मैकल पर्वत की तराई में नक्सली ! सरकार अलर्ट माँगी गई CRPF की 4 बटालियन

अमरकंटक क्षेत्र में पहली बार नक्सलियों के मूववेंट की खबर है। मप्र के पूर्व DGP रहे वीके सिंह के कार्यकाल के वक्त भी इस इलाके में नक्सलियों की चहल-कदमी मई सूचना चर्चा में रही।

जबलपुर, 08 जून: मध्यप्रदेश में नक्सलियों के साम्राज्य को ढेर करने की कवायद के बीच सरकार के सामने एक बड़ी चुनौती सामने आई है। खबर है कि यहाँ-वहाँ से खदेड़े जा रहे नक्सलियों के गुट एमपी के मैकल पर्वत की तराई के लिए पहचाने जाने वाले अमरकंटक और उसके आसपास जगहों को कब्जाना चाहते है। नक्सलियों को लग रहा है कि एमपी का यह बेल्ट उनके लिए महफूज है। आसपास बढ़ते नक्सलियों के मूववेंट के मद्देनजर पुलिस हेडक्वाटर ने केंद्र सरकार से CRPF की चार बटालियन की डिमांड की है। आपको बता दे मप्र के इस एरिया में नक्सलियों की आहट पर पूर्व DGP वीके सिंह तीन साल पहले ही अंदेशा जता चुके है। लेकिन इस बार चुनावी मौसम शुरू होते ही नक्सलियों की टुकड़ी अपने इरादों के सबूत छोड़ती जा रही है।

मप्र का अमरकंटक बेल्ट ही क्यों चुना?

मप्र का अमरकंटक बेल्ट ही क्यों चुना?

प्राकृतिक विरासत से भरपूर अमरकंटक विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमाला का सेंटर प्वाइंट है। यह इलाका मैकल पर्वत की तराई के रूप में भी अपनी अलग पहचान रखता है। नर्मदा, सोन और जोहिला नदी के उद्गम स्थान से घिरे अमरकंटक के आसपास का वन्य क्षेत्र बेहद घना है। ढाई से तीन हजार वर्ग फुट ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों से भी घिरा है। जंगलों के करीब अमरकंटक के नजदीक सीतापाला वह एरिया है, जहाँ से छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र फिर आंध्रप्रदेश तेलंगाना राज्य की बॉर्डर करीब है। नक्सलियों को घने जंगली क्षेत्र के इस रास्ते से तीनों राज्यों में मूववेंट आसान हो जाएगा। इसके साथ ही यदि किसी एक राज्य में उनके खिलाफ कोई बड़ा ऑपरेशन चलाया गया, तो वहां भागे दलम को यहाँ पनाह दी जा सकती है। जानकारी के मुताबिक हाल ही में ही छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से नक्सलियों के कुछ गुटों को खदेड़ा गया है। इससे कुछ नक्सली बौखलाए भी हुए है।

इंटेलिजेंस इनपुट के बाद फ़ोर्स बढ़ाने की डिमांड

इंटेलिजेंस इनपुट के बाद फ़ोर्स बढ़ाने की डिमांड

ऐसा नहीं कि अमरकंटक क्षेत्र में पहली बार नक्सलियों के मूववेंट की खबर है। मप्र के पूर्व DGP रहे वीके सिंह के कार्यकाल के वक्त भी इस इलाके में नक्सलियों की चहल-कदमी मई सूचना चर्चा में रही। 2019 में बालाघाट जिले में हुई मुठभेड़ में नक्सली मारे गए थे। एक नक्सली युवक-युवती भी निशाना बने थे। उस वक्त चले सर्च ऑपरेशन में यह बात निकलकर सामने आई थी, कि नक्सली डिंडौरी के रास्ते अमरकंटक की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। उस वक्त सर्चिंग बढ़ा दी गई थी। इस बार फिर जब हलचल शुरू हुई और ख़ुफ़िया एजेंसियों ने जानकारी जुटाई तो नक्सलियों के इरादे स्पष्ट नजर आ रहे है। मौजूदा वक्त में एमपी में दो बटालियन है। यही वजह है कि मप्र पुलिस मुख्यालय ने केंद्र सरकार से CRPF से चार अतिरिक्त बटालियन की डिमांड की है। ताकि नक्सलियों का कोई भी दलम नया अड्डा न बना सके। इंटेलिजेंस को मिले इनपुट के बाद सुरक्षा बल अलर्ट मोड पर है। वह कोई भी चूक नहीं करना चाहता।

2016-2017 से तैयार हो रही स्ट्रेटजी

2016-2017 से तैयार हो रही स्ट्रेटजी

बताया जाता है कि छतीसगढ़ के बस्तर जिले के अबूझमाड़ में नक्सलियों की सेन्ट्रल कमेटी का हेड ऑफिस है। इसका कुछ हिस्सा महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश तेलंगाना में भी आता है। बालाघाट में हुए एनकाउंटर के वक्त नक्सलियों से जुड़े कई साहित्य और बेहद चौकाने वाले दस्तावेज भी बरामद हुए थे। जिसमें खुलासा हुआ था कि नक्सलियों का अगला टारगेट अमरकंटक क्षेत्र है। जहाँ वह अपना हेड क्वाटर बनाना चाहते है। इसके लिए 2016-2017 में बाकायदा सर्वे भी किया गया था। दस्तावेजों में इस बात का भी जिक्र था कि यदि अमरकंटक क्षेत्र में हेड क्वाटर खुलने में कामयाबी नहीं मिली तो फिर इसकी नींव बालाघाट में रखी जाएगी। इसके बाद कुछ वक्त के लिए नक्सलियों की हलचल जरुर थमी, लेकिन फिर उसके बाद मप्र के कान्हा नेशनल पार्क क्षेत्र के आसपास इनके मूववेंट की ख़बरें सुर्ख़ियों में रही। कुछ समय पहले नक्सलियों ने एक वन रक्षक को मुखबिरी के शक में मौत के घाट भी उतार दिया था। अब इस बार सुरक्षा एजेंसिया कोई भी ऐसा मौका नक्सलियों को नहीं देना चाहती, जिससे ये अपने मंसूबों में कामयाब होकर सरकार के लिए सिरदर्द बने।

सरकार भी अलर्ट, हर आतंक का मुहं कुचलने तैयार

सरकार भी अलर्ट, हर आतंक का मुहं कुचलने तैयार

मप्र में शिवराज सरकार की ओर लगातार नक्सलियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने के दावे किए जाते रहे है। सरकार की तरफ से बयान भी जारी होते रहे कि निर्दोष लोगों को निशाना बनाने वाले नक्सलियों का खात्मा करने बड़ी मुहिम चलाई जाएगी। काफी हद तक छुट-पुट घटनाओं को छोड़ मंडला, डिंडौरी, बालाघाट बेल्ट में नक्सली गतिविधियों पर अंकुश लगा। अब एक बार फिर सरकार के सामने नक्सलियों की इस नई स्ट्रेटजी से मुकाबला करना बड़ी चुनौती है। हालाँकि प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा सूबे में किसी भी तरह के आतंक का मुहं कुचलने का बयान देते नजर आए है। हाल ही में उन्होंने आतंक के मसले पर इंदौर में भी कहा कि अलकायदा जैसा संगठन यदि कायदा में रहेगा तो फायदे में रहेगा। प्रदेश में आतंक जैसी किसी भी प्रकार की गतिविधि को बर्दास्त नहीं किया जाएगा। यदि कोई आँख उठाकर भी देखेगा, तो उसका नामों निशान मिटा दिया जाएगा।

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