Kanger Valley National Park: यहां 80 से अधिक प्रजाति की तितलियां बनाती है वादियों को रंगबिरंगा,आइये कभी बस्तर
छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग अपने कुदरती सौंदर्य के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। क्या आपको पता है कि यहां दुर्लभ जीव जंतुओं के साथ ही करीब 80 प्रजतियों की तितलियाँ भी पाई जाती हैं।
जगदलपुर, 10 सितंबर। छत्तीसगढ़ का बस्तर संभाग अपने कुदरती सौंदर्य के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। क्या आपको पता है कि यहां दुर्लभ जीव जंतुओं के साथ ही करीब 80 प्रजतियों की तितलियाँ भी पाई जाती हैं। यह वाकई में एक सुखद तथ्य है कि जब दुनिया से कई प्रकार के जीव विलुप्त होते जा रहे हैं,ऐसे में बस्तर के कांगेर वैली नेशनल पार्क में आज भी उनका वजूद कायम है। आइये आपको बताते हैं छत्तीसगढ़ में मौजूद खूबसूरत तितलियों की दुनिया के बारे में

बेहद ही सुंदर है कांगेर घाटी
कांगेर वैली में कई प्राकृतिक गुफाओं में कई प्रकार के जीव जंतु सुरक्षित हैं।यहां स्थित झरनों ,जंगलों ,पहाड़ों के अलावा इन दिनों पर्यटकों की पहली पसंद तितलियाँ हैं। यहां कुदरती तौर पर विकसित तितली पार्क में कई प्रजातियों की तितलियां पाई जाती है। बताया जाता है कि महज बस्तर के नेशनल पार्क में ही यह सुंदरता देखने मिलती है।

200 किलोमीटर में फैली है अनोखी दुनिया
दरअसल 200 किलोमीटर के इलाके में फैले कांगेर वैली नेशनल पार्क में कई कुदरती चीजों को देखा जा सकता है। इस राष्ट्रीय उद्यान में छत्तीसगढ़ का दूसरा बड़ा तितली पार्क मौजूद है, जिसे तितली जोन भी कहते हैं। कई प्रजतियों की रंग बिरंगी तितलियां पर्यटकों को बेहद आकर्षित करती हैं। विशेष बात यह है कि किसी खास मौसम में नहीं,बल्कि पूरे साल यहां विभिन्न प्रजातियों की रंग-बिरंगी तितलियों को देखा जा सकता है।

आप देख सकते हैं 80 प्रकार की तितलियां
कांगेर वैली के प्रसिद्ध तीरथगढ़ जलप्रपात की तरफ जाने वाले मार्ग से लगभग 2 किलोमीटर की पगडंडी वाले रास्ते से तय चयन स्थान से तितली जोन तक पहुंचा जा सकता है। पार्क के निदेशक के मुताबिक कांगेर वैली में तितली जोन की स्थापना के बाद से लगभग 80 प्रजातियों की तितलियों की पहचान की जा चुकी है। यहां एक विशेष स्थान पर तितलियां दिखाई देती है,जिसे तितली जोन कहते है।

बनाया गया है तितली ज़ोन
पार्क के डायरेक्टर ने बताया कि तितली जोन की स्थापना के बाद से करीब 80 प्रजातियों की पहचान पार्क प्रबंधन के द्वारा की गई है और समय-समय पर विभिन्न प्रजातियों के तितली भी यहां देखने को मिलती है, पार्क में आने वाले सैलानी इसे देख सके इसलिए एक विशेष जगह जहां तितलियां दिखाई देती है उसी स्थान को तितली जोन बनाया गया है. खासकर इस इलाके में ब्लू मोनमोन, ब्रांडेड पीकॉक, लाइन बटरफ्लाई, जेजीवेल राजा, कामन इवनिंग ब्राउन, ब्लू टाइगर, ब्लू पेनशील, पेटेंट लेडी, टाइगर तितली, कामन नवाब, जेट एग फ्लाई समेत हिमालयन वैगरेंट बटरफ्लाई भी देखने मिल जाती है,जो कि एक शोध का विषय है।

वन विभाग तैयार कर रहा है विशेष कार्यनीति
कांगेर वैली नेशनल पार्क से जुड़े अधिकारीयों का कहना है कि तितलियों के इस बसेरे को आकर्षित बनाने के अलावा इसके संरक्षण को लेकर प्रयास किये जा रहे हैं। आगामी वर्षों में और भी प्रजातियों की तितलियाँ दिखाई दें, इसके लिए वन विभाग भरपूर प्रयास कर रहा है। आसानी से यहां तितलियों के अलग-अलग प्रजाति पर्यटक देख सकें, इसके लिए विभाग पूरी कोशिश में लगा हुआ है। साथ ही इनके संरक्षण के लिए भी अलग-अलग टीम काम कर रही है।
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