Jabalpur News: जज की कार का टैंक 50 लीटर का, पंप वाले ने पेट्रोल भर दिया 57 लीटर! थोड़ी देर बाद पंप हो गया सील

पेट्रोल-डीजल फ्यूल स्टेशन में धोखाधड़ी करने वालों की चांदी हैं। एमपी के जबलपुर में ऐसे मामले का शिकार हाई कोर्ट के जज हुए तो प्रशासन को पंप सील करना पड़ा। 50 लीटर के टैंक वाली कार में 57 लीटर पेट्रोल भर दिया गया।

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Jabalpur Judge's car's petrol:किसी की आंखों से काजल चुराना सीखना हो तो आप मध्य प्रदेश के जबलपुर चले आइए। एक से बढ़कर एक कारिस्तानी करने वाले नमूनों की यहां भरमार हैं। ताजा मामला यहां के एक पेट्रोल पंप में खुलेआम लूट का सामने आया हैं। जिसका कोई और नहीं बल्कि हाईकोर्ट के एक जज शिकार हुए। अपनी कार में पेट्रोल भरवाने पहुंचे जज साहब को जब पेट्रोल का बिल थमाया, तो उनका माथा ठनक गया। क्योकि गाड़ी का टैंक 50 लीटर क्षमता का था और कर्मचारी ने 57. 43 लीटर का बिल थमा दिया। पंप का मालिक सरबजीत सिंह मोखा वही है, जो कोरनाकाल के वक्त नकली रेमडेसिविर स्केम में पकड़ा गया था।

मोखा पेट्रोल पंप की कारिस्तानी

मोखा पेट्रोल पंप की कारिस्तानी

फ्यूल स्टेशन की यह गड़बड़ी एमपी के जबलपुर में सामने आई। वो भी तब जब हाई कोर्ट के एक जज अपनी कार में यहां पेट्रोल भरवाने पहुंचे। मशीन के सामने कार खड़ी कर पंप कर्मचारी को टैंक फुल करने कहा गया। कर्मचारी ने टैंक फुल किया और बिल 57.43 लीटर दे दिया। बिल में दर्ज पेट्रोल की मात्रा देख जज साहब का गुस्सा फूट पड़ा। क्योकि गाड़ी के टैंक में क्षमता से अधिक पेट्रोल की मात्रा दर्शाई गई।

50 लीटर क्षमता के टैंक में 57 लीटर पेट्रोल?

50 लीटर क्षमता के टैंक में 57 लीटर पेट्रोल?

हैरानी की बात तो यह है कि जिस कार का टैंक फुल करने कहा गया, उसकी क्षमता 50 लीटर की हैं। ताज्जुब यह भी कि कार में पहले से 5-10 लीटर पेट्रोल भी रहा, उसके बाद पंप से हुई पेट्रोल फिलिंग का मीटर 57 लीटर तक चला। खुलेआम यह धोखाधड़ी सामने आने के बाद पंप में मौजूद कर्मचारियों और स्टाफ की बोलती बंद हो गई। प्रशासनिक अमले को मामले की खबर लगते ही जांच टीम ने फ़ौरन पंप पर धावा बोला दिया।

जिम्मेदार अफसरों के उड़े होश

जिम्मेदार अफसरों के उड़े होश

मामला हाई कोर्ट के जज की शिकायत से जुड़ा था। लिहाजा बिना देर किए नाप तौल विभाग से लेकर खाद्य विभाग के अफसरों टीम जांच में जुट गई। फिलिंग स्टेशन के 6 नोजल की जांच की गई है, जिसमें शिकायत सही पाई गई। गड़बड़ी का शिकार हुए जज साहब ने अफसरों की जमकर क्लास ली। कहा गया कि रोजाना हजारों लोग ऐसी गड़बड़ियों का शिकार हो रहे हैं। पेट्रोल पंपों की जांच के लिए जिम्मेदार संबंधित विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठे।

पेट्रोल पंप सील, थाने में शिकायत दर्ज

पेट्रोल पंप सील, थाने में शिकायत दर्ज

देर रात तक पंप में चली जांच के बाद पंप को सील कर दिया गया। फ़ूड कंट्रोलर कमलेश तांडेकर ने बताया कि शिकायत सही पाई गई, जिसके आधार पर कार्रवाई की जा रही है। शहर के पंपों पर पेट्रोल डीजल के नाम पर मची लूट के सवाल पर वह जबाब नहीं दे सकें। प्रशासन की वह दलील भी अब किसी के गले नहीं उतर रही कि नियमित जांच की जाती हैं। यह पहला मौका नहीं जब उपभोक्ताओं के साथ इस गड़बड़ी का खुलासा हुआ। हर रोज किसी न किसी पंप में झगड़े की जड़ फ्यूल चोरी की होती है या फिर मिलावट की। लेकिन जिम्मेदार विभाग सिर्फ कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रहता है।

तय मापदंडों की भी अनदेखी

तय मापदंडों की भी अनदेखी

जिले में आधा सैकड़ा से ज्यादा पेट्रोल पंप है। तय मापदंडों के आधार पर ही पंप संचालन की अनुमति रहती है। लेकिन जबलपुर में कई जगहों पर नियमों का मखौल उड़ाया जा रहा है। सुरक्षा के साथ निर्धारित सुविधाओं का भी अभाव हैं। जिस पर नियंत्रण रखने की जिम्मेदारी खाद्य नाप तौल प्रशासन की हैं। खाना-पूर्ति के लिए जब तब दिखावे की कार्रवाई तो होती है, लेकिन नतीजा सिफ़र रहता है।

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