POWER POINT: शून्य से शिखर तक एक दलित नेत्री की कहानी, पहुंचेंगी राज्यसभा
सुमित्रा बाल्मीक जबलपुर की रहने वाली है। उनके पति गुरुचरण जिनका दिसंबर 2019 स्वर्गवास हो गया, वह व्हीकल फैक्ट्री में नौकरी करते थे। मप्र के भूतपूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. ईश्वरदास रोहाणी की गुड लिस्ट में शुमार थी
जबलपुर, 31 मई: भाजपा में करीब 29 साल का राजनैतिक सफ़र, तीन बार पार्षद, नगर निगम अध्यक्ष की आसंदी, फिर प्रदेश स्तरीय संगठन की बड़ी जिम्मेदारी निभाने वाली जबलपुर की सुमित्रा बाल्मीक। साधारण कद काठी की दलित वर्ग का प्रतिनिधित्त्व करने वाली सुमित्रा जल्द ही राज्यसभा सांसद कहलाएंगी। जिसकी कल्पना न खुद उनको थी, और न ही मध्यप्रदेश के भाजपा के तमाम दिग्गजों को।

राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में OBC वर्ग से कविता पाटीदार के नाम के बाद बीजेपी के केन्द्रीय संगठन ने फिर सभी को चौंका दिया कि प्रदेश से राज्यसभा की दूसरी सीट के लिए उम्मीदवार के रूप में महिला ही होगी। वो भी दलित वर्ग का प्रतिनिधित्त्व करने वाली सुमित्रा बाल्मीक। मंगलवार को दोनों ही उम्मीदवारों ने नामांकन भी दाखिल कर दिया।

जानिये कौन है सुमित्रा बाल्मीक?
सुमित्रा बाल्मीक जबलपुर की रहने वाली है। उनके पति गुरुचरण जिनका दिसंबर 2019 स्वर्गवास हो गया, वह व्हीकल फैक्ट्री में नौकरी करते थे। मप्र के भूतपूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. ईश्वरदास रोहाणी की गुड लिस्ट में शुमार रहने वाली सुमित्रा ने 1993 में भाजपा का दामन थामा था। बेहद सरल स्वाभाव और सामाजिक उत्थान के लिए हमेशा सोचने वाली सुमित्रा की जब स्व. रोहाणी से नजदीकियां बढ़ी तो पार्टी में काम करने के बड़े से बड़े अवसर मिलते गए। ख़ास बात यह है कि दलित वर्ग से ताल्लुक रखने के बाबजूद सुमित्रा ने अपने जीवन में किसी भी मोड़ में हार नहीं मानी। जब शादी हुई तो 12वीं भी नहीं पढी थी। शादी के बाद उन्होंने बारहवीं पास की, फिर आर्ट्स से बीए उत्तीर्ण किया।

3 बार नगर-निगम की पार्षद, अध्यक्ष फिर प्रदेश संगठन में पद
1993 में भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद सुमित्रा ने पार्टी के लिए बहुत काम किया। जबलपुर के रांझी इलाके में जिस वार्ड से वो आती है। वहां रहने वाले वाशिंदों की मूलभूत समस्याओं से हर हाल में निजात दिलाने सुमित्रा कड़ा संघर्ष करती रही। दलित वर्ग में गहरी पैठ और उस वर्ग के लोगों का सुमित्रा के प्रति भरोसा देख बीजेपी को 1999 में पार्षद की टिकिट देने मजबूर होना पड़ा। इसके बाद उनकी राजनैतिक छवि बढ़ती गई। अगले दो बार नगर निगम के चुनाव में भी उन्हें पार्षद की टिकिट मिली। तत्कालीन नगर सत्ता में सुमित्रा को अध्यक्ष चुना गया। फिर वर्तमान में उन्हें प्रदेश भाजपा में बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे वह निभा रही हैं।

न खुद को थी उम्मीद और न ही प्रदेश के दिग्गजों को
राज्यसभा की दूसरी सीट के लिए सोमवार की रात को केन्द्रीय भाजपा कार्यालय से जारी लिस्ट में जब सुमित्रा बाल्मीक का नाम आया, तो हर कोई हतप्रभ रह गया। क्योकि पहले OBC वर्ग से कविता पाटीदार का नाम, फिर दलित वर्ग से सुमित्रा। कुल मिलाकर आश्चर्यजनक किन्तु सत्य, ठीक उसी तरह जैसे राष्ट्रपति पद के लिए रामनाथ कोविंद का नाम सामने आया था। सुमित्रा बाल्मीक को खुद को उम्मीद नहीं थी, पार्टी इतनी बड़ी जिम्मेदारी के लिए उनके नाम का चयन करेगी। जबकि मीडिया की सुर्ख़ियों और भाजपा के अन्दरखाने में मप्र की राज्यसभा सीटों के लिए अलग ही नाम चर्चा में थे। जिन दिग्गजों ने उम्मीद पाल रखी थी कि शायद उनके तजुर्बे और योग्यता के हिसाब से उनको उम्मीदवार घोषित कर दे, उन सभी के अरमानों पर पानी फिर गया।

एक तीर से तीन निशाने
भाजपा को अप्रत्याशित फैसले लेने की जैसी आदत बन गई है। जिस तरह OBC और एसटी वर्ग को राज्यसभा में प्रतिनिधित्त्व देने का फैसला लिया गया हैं। उसके भी कई मायने है। बीजेपी पहले से ही ओबीसी वर्ग को लेकर लड़ाई लड़ रही है, वही तुरुप के पत्ते की तरह ST वर्ग को भी साधने की अब पूरी कोशिश हैं। पार्टी ने दोनों सीट के लिए महिलाओं का नाम सामने लाकर यह सन्देश भी दे दिया है कि जितनी अहमियत पुरुषों की है, उतनी ही महिलाओं की भी। इसके साथ ही महाकौशल अंचल के लिए यह फैसला बड़ी सौगात से कम नहीं है। मौजूदा वक्त में शिवराज सरकार के मंत्रीमंडल में प्रतिनिधित्त्व न मिलने से बनी खाई को भरने फैसला भी माना जा रहा हैं। क्योकि कांग्रेस सरकार गिरने के बाद लगातार इस क्षेत्र से प्रतिनिधित्त्व को लेकर आवाज बुलंद हो रही थीं। जिसका असर आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनाव में भी पड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही थी। हालाँकि अब आने वाला वक्त ही प्रदेश की जनता को महसूस करएंगा कि राज्यसभा के लिए नॉमिनेट OBC-ST वर्ग से महिला उम्मीदवारों का फैसला पार्टी के लिए फायदेमंद था या नहीं।

जबलपुर ऐसी लोकसभा सीट जहाँ होंगे 4 सांसदों के आवास
जबलपुर से सुमित्रा बाल्मीक के रूप में राज्यसभा सीट के उम्मीदवार के लिए नाम सामने आने के बाद यहाँ की राजनैतिक तस्वीर भी अलग होगी। पहले से यहाँ लोकसभा क्षेत्र के सांसद राकेश सिंह हैं। कांग्रेस से राज्यसभा सांसद के लिए दूसरी बार भी विवेक कृष्ण तनखा का नाम हैं। वही अब बीजेपी से सुमित्रा बाल्मीक होंगी। इन तीनों के आवास जबलपुर में ही है। चौथे सांसद के रूप में केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद है, जो दमोह लोकसभा सीट से सांसद है। उनका आवास भी जबलपुर में ही है। लिहाजा आने वाले वक्त में यहाँ से लिखे जाने वाली इबारत भी अलग ही होंगी।
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