संजय ना कर दें कांग्रेस की महाभारत का लाइव! कौन होगा इसका जिम्मेदार ?
कांग्रेस प्रत्याशी जगत बहादुर अन्नू के नामांकन के दौरान पूरी कांग्रेस ने एकजुटता दिखाने का भरसक प्रयास किया। लेकिन इस दौरान बरगी विधायक संजय यादव की अनुपस्थिति ने रंग में भंग डाल दिया है।
जबलपुर, 19 जून: नगर निगम चुनाव के तहत सभी प्रत्याशियों के नाम निर्देशन पत्र जमा हो चुके हैं। बागियों के मानमनौव्वल का दौर चल रहा है। इसी बीच खबर है कि जबलपुर में कांग्रेस के अंदरखाने में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। एक तरफ पार्षद टिकट को लेकर जिन दावेदारों की दाल नहीं गली, वो खफा हैं। वही व्यक्तिगत तौर पर कांग्रेस महापौर प्रत्याशी जगत बहादुर सिंह 'अन्नू' द्वारा पूछ-परख न होने पर बरगी विधायक संजय यादव का मन रूठा सा लगता है। अन्नू की नामांकन रैली में भी संजय नदारत रहे, हालाँकि उन्होंने सफाई दी कि वह अपने ग्रामीण क्षेत्र भेड़ाघाट-शहपुरा के चुनावी कार्यक्रम में व्यस्त थे।

अन्नू के नामांकन में संजय यादव की गैरमौजूदगी पर सवाल
कांग्रेस प्रत्याशी जगत बहादुर अन्नू के नामांकन के दौरान पूरी कांग्रेस ने एकजुटता दिखाने का भरसक प्रयास किया। लेकिन इस दौरान बरगी विधायक संजय यादव की अनुपस्थिति ने रंग में भंग डाल दिया है। दरअसल संजय यादव अन्नू से कितने और क्यों नाराज है या नहीं, यह तो वही खुलकर बता सकते है। लेकिन उन्होंने यह जरुर बताया कि उनकी पार्टी के महापौर प्रत्याशी ने टिकट मिलने के बाद न तो कोई फोन किया और न ही वह मिलने आए। रही बात नामांकन रैली में गैरमौजूदगी की, तो यादव का कहना था कि एक दिन पहले राज्य सभा सांसद विवेक तन्खा ने उन्हें बुलाया था, जहाँ उन्होंने अपनी विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्र की चुनावी व्यस्तता का जिक्र किया था। बरगी विधायक बोले कि कांग्रेस प्रत्याशी से राज्य सभा सांसद के यहाँ ही मुलाकात हुई थी। क्योकि तन्खाजी का आदेश सिर आँखों पर है। नामांकन रैली कार्यक्रम की सूचना भी अशोक गुप्ता के माध्यम से व्हाट्सएप पर दी गई।

गुटबाजी की रवायत पर कौन लगाएगा विराम?
चुनाव कोई सा भी हो और किसी भी दल की बात की जाए, अंदरूनी गुटबाजी, मन-मुटाव की झलक दिखाई दे ही जाती है। मप्र के नगरीय निकाय चुनाव में जहाँ नाम-निर्देशन-पत्र जमा करने की आखिरी तारीख ख़त्म हो गई। वही दो दिन बाद यानि 22 जून तक चुनाव मैदान की सारी बिसात राजनैतिक गोटियों से सज-धज कर तैयार हो जाएगी। तब तक बगावती तेवर अपना चुके बागी प्रत्याशी या तो अपना नाम वापस ले लेंगे या फिर चुनाव मैदान में अपनी पार्टी के लिए गड्ढा खोदने डटे रहेंगे। लेकिन वार्ड स्तर के इन छोटे चुनाव को भी विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। ऐसे में कांग्रेसी खेमे में गुटबाजी की रवायत को विराम देने जहां आला नेता एड़ीचोटी का जोर लगा रहे हैं। तो वहीं अंदरखाने में कुछ और खिचड़ी पक रही है।

‘अन्नू’ की सामने नहीं आई प्रतिक्रिया
महापौर प्रत्याशी जगत बहादुर सिंह 'अन्नू' और विधायक संजय यादव के बीच वर्षों पुराने मित्रता के गहरे संबंध रहे है। शहर में यह चर्चा आम है कि नगर निगम चुनाव में जब पहली बार अन्नू पार्षद बने थे, उस वक्त संजय यादव ने मित्रता का धर्म निभाया था। अब वही दोस्त, शहर का प्रथम नागरिक बनने चुनाव मैदान में है तो अलग तरह की चर्चाओं ने जन्म ले लिया है। इस मसले पर कांग्रेस महापौर प्रत्याशी से भी उनका पक्ष जानने का प्रयास किया लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। जब चुनाव प्रचार जोर पकड़ रहा है और बीजेपी प्रत्याशी डॉ. जितेन्द्र जामदार के साथ उनका पूरा मजबूत संगठन पार्टी है, ऐसे में कांग्रेस कितनी आगे निकलेगी बड़ा सवाल है?

पिछले नगर निगम चुनाव में भी मिला था जख्म
महापौर प्रत्याशी जगत बहादुर 'अन्नू' और उनकी ही पार्टी के विधायक के बीच मन-मुटाव की इस चर्चा के कई मायने निकाले जा रहे है। कांग्रेस के ही कई लोग यह भी सवाल कर रहे है कि क्या महापौर प्रत्याशी अन्नू ने कांग्रेस के अन्य विधायकों को भी फोन नहीं लगाया और क्या उनसे भी वह मिलने नहीं गए? इधर सियासी बाजार में इस बात की भी चर्चा सरगर्म है कि पिछले नगर निगम चुनाव में भी संजय यादव गुटबाजी का शिकार हुए थे। उस वक्त कांग्रेस ने यादव के भतीजे को बनारसी दास भनोत वार्ड से टिकट दिया, लेकिन कुछ लोगों ने अचानक उसी वार्ड से निर्दलीय प्रत्याशी उतारकर भतीजे को चुनाव में हरवा दिया।
ये भी पढ़े-लाखों-करोड़ों फिर भी कर्ज में डूबे ये महापौर प्रत्याशी, जानिए कौन है ये












Click it and Unblock the Notifications