MP की इस में यूनिवर्सिटी में 100 नंबर में से मिलते है 170 नंबर! यकीन नहीं आता, तो जानिए पूरा मामला
MP में जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी की हैरान कर देने वाला एक और कारनामा सामने आया है। एक प्राइवेट कॉलेज के 18 स्टूडेंट्स को प्रेक्टिकल में 100 में से 170 तक नंबर दे दिए गए। अब प्रबंधन इसका ठीकरा कॉलेज पर फोड़ रहा है।

Jabalpur Medical university of MP: मध्य प्रदेश की मेडिकल यूनिवर्सिटी के कारनामें थमने का नाम नहीं ले रहे। आपने शायद ही किसी एग्जाम में किसी स्टूडेंट को 100 नंबर में से 170 नंबर मिलने की बात सुनी हो। ये गजब कारनामा जबलपुर की यूनिवर्सिटी ने कर दिखाया हैं। एक स्टूडेंट के रिजल्ट में यह गड़बड़ी होती तो भी टाइपो मिस्टेक मान लिया जाता। लेकिन एक प्राइवेट कॉलेज के 18 छात्र-छात्राओं को प्रैक्टिकल में 100 में से 170 अंक दे दिए गए। अब प्रबंधन के आपस इस गड़बड़ी पर पर्दा डालने बहाने तैयार है।

BHMS सेकण्ड ईयर एग्जाम का मामला
जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी ने 2 फरवरी को BHMS समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों के रिजल्ट जारी किए हैं। बीएचएमएस सेकेण्ड ईयर मेन-सप्लीमेंट्री के भी नतीजे घोषित हुए। जिसमें पैथोलॉजी सब्जेक्ट में प्रेक्टिकल के भी परिणाम शामिल थे। प्रेक्टिकल सौ अंकों का था, लेकिन जब परीक्षार्थियों ने रिजल्ट देखा तो नंबर देख उनमें से 18 स्टूडेंट्स का दिमाग चकरा गया। ख़ास बात यह है कि ये सभी स्टूडेंट्स भोपाल के एक प्राइवेट कॉलेज से है।

139 से 170 तक प्राप्तांक
यूनिवर्सिटी द्वारा जब रिजल्ट घोषित किया तो भोपाल होम्योपेथिक मेडिकल कॉलेज के परिणाम चर्चा का विषय बने। परीक्षा में शामिल हुए 18 छात्र-छात्राओं के परिणाम में 139 से 170 नंबर तक मिले। जबकि प्रेक्टिकल सिर्फ 100 नंबर का था। एक एक करके जब सभी स्टूडेंट्स के नंबर उजागर हुए, तो इस गफलतबाजी के बारे में न तो कॉलेज प्रबंधन जबाब दे सका और न ही अब यूनिवर्सिटी के अधिकारी जबाब दे रहे है। छात्र-छात्राओं का कहना है कि उन्होंने बड़ी उम्मीद से BHMS करने का सपना संजोया है। लेकिन उन्हें नहीं पता था मेडिकल की पढ़ाई में इतनी हद दर्जे की लापरवाही होती है।

प्रेक्टिकल में पासिंग मार्क्स 50
आशीष राजपूत नाम के एक छात्र ने बताया कि पैथोलॉजी सब्जेक्ट के प्रेक्टिकल में पास होने के लिए सौ में से कम से कम पचास अंक हासिल करना जरुरी है। लेकिन पूर्णांक से अधिक मार्क्स आने से उनका रिजल्ट भविष्य में अमान्य रहेगा। वहीं जिन परीक्षार्थियों को ज्यादा अंक आए यदि रिजल्ट सुधार के बाद जिन स्टूडेंट्स के 50 से कम अंक आएंगे, वह फेल माने जाएगे। अब परीक्षार्थी असमंजस में है कि वह क्या करें और उनके भविष्य का क्या होगा?

BPT के रिजल्ट में भी ऐसा ही हुआ
बताया गया कि ये गड़बड़ी पहली मर्तबा सामने नहीं आई है। इससे पहले BPT के एग्जाम में भी जारी रिजल्ट में इसी तरह की गड़बड़ियाँ सामने आई। उससे पहले भी परीक्षा संबंधी कई तरह की खामियां उजागर होती रही। लेकिन पहले के मामलों से कोई सबक नहीं लिया गया। स्टूडेंट्स को अगली क्लास की पढ़ाई की भी चिंता सता रही है। इस गड़बड़ी का शिकार हुए कुछ परीक्षार्थियों ने दोबारा प्रेक्टिकल कराने की मांग की है तो वही कुछ का स्टूडेंट्स चाहते है कि प्रेक्टिकल में सभी 18 स्टूडेंट्स पास किए जाए।

मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने दी सफाई
यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रबंधन अपने बचाव में कई दलीलें दे रहा है। रजिस्ट्रार पुष्पराज सिंह बघेल का कहना है कि यह गलती कॉलेज की है। पूर्णांक 100 की जगह 200 समझकर प्राप्तांक दे दिए गए होंगे। वहीं जानकर बताते है कि कोई भी विश्वविद्यालय रिजल्ट जारी करने से पहले स्कूटनर, टैबुलेटर और रिजल्ट कमेटी की प्रक्रिया को पूरा करता है। ताकि इस तरह की त्रुटियां सामने न आए।












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