MP में क्या अब निहत्थे होगी वनों की सुरक्षा, वन कर्मियों ने वापस किए अपने हथियार
जबलपुर, 16 अगस्त: एमपी के विदिशा फॉरेस्ट एरिया लटेरी में वन कर्मियों के फायरिंग मामले में हुई कार्रवाई के खिलाफ अब वन कर्मचारी अब लामबंद हो गए हैं। प्रदेश के कई हिस्सों में कर्मचारियों ने अपने हथियार विभाग को वापस कर दिए। रेंजर एसोसिएशन ने सरकार द्वारा लिए गए एक्शन का विरोध किया है। आपको बता दें कि लटेरी में गश्त के दौरान वन कर्मियों की फायरिंग में एक आदिवासी की मौत हो गई थी और कुछ अन्य लोग जख्मी हुए थे।

निहत्थे करेंगे वनों की सुरक्षा
रेंजर एसोसिएशन के बैनर तले अब वन कर्मचारी एकजुट हो गए है। अपने विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई का प्रदेशभर में विरोध हो रहा हैं। वन कर्मचारियों को वनों की सुरक्षा के लिए मिले हथियार, विभाग को वापस करने का सिलसिला जारी है। जबलपुर संभाग के कई जिलों के वना कर्मियों ने अपनी बंदूकें अपने ऑफिस में जमा कर दी। इनका कहना है कि वनों की सुरक्षा के लिए यदि शस्त्र चलाने की इस तरह की सजा मिलेंगी, तो बेहतर है कि वह निहत्थे ही अपनी ड्यूटी निभाएं।

फायरिंग का ये था मामला
मप्र के विदिशा जिले के लटेरी में पिछले दिनों फॉरेस्ट एरिया में वन कर्मियों की फायरिंग में चैनसिंह भील नाम के आदिवासी की मौत हो गई थी। कुछ अन्य लोग भी घायल हुए थे। आदिवासियों के बढ़ते दबाब के बाद सरकार ने विदिशा DFO राजवीर सिंह का तबादला कर दिया और फायरिंग करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया था। आदिवासियों की दलील थी कि वन कर्मियों ने जानबूझकर हत्या की और आदिवासी समाज को निशाना बनाया गया।

वन विभाग ने बताया था तस्कर
मुठभेड़ की घटना में वन विभाग का पक्ष है कि उन्हें वन परिक्षेत्र की सुरक्षा के दौरान फायरिंग करना पड़ा था। सौगन तस्करों के जंगल में प्रवेश की सूचना मिली थी। मौके पर जब पहुंचे तो कुछ लोग सागौन की सिल्लियां ले जा रहे थे। जिन्हें रोकने का प्रयास किया तो उनके द्वारा वन कर्मियों पर हमला किया गया। आत्मरक्षा और आरोपियों को पकड़ने गोली चलाना पड़ा था। वन विभाग ने मृतक और घटना का शिकार घायलों को लकड़ी तस्कर बताया था।

DFO और वन कर्मियों के खिलाफ हुई कार्रवाई
मामले ने जब तूल पकड़ा तो सरकार को वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ एक्शन पड़ा था। विदिशा DFO राजवीर सिंह का तबादला कर दिया गया, वही फायरिंग में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ हत्या समेत कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया। जिससे वन कर्मियों में आक्रोश व्याप्त हैं।












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