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छत्तीसगढ़: कभी था नक्सली कमांडर, आज है पुलिस इंस्पेक्टर, सीएम भूपेश से मिली शाबाशी

बस्तर, 18 मई। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भेंट-मुलाकात अभियान के दूसरे चरण का आगाज कर दिया है। बुधवार को सीएम ने अपने प्रदेश स्तरीय जनसम्पर्क दौरे के तहत बस्तर संभाग के कोंटा विधानसभा क्षेत्र में लोगो से भेंट मुलाकात की । सीएम भूपेश बघेल ने कोंटा के नगर पंचायत परिसर में आम जनता से भेंट-मुलाकात कर शासकीय कार्यक्रमों और योजनाओं के क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी ली और उनकी समस्याएं सुनी। इस दौरान सीएम की मुलाकात एक पूर्व नक्सली कमांडर से हुई,जिसने सैलून पहले आत्मसमर्पण करके पुलिस में भर्ती पाई थी।

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अपने कोंटा प्रवास के दौरान सीएम भूपेश ने आम जनता और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर कोंटा जिले के दो उप तहसीलों जगरगुंडा एवं दोरनापाल को तहसील बनाए जाने की घोषणा की। इसके अलावा उन्होंने कोंटा ब्लाक के बंडागांव और जगरगुंडा में विद्युत सब स्टेशन की स्थापना, कोंटा के 30 बिस्तर वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (अस्पताल) को विस्तारित कर 50 बिस्तर करने, सामुुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ चिकित्सकों और स्टाफ के लिए क्वाटर, दुब्बाटोटा में खेल मैदान, छत्तीसगढ़ राज्य की अंतर्राज्यीय सीमा पर छत्तीसगढ़ प्रवेश द्वार और एर्राबोर में मिनी स्टेडियम का निर्माण कराए जाने की भी घोषणा की।


इस भेंट मुलाकत के दौरान कभी नक्सली संगठन में कमांडर रहे मड़कम मुदराज ने सीएम भूपेश बघेल को कोंटा में आयोजित भेंट-मुलाकात कार्यक्रम में अपनी आप बीती सुनाते हुए कहा कि मैं आपसे हाथ मिलकर तस्वीर खिंचवाना चाहता हूं। इस पर सीएम बड़ी आत्मीयता से मड़कम के कंधे पर हाथ रखा और हाथ भी मिलाया और पूर्व नक्सली के मुख्यधारा में लौटने पर सराहना करते हुए उनके लिए ताली भी बजवायी।अपनी इस मुलाकात को ट्वीटर पर जनता से साझा करते हुए सीएम भूपेश ने लिखा कि आज आपको मड़कम से मिलवाता हूँ। मड़कम के हाथों में बंदूक पहले भी थी और आज भी है। लेकिन अब फर्क सिर्फ इतना है कि पहले ग्रामीणों में इनका खौफ था और आज नक्सली इनके नाम से कांपते हैं। नक्सली कमांडर रहे मड़कम आज इंस्पेक्टर मड़कम हैं।

मड़कम ने सीएम भूपेश बघेल को बताया कि वह राह भटककर नक्सली संगठन में शामिल हो गए थे, लेकिन अपने ही भाई बन्धुओं का खून बहाने से आत्मग्लानि की वजह से उन्हें नींद नहीं आती थी,जिसके बाद एक दिन आत्मसमर्पण करने की ठान ली। आत्मसमर्पण के बाद वह एसपीओ बने, इसके बाद सिपाही, एएसआई, एसआई और अब डीआरजी में इन्स्पेक्टर हैं।

मड़कम का कहना हैं कि उनकी पत्नी भी उनके साथ नक्सली संगठन में काम करती थीं,तब वही उसको ट्रेनिंग देते थे, लेकिन दोनों ने मुख्यधारा में लौटकर अच्छा जीवन जीने का फैसला किया। मड़कम ने कहा कि आज वह उच्च पद पर पहुँच गए हैं ,सरकार से मिलने वाला वेतन भी अच्छा है । इस कारण बच्चों को बेहतर तरीके से पढ़ा पा रहे हैं।

सीएम भूपेश भूपेश बघेल इसके अलावा सुकमा के पुलिस लाइन ग्राउंड में भी गए ,जहां उन्होंने दुर्गा फाइटर्स बटालियन की महिला जवानों से मुलाकात की। इस दौरान दुर्गा फाइटर्स की प्रधान आरक्षक स्वाति दीप तिर्की ने सीएम भूपेश से कहा कि पहले वर्दी देख कर लोग भाग जाते थे, अब सुरक्षाबलों के कैम्प स्थापित करने में ग्रामीण सहयोग कर रहे हैं। पहले नक्सलियों ने लोगों की मानसिकता बनाई थी कि पुलिस वाले प्रताड़ित करते हैं, किन्तु अब कैम्प्स बनने से पुलिसबल और आमजन रूबरू हो रहे हैं। अब लोगों के बीच सुरक्षाबलों की छवि बदल रही है।

सीएम भूपेश ने कहा कि सबसे बड़ा परिवर्तन यह है कि अब वर्दी के प्रति लोगों में भय नहीं, लोग समझ रहे कि ये हमारी सुरक्षा के लिए हैं। जो सड़क बन रही है, वह हमारे लिए बन रही है। जो कैम्प बन रहे हैं, वह हमारे लिए बन रहे हैं।

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