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MP assembly election 2023: जबलपुर की पनागर विधानसभा सीट, सिर्फ एक बार कांग्रेस, फिर जीतती गई बीजेपी

MP assembly election 2023: किसी भी राज्य के विधानसभा चुनाव हो, हर विधानसभा क्षेत्र का अलग मिजाज और अलग समीकरण होते है। मध्य प्रदेश भी इससे जुदा नहीं हैं। चुनाव की घड़ी करीब है, तो हम प्रदेश की सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों का हाल बताएंगे। जिसमें वोटर्स से लेकर जीत-हार के आंकड़े और उस क्षेत्र की तासीर भी शामिल हैं।

जबलपुर जिले की आठ विधानसभा सीटों में चार सीट ग्रामीण हैं। इस आर्टिकल में हम 2023 के चुनाव के नजरिए ग्रामीण क्षेत्र की पनागर विधानसभा सीट की हर वो बात बताने जा रहे है, जो आपको जानना बेहद जरुरी हैं। क्योकि हर चुनाव में एक-एक सीट बेहद मायने रखती हैं।

पनागर विधानसभा ओबीसी बहुल सीट है, जिसमें बड़ी संख्या में आदिवासी मतदाता भी रहते हैं। साल 2008 से पहले यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित थी। परिसीमन के बाद यह सामान्य सीट में तब्दील हो गई। इसके आदिवासी बहुल अनेक क्षेत्र परिसीमन के दौरान सिहोरा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कर दिए गए और सिहोरा को अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित कर दिया गया। पनागर विधानसभा में पटेल समाज के मतदाता सर्वाधिक हैं, उनके अलावा यादव और अन्य ओबीसी मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है।

MP-assembly-election-Panagar-Constituency-of-Jabalpur

पनागर विधानसभा क्षेत्र उत्तर दिशा में धमकी गांव, उत्तर पूर्व में केर गांव, पूर्व में अमझर घाटी, दक्षिण पूर्व में निवास बॉर्डर, दक्षिण और दक्षिण पश्चिम में बरेला क्षेत्र, पश्चिम में सूखा गांव, और उत्तर पश्चिम में सगड़ा गांव तक फैला हुआ है।

जबलपुर पनागर विधानसभा कुल मतदाता
महिला 120233
पुरुष 129179
कुल (लगभग) 249427

पनागर विधानसभा क्षेत्र पूर्ण रूप से हिंदू बहुल सीट है, कुछेक इलाकों मसलन अमखेरा से सटी बस्तियों में मुस्लिम मतदाता निवास करते हैं, लेकिन यहां हिंदू वोट खासकर ओबीसी वोट ही निर्णायक हैं। पनागर विधानसभा क्षेत्र में आमतौर पर कृषक वर्ग निवास करता है। सामाजिक समीकरण की बात की जाए तो यहां पर 18 फीसद सवर्ण समाज निवासरत है। जिनमें 6 फीसद ब्राम्हण, 5 फीसद क्षत्रिय, बाकी के 7 फीसद मतदाता वैश्य समाज से हैं। ओबीसी वोटर्स यहां निर्णायक हैं। जिनमें सबसे ज्यादा संख्या में पटेल मतदाता मौजूद हैं। उनके बाद यादव मतदाता काफी अधिक हैं। 15 फीसद के करीब आदिवासी मतदाता भी विधानसभा क्षेत्र के निवासी हैं।

आर्थिक समीकरण
इस क्षेत्र में 80 फीसद क्षेत्र कृषि क्षेत्र है लिहाजा इस क्षेत्र में लोगों की आमदनी का मुख्य स्त्रोत खेती ही है। खेती के अलावा पशुपालन, डेयरी उद्योग क्षेत्र के लोगों की आमदनी का जरिया है। पनागर विधानसभा क्षेत्र मध्यप्रदेश के गठन के साथ ही अस्तित्व में आया था। पूर्व में यह सीट सामान्य थी, फिर परिसीमन के उपरांत इसे अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित कर दिया गया। इस क्षेत्र से कांग्रेस की कौशल्या गोंटिया और बीजेपी से मोती कश्यप मध्यप्रदेश शासन में मंत्री रह चुके हैं। पनागर विधानसभा क्षेत्र की खास पहचान पनागर का उपनगरीय इलाका है। यहां का कमानिया गेट इस क्षेत्र की खास पहचान है।

..फिर बीजेपी का गढ़ बन गई यह सीट
पनागर विधानसभा क्षेत्र का मिजाज करीब 3 दशकों से बीजेपी की ओर झुकाव वाला रहा है। यहां से साल 1993 से लेकर 2018 तक बीजेपी प्रत्याशी को ही जीत मिली है। केवल एक मर्तबा साल 1998 में कांग्रेस की कौशल्या गोंटिया ने बीजेपी के मोती कश्यप को पटखनी दी थी। पनागर विधानसभा क्षेत्र में अब तक की सबसे बड़ी उठापटक साल 2018 में ही हुई। जब यहां से बीजेपी के बागी प्रत्याशी भारत सिंह यादव ने बतौर निर्दलीय उम्मीदवार परचा दाखिल कर दिया। पूर्व में जिला पंचायत अध्यक्ष रहे भारत सिंह यादव ने बीजेपी प्रत्याशी सुशील तिवारी इंदु को कड़ी टक्कर भी दी। यहां तक कि कांग्रेस प्रत्याशी सम्मति सैनी तीसरे नंबर पर रहे थे। हालांकि चुनाव बीजेपी प्रत्याशी ने बड़ी लीड के साथ जीता था।

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