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Video: स्वामी रामभद्राचार्य ने बताई हनुमान चालीसा की 4 अशुद्धियां, जानिए कहां-कहां होती है गलतियां

Hanuman Chalisa mistake: स्वामी रामभद्राचार्य ने हनुमान चालीसा में 4 गलतियां बताई है। उन्होंने कहा कि छपाई की वजह से लोग इनका गलत उच्चारण कर रहे हैं।

Jagadguru Rambhadracharya

बजरंग बली के भक्त हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए चालीसा का पाठ करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से भक्तों के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है, लेकिन तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने हाल ही में दावा किया है कि हनुमान चालीसा की कई चौपाईयों में अशुद्धियां है, जिनको ठीक किया जाना चाहिए।

हनुमान चालीसा की चौपाइयों में गलती!

श्री चित्रकूट तुलसीपीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि हनुमान चालीसा का पाठ गलत किया जा रहा है। इसी के साथ चालीसा की जिन चौपाइयों में गलतियां हैं। उनके बारे में भी बताया।

छपाई की वजह से लोग कर रहे गलत उच्चारण

जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी के मुताबिक चालीसा की छपाई की वजह से लोगों शब्दों का गलत उच्चारण कर रहे हैं। उन्होंने चालीसा की चार अशुद्धियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि चौथी, 27वीं, 32वीं और 38वीं में गलत छपा हुआ है, जिसे अब ठीक कर लिया जाना चाहिए।

'शंकर स्वयं केसरी नंदन'

स्वामी जी का एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा कि हनुमान चालीसा की एक चौपाई है- 'शंकर सुमन केसरी नंदन...' जो बोला जा रहा है। उसमें हनुमान को शंकर का पुत्र बोला जा रहा है, जो कि गलत है। शंकर स्वयं ही हनुमान हैं, इसलिए 'शंकर स्वयं केसरी नंदन' बोला जाना चाहिए।

'सब पर राम राज सिर ताजा'

ऐसे ही उन्होंने आगे 27वीं चौपाई में बताया कि चालीसा में 'सब पर राम तपस्वी राजा', बोला जा रहा है जो कि गलत है। उन्होंने बताया कि तपस्वी राजा नहीं है... सही शब्द 'सब पर राम राज सिर ताजा' है।

'सादर रहो रघुपति के दासा'

आगे कहा कि चालीसा की 32वीं चौपाई में 'राम रसायन तुम्हारे पास आ सदा रहो रघुवर के दासा...' यह नहीं होना चाहिए, इसको बोला जाना चाहिए- '... सादर रहो रघुपति के दासा'।

वहीं उन्होंने चालीसा की अंतिम त्रुटी के बारे में बताते हुए कहा कि 38वीं चौपाई में लिखा है- 'जो सत बार पाठ कर कोई...' जबकि होना चाहिए- 'यह सत बार पाठ कर जोही...'।

कौन हैं जगद्गुरु रामभद्राचार्य?

आपको बता दें कि पद्मविभूषण से भी सम्मानित जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी का जन्म उत्तर प्रदेश के जौनपुर में 1950 को मकर संक्राति के दिन में हुआ था। उनकी 3 साल की उम्र में ही आंखों की रोशनी चली गई थी। महज 8 साल की छोटी सी उम्र में उन्होंने भागवत और रामकथा करनी शुरू कर दिया था।

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