Satpura Tiger Reserve में टाइगर का सिर काटने वालों का नहीं लगा सुराग, क्या जबलपुर में खुलेगा मौत का राज?
Satpura Tiger Reserve: एमपी के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में हुई घटना का अभी तक रहस्य बना हुआ है। कड़ी चौकसी के बावजूद ऐसे कौन से लोग थे, जो टाइगर का सिर्फ काटकर ले गए और हत्या की वारदात को अंजाम दिया। मृत बाघ का कटा सर जरुर बरामद कर लिया गया हैं।
वन्य प्राणी इतिहास में क्रूरता भरी पहली बार सामने आयी इस घटना से पूरा वन विभाग सहमा हुआ हैं। 26 जून के बाद से बाघ का शिकार करने वाले लोगों की खोजबीन में वन विभाग ने दिन-रात एक कर दिया, लेकिन अब तक आरोपियों का पता नहीं चला।
उलटे सतपुड़ा फारेस्ट एरिया से लगे बैतूल जिले के एक गांव में आदिवासी युवक से पूछताछ करना, वन विभाग को महंगा साबित हो चुका हैं। पूछताछ के बाद छोड़े गए उस शख्स ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। इधर घटना स्थल से करीब दस किलोमीटर दूर बाघ का कटा हुआ सिर बरामद हुआ।

सिर के ढांचे को जांच के लिए जबलपुर के वेटरनरी विश्वविद्यालय के वाइल्ड लाइफ संस्थान लाया गया। टिशू की जांच हो रही हैं। इससे घटना के तरीके का अनुमान लगाया जाएगा। साथ ही मौत के सही कारणों की भी पुष्टि होगी। इस घटना से वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट भी हतप्रभ हैं। जिस निर्दयता के साथ बाघ को मौत के घाट उतारा गया, वह सामान्य किसी आदमी का काम नहीं लगता हैं। खौफनाक कदम उठाने वालों ने किस मकसद ने टाइगर को अपना शिकार बनाया, यह बात भी अबूझ पहेली बना हुआ हैं।
टाइगर स्ट्राइक फ़ोर्स और वन विभाग की टीम बीते 11 दिनों मे आधा सैकड़ा से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी हैं। निशाने पर जादू-टोना करने वाले तांत्रिक भी हैं। जो अक्सर मनुष्य या फिर किसी जानवर की खोपड़ी का इस्तेमाल करते हैं। बाघ का धड़ छोड़कर गए, इससे माना जा रहा है कि आरोपियों की आवश्यकता सिर की ही थी। अब बरामद हुआ कटा सिर जिस जगह मिला है, उसके आसपास के क्षेत्र में छानबीन और तेज कर दी गई हैं।












Click it and Unblock the Notifications