Jabalpur News: ट्रैफिक सुधारने करोड़ों खर्च, ई-चालान का जुर्माना वसूलने विभाग को आया पसीना, लाखों रुपए बकाया
जबलपुर में ट्रैफिक सुधारने आइटीएमएस हाईटेक व्यवस्था सफ़ेद हाथी साबित हो रही है। हजारों वाहन चालकों का जुर्माना सालों से बकाया है। आलम यह है कि वाहन चालक कहां रह रहे है, यह भी नहीं पता।

Traffic department:करोड़ों रुपए की लागत से जबलपुर में आइटीएमएस यानी इंट्रीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए चौराहों को लैस किया। बेढंगे ट्रैफिक को सुधारने और यातयात नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले वाहन चालकों को ई-चालान भेजे जा रहे हैं। लेकिन इस हाई टेक व्यवस्था पर भी पानी फिरता नजर आ रहा हैं। 2 लाख 70 हजार ऐसे वाहन चालक है जिन्होंने जिनका लाखों रुपए का जुर्माना अभी तक भरा नहीं गया। इसमें बड़ी वजह गलत नाम पते की सामने आई है।

ट्रैफिक रूल्स की धज्जियां उड़ाने जबलपुर के चार लाख वाहन चालकों को पुलिस ने इंट्रीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के जरिये ई-चालान भेजे थे। जिसमें से महज एक लाख 30 हजार वाहन चालकों ने फाइन भरने की जहमत उठाई। लगभग 2 लाख 70 हजार वाहन चालकों ने जुर्माना नहीं भरा। करीब 25 प्रतिशत ऐसे वाहन चालक रोजाना ट्रैफिक रुल का उल्लंघन करते पाए गए। दर्जन भर से ज्यादा बार ऐसे दोषियों को चालान भेजे गए, लेकिन जुर्माना भरने का वाहन चालक नाम नहीं ले रहे।
पता चला है कि ये चालान वाहन चालकों के पास तक पहुंच ही नहीं पा रहे। दिए गए नाम पता गलत आ रहे है। ऐसे में करोड़ों रुपए की लागत से तैयार हाई टेक सिस्टम की भी हवा निकलती जा रही हैं। शहर के प्रमुख 12 चौराहों पर अकेले नगर निगम ने 16 करोड़ रुपये खर्च किए है । इन चौराहों को आइटीएमएस से लैस किया है। ताकि बिगड़ैल यातायात व्यवस्थित हो और वाहन चालक नियमों का पालन करें। अधिकारियों की दलील है कि ई-चालन भेजने पर अधिकांश के नाम-पते गलत है। आरटीओ में भी यही हाल है। तीन सवारी बैठाने, हेलमेट न लगाने, रेड सिग्नल जंप करने पर वाहन चालकों के नंबर प्लेट कैमरे में कैद होती है। उसी के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। लेकिन ई चालान का जब कोई जुर्माना ही नहीं भरेगा तो योजना किस काम की।












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