छत्तीसगढ़: धर्मांतरण पर मंत्री लखमा का बयान, कांग्रेस सरकार में नहीं बना कोई आदिवासी ईसाई
कवासी लखमा ने अपने बयान में कहा कि बस्तर 12 विधानसभा सीटों और लोकसभा में बीजेपी सीट नहीं है। इसी कारण से बीजेपी के नेता आदमी से आदमी को लड़वा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के बस्तर में कथित तौर पर धर्मान्तरण के संबंध में राज्य सरकार के मंत्री कवासी लखमा बस्तर ने बड़ा बयान दिया है। लखमा ने कोंडागांव जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार बने 4 सालों हुए है , कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में एक भी आदिवासी ईसाई नहीं बना है। ये बीज बीजेपी के कार्यकाल में बोया हुआ है। 15 सालों तक राज्य में बीजेपी की सरकार थी। तब पूरे छत्तीसगढ़ में जमकर धर्मांतरण हुआ है।

लखमा ने साधा भाजपा पर निशाना
आदिवासी विधायक और छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री कवासी लखमा ने अपने बयान में कहा कि बस्तर 12 विधानसभा सीटों और लोकसभा में बीजेपी सीट नहीं है। इसी कारण से बीजेपी के नेता आदमी से आदमी को लड़वा रहे हैं। आदिवासियों भाइयों को आपस में लड़वा रहे हैं।
उन्होंने पूर्व मंत्री केदार कश्यप पर आरोप लगाते कहा कि, जब वह भाजपा की सरकार में मंत्री थे, तो उस वक़्त धर्मांतरण सबसे ज्यादा हुआ है। कवासी लखमा ने नारायणपुर की घटना का उल्लेख करते कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में एक भी आदिवासी ईसाई नहीं बना है। भाजपा सरकार के शासनकाल में चर्च बने हैं, हमारी सरकार देवगुड़ी बना रही हैं।

मूणत बोले,मंत्री झूठ बोल रहे हैं,लेकिन सरकार का अधिकृत बयान
इधर धर्मांतरण के मुद्दे पर लगातार मुखर भाजपा का कहना है कि कांग्रेस की सरकार आने के बाद आदिवासी इलाकों में धर्मांतरण के मामले बढे हैं। लखमा के बयान पर जवाब देते हुए भाजपा प्रवक्ता और पूर्व मंत्री राजेश मूणत ने ट्विट किया कि एक कैबिनेट मंत्री होकर आप झूठ कैसे बोल सकते हैं लखमा जी! आपका कथन भूपेश सरकार का अधिकृत बयान माना जायेगा। विषय की गंभीरता को समझिए,आप कांग्रेसी होने से पूर्व एक आदिवासी विधायक हैं।

यह है मामला
दरअसल बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले में 2 जनवरी को धर्मांतरण के मामले में कुछ आदिवासियों की भीड़ ने एक चर्च में तोड़फोड़ कर दी थी। भीड़ ने
पुलिस फ़ोर्स पर भी हमला कर दिया था,इस दौरान नारायणपुर एसपी सदानंद का सिर फूट गया था। बताया जा रहा है कि नारायणपुर, एड़का और निकटतम गांवों में ईसाई धर्म अपनाने पर हुए हमलों की वजह से गोर्रा गांव में 1 तारीख की रात्रि हुई मारपीट की घटना घटी थी। बताया जा रहा है कि गोंड़ बहुल गांव के 20 घरों के ग्रामीणों ने ईसाई धर्म अपना लिया है। वह आदिवासी रीति-रिवाजों का अपमान करते हैं। इसलिए विवाद हुआ है। इस घटना के बाद से प्रदेश में धर्मांतरण के मामले पर सियासत तेज़ है।

स्थिति है चिंताजनक
बताया जा रहा है कि ईसाई धर्म अपना चुके ग्रामीण पूर्व की तरह आदिवासी रीति-रिवाजों को नहीं मान रहे हैं। हालत यह है कि ईसाई बन चुके व्यक्ति के मृत हो जाने पर आदिवासी उन्हें गांव की भूमि में दफनाने नहीं दे रहे हैं। उनका मानना है कि ईसाई धर्म के शख्स की कब्र होने से जमीन अपवित्र हो जाएगी। वहीं ईसाई बन चुके आदिवासियों का कहना है कि नाराज आदिवासियों का समूह उनके लोगों की कब्र खोदकर शव को गांव के बाहर फेंके जा रहे हैं। इसी कारण आदिवासी गाँवो में आपसी संघर्ष बढ़ रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट भी चिंतित
इस बीच 9 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण को गंभीर मुद्दा मानते हुए कहा है कि इसे सियासी रंग नहीं दिया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने छलपूर्ण धर्मांतरण की रोकथाम के लिए केंद्र और राज्यों को सख्त कार्रवाई करने का निर्देश देने का आग्रह करने वाली याचिका पर, अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी की सहायता मांगी है।
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