mp assembly election 2023: जबलपुर का पाटन विधानसभा क्षेत्र, किसान बाहुल्य वोट बैंक करता आया फैसला
mp assembly election 2023: पाटन विधानसभा क्षेत्र पूर्णतः कृषि प्रधान क्षेत्र है। यहां की काली उपजाऊ मिट्टी के कारण यहां के किसान काफी सुविधासंपन्न हैं। परिसीमन के बाद इस विधानसभा क्षेत्र में मझौली विधानसभा को विलोपित कर उसका अधिकांश हिस्सा जोड़ दिया गया। उसके बाद राजनैतिक समीकरणों में भी काफी परिवर्तन आ गया।
पाटन विधानसभा क्षेत्र में एक समय जमींदारों, मालगुजारों और क्षत्रिय समाज का आधिपत्य था। कालांतर में यह पकड़ कमजोर हुई है। वर्तमान में यहां बड़ी तादाद में मौजूद ओबीसी वोटर्स खासकर पटेल समुदाय निर्णायक स्थिति में है। हालांकि ब्राम्हण-ठाकुर मतदाताओं के वर्चस्व को खारिज नहीं किया जा सकता।
पाटन विधानसभा क्षेत्र आर्थिक रूप से समृद्ध क्षेत्र है। यहां की उपजाऊ मिट्टी की वजह से आर्थिक रूप से संपन्न किसानों की बहुलता है। हालांकि अत्योदय वर्ग आज भी मूलभूत सुविधाओं से अभावग्रस्त है। इस क्षेत्र में मटर की पैदावार काफी ज्यादा है। खेती के इतर खेती से जुड़े व्यवसाय भी काफी समृद्ध हैं। यहां सबसे कम 1990 में 49 फीसद और सर्वाधित सर्वाधित 2018 में 79 फीसद से ज्यादा वोटिंग हुई थी।

एक मर्तबा जनता दल यूनाइटेड को भी इस क्षेत्र में सीट जीतने का मौका मिला। विधानसभा क्षेत्र का राजनैतिक मिजाज मिला जुला है। बीजेपी के गठन से पूर्व यह क्षेत्र पूरी तरह से कांग्रेस की ओर झुका रहा। लेकिन समय के साथ बीते 25 वर्षों में यहां निरंतर परिवर्तन वाला ट्रेंड देखने को मिला है। बात साल 2013 की है जब पहली बार चुनाव मैदान में उतरे कांग्रेस के नीलेश अवस्थी ने बीजेपी के बड़े दिग्गज नेता अजय विश्नोई को धूल चटाई। विश्नोई उस दौरान प्रदेश सरकार में मंत्री थे पर जनता ने उन्हे नकार दिया। यह घटना पाटन के राजनैतिक इतिहास की बड़ी घटना मानी जाती है।
2003 सोबरन सिंह - नारायण चौधरी
2008 अजय विश्नोई - विक्रम सिंह
2013 नीलेश अवस्थी - अजय विश्नोई
2018 अजय विश्नोई - नीलेश अवस्थी
साल 2018 में एक बार चुनाव हार चुके अजय विश्नोई को बीजेपी ने मौका दिया था, हालांकि बतौर सिटिंग एमएलए नीलेश अवस्थी को अपनी जीत पर यकीन था। लेकिन राजनीति के पुराने घाघ अजय विश्नोई ने अपनी गलतियों से सबक लिया और ऐसी चुनावी रणनीति बनाई कि नीलेश इस दफा चित्त हो गए। बीजेपी की बात की जाए तो सिटिंग एमएलए अजय विश्नोई टिकट के पक्के दावेदार हैं। बीजेपी के नए फॉर्मूले के तहत उनकी राह में रोड़े आ सकते हैं। उनके अलावा पूर्व जिला ग्रामीण अध्यक्ष शिव पटेल भी दावेदारी करते नजर आ रहे हैं। अजय विश्नोई को उनके राजनैतिक चातुर्य की वजह से किसी और सीट (जबलपुर पश्चिम) से भी लड़ाया जा सकता है। ऐसे में पार्टी यहां किसी युवा चेहरे पर भी दांव लगा सकती है। कांग्रेस की बात की जाए तो नीलेश अवस्थी की दावेदारी काफी दमदार है। फिर भी नीलेश जैन यहां से दावेदारी ठोंक रहे हैं। ओबीसी कार्ड के चलते कांग्रेस यहां नया चेहरा भी ला सकती है।
जब प्रतिभा सिंह ने की बगावत तो जदयू को मिला था मौका
बात साल 2003 की है, बीजेपी ने यहां से नारायण चौधरी को प्रत्याशी बनाया था। यह लंबे समय बाद देखा गया कि मालगुजारी के वर्चस्व वाली सीट पर एक ओबीसी को चुनाव मैदान में उतारा गया। जिससे खफा क्षेत्र से दावेदारी ठोंक रहीं प्रतिभा सिंह ने बतौर निर्दलीय पर्चा भर दिया। उन्होंने बीजेपी के काफी वोट काटे, नतीजा यह रहा कि जनता दल यूनाइटेड के सोबरन सिंह यहां से विधायक चुने गए।
जब मतदान के दिन वीडियो हुआ वायरल
साल 2018 में हुए चुनाव में सोशल मीडिया का असर दिखाई देने लगा था। कांग्रेस के खेमे की ओर से ऐन मतदान के दिन बीजेपी प्रत्याशी का एक वीडियो वायरल कराया गया। जिसमें वे यह कहते दिखाई दे रहे थे कि मेरे करियर के आखिरी चुनाव में मुझे पाटन में फंसा दिया गया। यह मेरा करियर खत्म करने की साजिश है। कांग्रेस को लगा था कि इस वीडियो से उसे फायदा मिलेगा लेकिन चुनाव परिणामों ने कुछ और ही साबित कर दिया।












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