MP में खसरा-रूबेला टीकाकरण में गंभीर है सरकार, कार्यशालाओं के जरिए धर्म गुरुओं को भी किया जा रहा जागरूक
मध्य प्रदेश में 5 साल तक के बच्चे खसरा और रूबेला टीकाकरण से वंचित न रहे, इसके लिए सरकार युद्ध स्तर पर प्रयास कर रही है। कार्यशालाओं के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जा रहा हैं।

Measles rubella vaccination: मध्य प्रदेश के जबलपुर में राष्ट्रीय खसरा टीकाकरण दिवस के मौके पर धर्मगुरुओं और मीडिया समूह के संवेदनीकरण हेतु कार्यशाला का आयोजन स्वास्थ्य विभाग ने आयोजन किया। खसरा और रूबेला रोग के संबंध मे समाज मे फैली विभिन्न भ्रान्तियों और अन्ध विश्वास प्रति समाज जागरूक हो सकें, इस संबंध में विभाग ने अपनी रणनीति बताई। साथ सरकार द्वारा इन रोगों के उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे अभियान के परिणामों को भी बताया गया। टीकाकरण के दौरान संकोच और भय को दूर करने पर जोर दिया गया।

भारत सरकार ने दिसंबर 2023 तक मीज़ल्स रूबेला रोग का निर्मूलन करने का लक्ष्य रखा है । इस उद्देश्य को हासिल करने के लिए एमआर के दो टीके 5 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे को लगना आवश्यक है, लेकिन अभी भी कुछ लोग यह टीके अपने बच्चों को लगवाने मे संकोच करते है । जिसे दूर करने मध्य प्रदेश सरकार अभी अभियान चला रही है। कार्यशाला में जिला अधिकारियों के साथ शिशु रोग विशेषज्ञों ने इस रोग के बारे में जानकारी देते हुये बताया कि खसरा रूबेला रोग के मुख्य लक्षण लाल दाने, तेज बुखार के साथ सर्दी खांसी होता है । समय के साथ ये रोग बच्चे में गंभीर और जानलेवा हो जाता है, जिसके कई दुष्परिणाम भी होते हैं।

बताया गया कि इसका इलाज नहीं होता सिर्फ इससे एम आर के दो टीके लगवाकर बचा जा सकता है । कार्यशाला में वर्चुअली शामिल हुए राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ संतोष शुक्ला ने भी संवाद किया। भोपाल से आये राज्य टीकाकरण सलाहकार डॉ रविंद्र बबेले ने कार्यशाला में इस बीमारी की बारीकियां धर्मगुरुओं और मीडिया समूह के लोगों को बताई। सभी धर्मों के धर्मगुरुओं ने अपने सुझाव दिए। इन रोगों के खात्मे के लिए शिवराज सरकार के कार्यकाल में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की गई। आने वाले समय में बेहतर ढंग से सभी बच्चों को टीकाकरण हो सकें, इसके लिए सभी ने संकल्प भी लिया।












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