Jabalpur सांसद राकेश सिंह पर बीजेपी ने क्यों लगाया दांव? जानिए पश्चिम विधानसभा सीट में कांटे की टक्कर
Jabalpur News: हर ऐसे मौके पर जब पब्लिक के मन में सस्पेंस बढ़ता जाता हैं, उस बीच बीजेपी बड़ा सरप्राइज देती आ रही हैं। मोदी-शाह की जोड़ी के मौजूदा डेढ़ दशक में तो अभ्यस्त भी हो गई। जिसकी बानगी एमपी विधानसभा चुनाव प्रत्याशियों की सेकंड लिस्ट में भी देखने को मिली।
तीन केन्द्रीय मंत्रियों और चार सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारकर कांग्रेस के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी हैं। बात महाकौशल की राजनीति के केंद्र बिंदु जबलपुर की करें तो बीते चुनाव के बाद कांग्रेस की ताकतवर पश्चिम सीट के लिए ही बीजेपी ने राकेश सिंह को चुना।

राकेश सिंह ही क्यों? इस नाम के विश्लेषण के तरीके कई हो सकते हैं। लेकिन बड़ी वजह बीजेपी का जबलपुर की पश्चिम सीट पर सर्वें, मौजूदा कांग्रेस विधायक की सियासी ताकत और यहां दावेदारों की लंबी फेहरिस्त बताई जा रही हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा एंड केन्द्रीय चुनाव समिति की टीम के द्वारा राकेश सिंह के नाम पर लगी मुहर ने भी सभी को चौंका दिया हैं। हालांकि टिकट घोषणा के बाद जबलपुर के लोगों की बॉडी लैंग्वेज पार्टी के इस फैसले को बड़ा सरप्राइज नहीं मान रही हैं। क्योकि पहली लिस्ट जारी होने के पहले सियासी पंडित इस बात भविष्यवाणी करते रहे है कि इस बार राकेश सिंह को विधानसभा चुनाव में उतारा जा सकता हैं। बरगी विधानसभा क्षेत्र से चर्चा जोरों पर रही हैं। लेकिन यहां युवा चेहरे के तौर पर पूर्व विधायक प्रतिभा सिंह के बेटे नीरज सिंह पर ज्यादा भरोसा जताया गया।
राकेश सिंह के साथ लगातार चार बार लोकसभा चुनाव जीत की ताकत तो है ही, साथ वह युवा मोर्चा , प्रदेश महामंत्री समेत बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रह चुकें हैं। एक के बाद एक लोकसभा चुनाव में जीत के साथ बढ़ा हुआ कद भी बड़ी वजह है। ये अलग बात है कि पश्चिम विधानसभा सीट में ऊंट किस करवट बैठता हैं? क्योकि कांग्रेस से लगातार दो बार विधायक और एक बार वित्त मंत्री रह चुके तरुण भनोत का टिकट भी पक्का माना जा रहा हैं। इस सीट पर बीते 15 सालों में कांग्रेस का जनाधार दोगुना हुआ हैं। एक तरह से यह क्षेत्र धर्मनिरपेक्ष माना जाता हैं।
नगरीय निकाय चुनाव में भी भनोत की सरपरस्ती में ही इस सीट में आने वाले वार्डों में जीत-हार हुई। कांग्रेसी पार्षदों की संख्या बीजेपी के मुकाबले ज्यादा हैं। दूसरी ताकत नगर निगम का महापौर कांग्रेस का ही हैं। जो इसी विधानसभा क्षेत्र से आते हैं। तरुण भनोत के बेहद करीबी माने जाते हैं। ऐसे में अब मुकाबला बेहद रोचक होने की उम्मीद हैं। बीजेपी ने इसी उम्मीद के साथ राकेश सिंह पर दांव लगाया कि वह अपनी खोई हुई जमीन वापस ले सकें। उन गलतियों को वह नहीं दोहराना चाहती, जिनकी बदौलत पिछले चुनाव में मात मिली थी।
राकेश सिंह की राजनैतिक गतिविधियां
• 1978-1979: साईंस कॉलेज में बी.एस.सी. प्रथम वर्ष में महाविद्यालय की कार्यकारिणी के सदस्य निर्वाचित।
• 1979-1980: साईंस कॉजेल में विश्वविद्यालय प्रतिनिधि ।
• 1994-1995: जबलपुर टिम्बर मर्चेन्ट्स एण्ड सॉ मिल ओनर्स एसोसिएशन की कार्यकारिणी में सर्वाधिक मतों से निर्वाचित सदस्य।
• 1994: विधान सभा चुनाव में बरगी विधानसभा क्षेत्र के भारतीय जनता पार्टी के चुनाव संचालक ।
• 1999: विधान सभा चुनाव में बरगी विधानसभा क्षेत्र के भारतीय जनता पार्टी के चुनाव संचालक।
• 2001: जिलाध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी, जिला जबलपुर (ग्रामीण) पद पर नियुक्त ।












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