Rambhadracharya: जातिवाद की जड़ आरक्षण! जबलपुर में स्वामी रामभद्राचार्य के बेवाक बोल, VIP कल्चर पर उठाए सवाल
तुलसीपीठाधीश्वर पदम विभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य एमपी के जबलपुर पहुंचे। यहां उन्होंने संवेदनशील मुद्दों पर बेबाकी से बयान दिए। भारत के विभाजन के लिए पंडित नेहरु को जिम्मेदार मानते हुए तीखी टिप्पणी की।

Swami Rambhadracharya said Reservation is root of casteism: तुलसीपीठाधीश्वर पदम विभूषण जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य का कहना है कि समरसता वचन से नही मन से होती है, यदि हम मन से समरस बन जाये तो समरसता अपने आप आ जायेगी। भगवान श्रीराम ने समरसता को पहले मन मे उतारा और फिर उसका वचन निभाया।

जबलपुर में स्वामी रामभद्राचार्य महाराज समरसता सेवा संगठन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्होंने भारत शब्द की व्याख्या की। बोले कि भ से भगवान आ का अर्थ आदर और रत का अर्थ प्रेम है। जिस देश मे भगवान राम का आदर और प्रेम है, उसका नाम भारत है।

रामभद्राचार्य कहा भारत मे समरसता प्रारम्भ से है, विरसता कुर्सी के लालची नेताओं ने किया। हमारे यहां जाति और वर्ण थे लेकिन जातिवाद नही था। आजादी के बाद यदि जाति के आधार पर आरक्षण नही होता, तो जातिवाद कभी नही आता।

उन्होंने कहा कि भारत से जब तक वीआईपी की परंपरा नही जाएगी, तब तक भारत समर्थ भारत नही बन सकता। जहां गिद्ध को और कुत्ते को भी न्याय मिलता हो यह हमारा भारत था और आज एक मुकदमा चालीस से पचास वर्ष तक चलते है। अयोध्या का मंदिर उदहारण है।

रामभद्राचार्य ने कहा कि हम अखंड भारत चाह रहे थे लेकिन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षा ने देश का बंटवारा मजहब के आधार पर करा दिया। किसी भी धर्म को मानने वाले रघुवर और यदुवर के होकर रहना है तो रह लो किन्तु बाबर का होकर नही रह सकते।

आगे कहा कि समरसता तब होगी, जब शासक के प्रति जनता निर्भीक हो जाएगी। भगवान राम के काल मे हर प्राणी निर्भीक था। भगवान ने कहा था कि यदि मैं नीति के विरुद्ध बोलूं तो मुझे रोक देना। जब तक डर बना रहेगा तब तक न देश समरस बनेगा न ही समर्थ बनेगा। इस दौरान आयोजकों ने सभी समाज के आराध्य की जयंती को सामजिक समरसता के माध्यम से मनाने का संकल्प भी लिया।
ये भी पढ़े- Video: स्वामी रामभद्राचार्य ने बताई हनुमान चालीसा की 4 अशुद्धियां, जानिए कहां-कहां होती है गलतियां












Click it and Unblock the Notifications