुन प्रजापति नहीं रहे : राजस्थान के वो मूर्तिकार जो सामने बैठे व्यक्ति का 20 मिनट में तैयार कर देते थे 'क्लोन'
जयपुर। राजस्थान के सुप्रसिद्ध मूर्तिकार पद्मश्री अर्जुन प्रजापति नहीं रहे। 12 नवंबर 2020 को 64 साल की उम्र में अर्जुन प्रजापति का निधन हो गया। मौत की वजह कोरोना संक्रमण बताया जा रहा है। अर्जुन प्रजापति लंबे समय से बीमार थे। जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में इलाज चल रहा था, जहां गुरुवार को अंतिम सांस ली।

सीएम गहलोत समेत कइयों ने जताया शोक
राजस्थान की मूर्ति कला को नई ऊँचाइयां प्रदान करने वालों में अर्जुन प्रजापति सबसे आगे थे। इन्हें पद्मश्री सहित कई पुरस्कारों से नवाजा गया था। उन्होंने कई जानी मानी हस्तियों की मूर्तियां बनाईं। मूर्तिकला के क्षेत्र में उन्होंने देश विदेश में ख्याति प्राप्त की। राजस्थान सीएम अशोक गहलोत समेत कई लोगों ने ट्वीट कर अर्जुन प्रजापति के निधन पर शोक जताया है।

मूर्तिकार अर्जुन प्रजापति की जीवनी
अर्जुन प्रजापति मूलरूप से जयपुर के रहने वाले थे। बालचंद जी के घर 9 अप्रैल 1957 को उनका जन्म हुआ था। बचपन जयपुर के परम्परागत मूर्ति मोहल्ले खजाने वालों का रास्ते में बीता। अर्जुन प्रजापति को मार्बल, टेराकोटा, ब्रॉन्ज, प्लास्टर ऑफ पेरिस और फाइबर ग्लास से मूर्तियां बनाने में महारथ हासिल थी।

बणी-ठणी को दिलाई नई पहचान
राजस्थान परंपरागत मूर्ति कला ‘बणी-ठणी' को अर्जुन ने नया रूप प्रदान किया। उसके बाद यह कला ‛अर्जुन की बणी-ठणी' के नाम से जानी जाने लगी। अर्जुन ने इस मूर्ति कला से नारी के आकर्षक चेहरे और सुडौल शरीर में जिस सजीवता के साथ जान फूंकने की कारीगरी दिखलाई, वह कला समीक्षकों की नजर में इनकी कला साधना का उल्लेखनीय पहलू है।

20 मिनट में बना देते थे 'क्लोन'
अर्जुन भारत के पहले ऐसे मूर्तिकार हैं जो मात्र 20 मिनट में किसी को भी सामने बैठाकर उसका क्लोन तैयार कर देते थे। इसके चलते उन्हें ‘क्लोनिंग के महारथी' के खिताब से नवाजा गया। अर्जुन खेल, कला जगत और सिनेमा से जुड़ी हजारों हस्तियों सहित ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स, मॉरिशस के सर नवीन चन्द्र रामगुलाम, अभिनेत्री मनीषा कोइराला, उद्घोषक पद्मश्री जसदेव सिंह, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, पद्मश्री पण्डित विश्वमोहन भट्ट आदि के क्लोन बनाए।

यूएसए राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का क्लोन भी बनाया
अर्जुन ने अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन का क्लोन मात्र 20 मिनट में बनाकर दिखाया तो उन्होंने बदले में 20 मिनट तक माटी से सने अर्जुन के हाथों को अपने हाथों में थामे रखा था। उन्होंने पूछा कि अर्जुन इन उंगलियों में आखिर क्या खास है। इतना ही नहीं, बिल क्लिंटन ने अर्जुन को ‘मूर्तिकला का जादूगर' का खिताब देकर भी सम्मानित भी किया।

राजस्थान का पहला मूर्ति शिल्प संग्रहालय 'माटी मानस'
अर्जुन प्रजापति को वर्ष 2004-05 के दौरान ख्याल आया कि क्यों न एक ऐसी आर्ट गैलरी बनाई जाए, जिसमें देश और राज्य का श्रेष्ठतम कला शिल्प संजोया जा सके। वर्ष 2008 में ‘माटी मानस' नाम की इस आर्ट गैलरी की नींव पूर्व सीएम भैरोंसिह शेखावत के हाथों रखवाई गई। माटी मानस राजस्थान का पहला मूर्ति शिल्प संग्रहालय है।












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