MP News: जबलपुर समेत नर्मदा बेल्ट में और आ सकता है भूकंप, कंपन होने की ये है वजह

(MP News) भूकंप की दृष्टि से मप्र का जबलपुर देश के 38 संवेदनशील शहरों में शामिल है। जब भी इस शहर या इसके पड़ोसी जिलों में भूकंप के वजह से धरती कांपी, उसने यहां 1997 में आए विनाशकारी भूकंप की यादें ताजा कर दी। इस शहर में महसूस हुए कंपन की तीव्रता 3.9 मैग्नीटयूट बताई गई है। भोपाल के वरिष्ठ भू-गर्भ विज्ञानी वेदप्रकाश ने इसकी कई वजहे बताई है। उनका कहना है कि इस तरह की हलचल हलके झटकों के साथ आने वाले दिनों में दिसंबर तक भी हो सकती हैं।

लोग सोकर उठे थे, अचानक डोली धरती

लोग सोकर उठे थे, अचानक डोली धरती

नबंवर महीने की पहली तारीख ने मप्र के जबलपुर समेत पड़ोसी आधा दर्जन जिलों की धरती अचानक कांप उठी। जिससे लोग घरों से बाहर की तरफ भागे और भूकंप के कंपन का पता चला। नेशनल सेंटर फॉर सीसमोलॉजी के रिक्टर स्केल पर भी भूकंप दर्ज हुआ, जिसकी जबलपुर में तीव्रता 3.9 और पड़ोसी जिले डिंडोरी जहां भूकंप के केंद्र था 4.3 मैग्नीटयूट दर्ज हुई। यह कंपन लगभग 10 से 15 सेकण्ड तक लोगों ने महसूस किया। थोड़ी ही देर में एक दूसरे से लोगों को भूकंप के बारे में जानकारी मिलती गई।

स्कूलों के बच्चों को ग्राउंड में निकाला गया

स्कूलों के बच्चों को ग्राउंड में निकाला गया

भूकंप वेधशाला से मिली जानकारी के मुताबिक भूकंप के झटके सुबह 9 बजकर 43 मिनट पर दर्ज हुए है। सुबह की पाली में स्कूल पहुंचे बच्चों को सुरक्षा के मद्देनजर क्लास से बाहर निकाला गया। कई स्कूलों में तो छुट्टी करने की भी खबर है। वही कुछ अभिभावक भी अपने बच्चों को स्कूल लेने पहुंच गए। भूकंप से अनजान छोटे बच्चे भी अचानक हैरान हुए कि उन्हें क्लास से स्कूल के खुले ग्राउंड में क्यों ले जाया गया?

धारवाड़ और कैल्शियम कार्बोनेट की चट्टानें

धारवाड़ और कैल्शियम कार्बोनेट की चट्टानें

भोपाल के वरिष्ठ भू-गर्भ विज्ञानी वेदप्रकाश के मुताबिक जबलपुर और उसके आसपास के जिले नर्मदा बेल्ट से घिरे है। यहां धारवाड़ और कैल्शियम कार्बोनेट की चट्टानें बहुत है। भेड़ाघाट धुँआधार वॉटरफॉल विभ्रंश घाटी क्षेत्र में आता है, इस वजह से भूकंप की दृष्टि से जबलपुर अतिसंवेदनशील है। इन चट्टानों में घर्षण या जमीन में गए पानी की वजह से रासायनिक क्रिया होने की वजह से सतह धंसती है। जिससे कंपन महसूस होता है।

जहां विभ्रंश घाटियां वहां आता है भूकंप

वेदप्रकाश का कहना है कि नर्मदा बेसिन से घिरे एरिया विभ्रंश घाटियों के इर्दगिर्द ही है। मप्र में नर्मदा के उद्गम स्थल से लेकर धार खरगोन तक का क्षेत्र भूगर्भीय हलचल के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यही वजह है कि हाल ही में आए इस भूकंप की वजह से जबलपुर समेत आसपास के लगभग आधा दर्जन जिले प्रभावित हुए। छत्तीसगढ़ का बिलासपुर जिला भी अमरकंटक के नजदीक है। वेदप्रकाश का कहना है कि जहां भी विभ्रंश घाटी का क्षेत्र होता है, वहां सबसे ज्यादा भूकंप आने की संभावना बनी रहती है।

और भी आ सकते है हल्के झटके

और भी आ सकते है हल्के झटके

भूगर्भ विज्ञानी के मुताबिक 4.3 तीव्रता के आए भूकंप के बाद और भी झटके आ सकते है। भूकंप की कोई भविष्यवाणी तो संभव नहीं है, लेकिन भौगोलिक स्थितियों के हिसाब संभावना जरुर व्यक्त की जा सकती है। जबलपुर और उसके आसपास के क्षेत्र भू-गर्भीय परिस्थिति में एक बार भूकंप आने की दशा में उसके बाद आफ्टरशॉक् भी आते है। जमीन अपना संतुलन बनाती है और उसके अन्दर की प्लेट खिसकती है। जबलपुर में 6.2 रिक्टर तीव्रता का भूकंप 1997 में महसूस किया गया था। जिसमें जमकर तबाही मची थी।

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