MP Local Election: कांग्रेस में सियासी अतिक्रमण पर कमलनाथ का ‘बोल्ड डोज’, जो जिस वार्ड से वही से लड़े चुनाव
मप्र में पंचायत चुनाव के साथ नगरीय निकाय चुनाव के लिए राजनीतिक दल अपने स्तर पर अपनी गाइड लाइन जारी कर रहे है। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने नया फरमान जारी किया है
जबलपुर, 12 जून: मध्यप्रदेश के लोकल इलेक्शन में PCC अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का 'बोल्ड डोज' सामने आया है। उन्होंने निर्देश जारी किए है कि चुनाव में दावेदारी जताने वाले सिर्फ अपने वार्ड से ही चुनाव लड़ सकेंगे। ऐसे में किसी दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने का मन बनाकर दावेदारी जताने वालों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। इससे पहले प्रदेश कांग्रेस द्वारा प्रत्याशियों को एफिडेविट भरना अनिवार्य किया गया था, लेकिन पार्टी के अन्दर हुए भारी विरोध के बाद यह फैसला वापस लेना पड़ा। नए फरमान से साफ़ है कि दावेदारों का दूसरे वार्ड में अतिक्रमण नहीं चलेगा।

मप्र में पंचायत चुनाव के साथ नगरीय निकाय चुनाव के लिए राजनीतिक दल अपने स्तर पर अपनी गाइड लाइन जारी कर रहे है। नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने चुनाव लड़ने की तमन्ना रख रहे अपने दावेदारों के लिए नया फरमान जारी किया है। इस संबंध में कमेटी के उपाध्यक्ष और संगठन प्रभारी चन्द्रप्रभाष शेखर ने पत्र भी जारी कर दिया। इस चिट्ठी के मुताबिक कहा गया है, कि पार्टी की ओर से प्रत्याशी उन्ही को बनाया जाए, जो जिस वार्ड में रहता है और वह उसी वार्ड का मतदाता हो। किसी भी उम्मीदवार का वार्ड परिवर्तन नहीं होगा। प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के निर्देश का हवाला देते हुए पत्र में यह भी जिक्र किया गया कि निर्देश का अनिवार्य रूप पालन करना आवश्यक है।

कुछ की नींद उड़ी, कुछ की बल्ले-बल्ले
PCC अध्यक्ष कमलनाथ के इस नए फरमान से उन दावेदारों की नींद उड़ गई है, जो चुनाव घोषणा के काफी वक्त पहले से तैयारियां कर चुके थे। कुछ दावेदारों ने तो प्रदेश में कमलनाथ सरकार के आस्त्तिव में आते ही अपने पसंदीदा वार्डों में मोर्चा संभाल लिया था। अपना वार्ड छोड़ दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने के लिए कई दावेदारों ने जमकर खर्चा भी किया। लेकिन अब नई गाइड लाइन ने ऐसे दावेदारों को चुनावी दंगल से पीछे धकेल दिया है। वही उन दावेदारों की बाँछें खिल गई है, जिनके वार्ड में आकर दूसरे नेता दावेदारी जता रहे थे। अपनी मूछों पर ताव देकर ऐसे नेता महीनों पहले से ही खुद को अघोषित पार्षद साबित कर रहे थे।

यदि किसी के दो वार्डों में घर और वोटर कार्ड, फिर क्या होगा?
चाहे दावेदार हो या फिर उनको टिकट दिलाने का भरोसा दिला चुके आलानेता, पार्टी का फरमान है तो पालन करना ही पड़ेगा। इस बीच यह चर्चा शुरू होते भी देर नहीं लगी कि यदि किसी दावेदार के एक से ज्यादा निवास स्थल अलग-अलग वार्ड में है और यदि उनके दो वार्ड से वोटर कार्ड बने है, तो वह कहाँ से चुनाव लड़ेंगे? जानकारों की माने तो ऐसी स्थिति में उलझे दावेदारों ने अपने राजनीतिक पंडितों से सलाह लेना शुरू कर दिया है। सियासी गलियारे से यह भी खबर है कि नए फरमान से मुरझाए कई चेहरे या तो पाला बदल सकते है, या फिर निर्दलीय के रूप में उनके पास ब्रह्मास्त्र तो है ही। जबलपुर, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर ही नहीं, प्रदेश भर में कई जगहों पर यह पेंच फंसेगा। फिलहाल इस मसले पर पार्टी के आला नेताओं से जब बात की गई तो उन्होंने फिलहाल चुप्पी साध ली।












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