Jabalpur flyover incident: 'अब किसकी मौत का इंतजार'? 4 घंटे बाद भी न खतरे का सिग्नल और न कोई माकूल इंतजाम
Jabalpur flyover incident: 'हादसे दर हादसे' होते चले जाते हैं। दुहाई दी जाती हैं, आगे से सबक लेने की। लेकिन मध्य प्रदेश के जबलपुर में निर्माणाधीन फ्लाईओवर के एक घटना स्थल आंखे खोल देने के लिए काफी हैं। हादसे के चार घंटे बाद वहां की कुछ तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।
निर्माण एजेंसी को कोसा जा रहा है कि जरुरी सुरक्षा इंतजाम की परवाह नहीं। 'दुर्भाग्यपूर्ण' हादसा कहकर क्या जिम्मेदारों ने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली? क्योकि जान तो सिर्फ एक मजदूर की ही गई हैं और 6 घायल हुए हैं।
थोड़े बहुत नहीं 1120 करोड़ की लागत से प्रदेश के सबसे लंबा फ्लाईओवर बन रहा हैं। हादसे के कुछ घंटे बाद जिन लोगों ने घटना स्थल की तस्वीरें अपने कैमरे में कैदकर सोशल मीडिया में वायरल की, उन्होंने दावा किया कि कैमरे की एक्सटर्नल लाइट की तस्वीरें हैं। असलियत यह है कि घटना स्थल और उसके आसपास का एरिया अंधकार में डूबा है। साइड रोड से कुछ वाहनों की आवाजाही भी जारी हैं।

सुरक्षा संबंधी न तो कोई जरुरी संकेतक लगे है और न ही खतरे वाली जगह को दर्शाता हुआ कोई बोर्ड। घटना के थोड़ी देर बाद अफसर भी मौके का मुआयना करने पहुंचे थे। जांच के निर्देश भी जारी कर दिए। ब्रिज निर्माण कर रही NCC कंपनी के अधिकारियों ने भी सुरक्षा के सभी इंतजाम करने सिर भी हिलाया। लेकिन कुछ ही घंटे बाद स्थिति ढाक के तीन पात की तरह हैं। लोग सवाल कर रहे है कि क्या कंपनी किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रही हैं?
चुनाव का वक्त भी है, नेताओं की भागदौड़ भी चल रही हैं। लेकिन इन स्थितियों पर नजर रखने की किसी के पास फुर्सत क्यों नहीं हैं? कांग्रेसी नेता प्रदर्शन करने जरुर यहां पहुंच गए थे। आरोपों की झड़ी लगाकर वो चलते बने। कुछ नेता, चुनाव मैदान में उतरने वाले दावेदार और प्रत्याशी घायल मजदूरों का हाल-चाल जानने अस्पताल पहुंचे।












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